बिहार का मानस ‘खुमारी’ में है…
Updated: April 14, 2014
-व्यालोक पाठक- फगुनाहट की खुमारी खत्म होने के बाद चैत की चिलचिलाती धूप में चुनावी शोर भले ही तीखा हो गया है, लेकिन यह केवल…
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नफरत के सिक्के मंडी से बाहर
Updated: April 14, 2014
-नरेन्द्र मोदी की स्वीकार्यता का नया शिखर- -मुकेश सतांकर- भारत के मतदाता इन दिनों जनतंत्र के चुनाव महोत्सव में मशगूल हैं। 16वीं लोकसभा के चुनाव…
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किसानों की आर्थिक बदहाली और फलस्वरूप ‘आत्महत्या’
Updated: April 14, 2014
-सारदा बैनर्जी- देश में किसानोंकी आर्थिक बदहाली और उसके परिणामस्वरूप उनकी आत्महत्या की घटनाएं पिछले दो दशकों से एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में…
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फिल्मकार मुजफ्फर अली से मनीष कुमार जैसल की बातचीत
Updated: April 13, 2014
हिन्दी फिल्म जगत में मुजफ्फर अली एक लब्ध-प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं. एक संवेदनशील और सरोकारी फिल्म निर्देशक के रूप में उन्होने तीन दशक से ज्यादा का…
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दिवालिएपन के शिकार वंशवादी……
Updated: April 13, 2014
नरेश भारतीय जनतंत्र के त्यौहार को अब तक उमंग और उम्मीद के साथ मनाया जाता रहा है. लेकिन इस बार जिन निहित स्वार्थों ने जनतंत्र…
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माओवादी कायर हैं और सरकारें बहादुर!
Updated: April 13, 2014
माओवादी हमलों से रक्तरंजित छत्तीसगढ़ कब मुक्त होगा ? -संजय द्विवेदी भारतीय राज्य की सहनशीलता की कहानियां देखनी हों तो माओवाद से उनके संघर्ष के तरीके…
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आप – परिवर्तन या पलायन
Updated: April 20, 2014
सुजाता मिश्र खुद को सबसे अलग , सर्वश्रेष्ठ, एकमात्र देशभक्त का तमगा देने वाली आम आदमी पार्टी का सच में क्या आम आदमी से कोई…
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ऐतिहासिक चुनाव अभियान और निशाने पर मोदी
Updated: April 12, 2014
संजय द्विवेदी हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक इतिहास में शायद ये सबसे महत्वपूर्ण चुनाव हैं, जिसमें दिल्ली की गद्दी के बैठै शासकों के बजाए गुजरात राज्य के…
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कुमार रविंद्र के नवगीत छंदों से विशेष
Updated: April 12, 2014
-भारतेन्दु मिश्र- गत तीन चार दशकों से लगातार जो कवि अपने गीतों नवगीतों से हिन्दी कविता में अपनी उपस्थिति दर्ज करता आ रहा है ।जिसने…
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सबकी अपनी चाल
Updated: April 12, 2014
-हिमकर श्याम- आफ़त में है ज़िन्दगी, उलझे हैं हालात। कैसा यह जनतंत्र है, जहां न जन की बात।। नेता जी हैं मौज में, जनता भूखी…
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जस करनी तस भोगहु ताता…….
Updated: April 12, 2014
विपिन किशोर सिन्हा लोकतंत्र में हिंसा सर्वथा वर्जित है। मर्यादा में रहकर अपनी बात कहने का अधिकार सबको है।लेकिन वाणी, हथियार या थप्पड़ के माध्यम…
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आडवाणी तो मैदान में पर मनमोहन सिंह कहां हैं?
Updated: April 14, 2014
हमेशा व्यक्तिकेंद्रित ही रहे हैं चुनाव अभियान, मोदी केंद्र में हैं तो बुरा क्या है -संजय द्विवेदी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि…
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