दया का राजनीतिकरण
Updated: February 21, 2014
-प्रमोद भार्गव- दया का राजनीतिकरण कानून की मर्यादाओं पर अतिक्रमण करता दिखाई दे रहा है। बेशरमी की यह हद संविधान, संसद और न्यायालय…
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“यथा राजा तथा प्रजा”
Updated: February 21, 2014
-आलोक कुमार- राजनीति में सुधार के लिए नागरिकों को कर्तव्य-अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था की जानकारी जरूरी है। किसी भी प्रणाली या व्यवस्था में…
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नहीं धुलेंगे दस वर्ष के पाप
Updated: February 21, 2014
-प्रवीण दुबे- क्या दस वर्षों के पाप कुछ थोड़े से पुण्य या यूं कहें कि थोड़ा सा लालच देकर धोए जा सकते हैं? मनमोहन…
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मैं और हम
Updated: February 21, 2014
-विजय कुमार- लोकसभा चुनाव निकट होने के कारण प्रचार, प्रसार और विज्ञापन-युद्ध प्रारम्भ हो गया है। कुछ दिन पूर्व समाचार पत्रों में सोनिया कांग्रेस…
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भुखमरी में मध्य प्रदेश अव्वल
Updated: February 21, 2014
-प्रमोद भार्गव- विकास और सुशासन के दावों के बीच मध्य प्रदेश भूख और कुपोषण में अव्व्ल है। ऐसा तब है जब मध्य प्रदेश ने अनाज की…
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अरविन्द केजरीवाल का इस्तीफ़ा, उनकी कमज़ोरी या सीनाज़ोरी ?
Updated: February 19, 2014
-डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने १४ फ़रवरी को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था । दरअसल, सोनिया…
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विदेशी आक्रांताओं के वंशज का भारतीय स्त्रियों को शक्ति देने पर प्रचार
Updated: February 19, 2014
-आनंद जी. शर्मा- शक्ति स्त्रीलिंग शब्द है – नारी अर्थात स्त्री शक्ति का प्रतीक नहीं अपितु शक्ति-स्वरूपा है। साक्षात शक्ति है – संभवतः इसी…
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आरक्षणः राजनीतिक सत्ता में सामाजिक सहभागिता का टुल्स
Updated: February 17, 2014
-देवेन्द्र कुमार- आरक्षण का जिन्न एक बार फिर बाहर निकलता दिख रहा है । इस बार इसे बाहर निकालने का श्रेय जाता है कांग्रेसी…
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धूल झोंकने का खेल कब तक ?
Updated: February 17, 2014
-अतुल तारे- देशवासी अपनी आंखों का क्या करें? क्या अब इन आंखों को खुद ही फोड़ लें या फिर पिछले छह दशक से देश…
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राजनैतिक दलों को नसीहत
Updated: February 17, 2014
संदर्भ:- सर्वोच्च न्यायालय की नीतिगत वादों को पूरी करने की नसीहत -प्रमोद भार्गव- केरल सरकार किए नीतिगत वादों को पूरा न करने पर सर्वोच्च न्यायालय…
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सरकार केजरीवाल की- तब आंखों की एक बूंद से, सातों सागर हारे होंगे
Updated: February 17, 2014
-डॉ. अरविंद कुमार सिंह – इंसान की विश्वसनियता उसकी बातों से नहीं, उसके कामो से होती है। राजनीति की विडम्बना यह है यहा बाते…
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… और नेहरू बोले-‘जला डालो इन्हें’
Updated: February 17, 2014
-राकेश कुमार आर्य- शहरों में हम जहां एक ओर मानवता के संपूर्ण विकास का सपना संजोते हैं और उसे धरती पर उतारने का प्रयास…
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