चुनाव बिहार का मानस ‘खुमारी’ में है…

बिहार का मानस ‘खुमारी’ में है…

-व्यालोक पाठक-  फगुनाहट की खुमारी खत्म होने के बाद चैत की चिलचिलाती धूप में चुनावी शोर भले ही तीखा हो गया है, लेकिन यह केवल…

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चुनाव नफरत के सिक्के मंडी से बाहर

नफरत के सिक्के मंडी से बाहर

-नरेन्द्र मोदी की स्वीकार्यता का नया शिखर- -मुकेश सतांकर-  भारत के मतदाता इन दिनों जनतंत्र के चुनाव महोत्सव में मशगूल हैं। 16वीं लोकसभा के चुनाव…

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जरूर पढ़ें किसानों की आर्थिक बदहाली और फलस्वरूप ‘आत्महत्या’

किसानों की आर्थिक बदहाली और फलस्वरूप ‘आत्महत्या’

-सारदा बैनर्जी-  देश में किसानोंकी आर्थिक बदहाली और उसके परिणामस्वरूप उनकी आत्महत्या की घटनाएं पिछले दो दशकों से एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में…

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साक्षात्‍कार फिल्‍मकार मुजफ्फर अली से मनीष कुमार जैसल की बातचीत

फिल्‍मकार मुजफ्फर अली से मनीष कुमार जैसल की बातचीत

हिन्दी फिल्म जगत में मुजफ्फर अली एक लब्ध-प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं. एक संवेदनशील और सरोकारी फिल्म निर्देशक के रूप में उन्होने तीन दशक से ज्यादा का…

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राजनीति दिवालिएपन के शिकार वंशवादी……

दिवालिएपन के शिकार वंशवादी……

नरेश भारतीय जनतंत्र के त्यौहार को अब तक उमंग और उम्मीद के साथ मनाया जाता रहा है. लेकिन इस बार जिन निहित स्वार्थों ने जनतंत्र…

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राजनीति माओवादी कायर हैं और सरकारें बहादुर!

माओवादी कायर हैं और सरकारें बहादुर!

माओवादी हमलों से रक्तरंजित छत्तीसगढ़ कब मुक्त होगा ? -संजय द्विवेदी भारतीय राज्य की सहनशीलता की कहानियां देखनी हों तो माओवाद से उनके संघर्ष के तरीके…

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परिचर्चा आप – परिवर्तन या पलायन

आप – परिवर्तन या पलायन

सुजाता मिश्र  खुद को सबसे अलग , सर्वश्रेष्ठ, एकमात्र देशभक्त का तमगा देने वाली आम आदमी पार्टी का सच में क्या आम आदमी से कोई…

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राजनीति ऐतिहासिक चुनाव अभियान और निशाने पर मोदी

ऐतिहासिक चुनाव अभियान और निशाने पर मोदी

संजय द्विवेदी हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक इतिहास में शायद ये सबसे महत्वपूर्ण चुनाव हैं, जिसमें दिल्ली की गद्दी के बैठै शासकों के बजाए गुजरात राज्य के…

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कविता कुमार रविंद्र के नवगीत छंदों से विशेष

कुमार रविंद्र के नवगीत छंदों से विशेष

-भारतेन्दु मिश्र-  गत तीन चार दशकों से लगातार जो कवि अपने गीतों नवगीतों से हिन्दी  कविता में अपनी उपस्थिति दर्ज करता आ रहा है ।जिसने…

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कविता सबकी अपनी चाल

सबकी अपनी चाल

-हिमकर श्याम-  आफ़त  में है ज़िन्दगी, उलझे हैं हालात। कैसा यह जनतंत्र है, जहां न जन की बात।। नेता जी हैं मौज में, जनता भूखी…

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राजनीति जस करनी तस भोगहु ताता…….

जस करनी तस भोगहु ताता…….

विपिन किशोर सिन्‍हा लोकतंत्र में हिंसा सर्वथा वर्जित है। मर्यादा में रहकर अपनी बात कहने का अधिकार सबको है।लेकिन वाणी, हथियार या थप्पड़ के माध्यम…

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राजनीति आडवाणी तो मैदान में पर मनमोहन सिंह कहां हैं?

आडवाणी तो मैदान में पर मनमोहन सिंह कहां हैं?

हमेशा व्यक्तिकेंद्रित ही रहे हैं चुनाव अभियान, मोदी केंद्र में हैं तो बुरा क्या है -संजय द्विवेदी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि…

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