जरूर पढ़ें तंत्र के शोर में गण मौन

तंत्र के शोर में गण मौन

-एम. अफसर खां सागर-    हर साल 26 जनवरी को मुल्क गणतंत्र दिवस पूरी अकीदत और शान से मनाता है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय…

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राजनीति बिहार में विकास पर हावी जाति की राजनीति

बिहार में विकास पर हावी जाति की राजनीति

-आलोक कुमार-   बिहार में अहम राजनीतिक मुद्दों की बात की जाए तो जातिवाद बहुत ही हावी है। हर पार्टी एक खास जाति को साथ…

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राजनीति आखिर आप कब बोलेंगे

आखिर आप कब बोलेंगे

-डॉ. अरविन्द कुमार सिंह-    वर्तमान राजनिति की दिशा और दशा कही से ये आभास नहीं देती की वो राष्ट्रीय सोच की दिशा में काम…

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टॉप स्टोरी गण तंत्र को बदलने का मना बन चुका है!

गण तंत्र को बदलने का मना बन चुका है!

राष्ट्रीय पर्वों की रस्म अदायगी से आगे बढ़ने का समय आ गया? -इक़बाल हिंदुस्तानी-   26 जनवरी पहले भी आई और चली गयी लेकिन ऐसा…

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राजनीति कश्मीरियत का सबसे बड़ा दुश्मन हुर्रियत

कश्मीरियत का सबसे बड़ा दुश्मन हुर्रियत

-वीएसके-   जम्मू कश्मीर में इन दिनों एक अलग तरह का विरोध दिखाई दे रहा है। यह विरोध है अपनी भाषा की उपेक्षा का विरोध।…

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विविधा नीतीश के टूटते हुए तिलिस्म का ट्रेलर

नीतीश के टूटते हुए तिलिस्म का ट्रेलर

-आलोक कुमार-   हाल ही में बिहार के बेगूसराय जिले के गढ़पुरा में नीतीश कुमार की सभा में जिस प्रकार का विरोध प्रदर्शन हुआ। वो…

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राजनीति ‘अंदाज-ए-लालू’

‘अंदाज-ए-लालू’

आलोक कुमार-  लालू की एक अपनी ही अनूठी शैली है। आजकल जिस अंदाज में लालू दिख रहे हैं लगता ही नहीं कि  ये वही शख्स है जो 75 दिनों से ज्यादा जेल में  रहकर आया है ! वही पुरानी हंसी-ठिठोली, मसखरापन, मुंह में खैनी भी और ऊपर से पान भी, हाथों में माईक, भीड़ का चिर-परिचित अंदाज में नियंत्रण और अभिवादन। हाल ही में जमानत पर छूटने के…

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नेताजी की शर्मनाक उपेक्षा

-अभिषेक रंजन-   चित्र संसद भवन में नेताजी की याद में आयोजित समारोह का है. नेताजी की 117 वी जयंती थी, जिसके उपलक्ष्य में संसद भवन…

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वाह रज़ा बनारस, वाह !

-नीरज वर्मा-    भारतवर्ष ! उसका एक बड़ा और अहम हिस्सा उत्तर-प्रदेश ! और उत्तर-प्रदेश का बेहद अहम् हिस्सा वाराणसी / काशी / बनारस ! मोक्ष…

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कविता नींद तुम्हारी आंखों में

नींद तुम्हारी आंखों में

-श्यामल सुमन- नींद तुम्हारी आंखों में पर मैंने सपना देखा है अपनों से ज्यादा गैरों में मैंने अपना देखा हैकिसे नहीं लगती है यारो धूप…

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महेश भट्टजी ! तो हो जाए शशि-सुनंदा पर भी एक फिल्म!

-तारकेश कुमार ओझा-   सचमुच जीवन विरोधाभासों से भरता जा रहा है। व्यवहार में जो बातें असंभव प्रतीत होती है, दुनिया में वही होता दिखाई…

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जरूर पढ़ें गणतंत्र की मूल भावना को कब समझेंगे हम?

गणतंत्र की मूल भावना को कब समझेंगे हम?

गणतंत्र दिवस पर विशेष -योगेश कुमार गोयल-   हर साल की भांति एक और गणतंत्र दिवस हमारी चौखट पर दस्तक दे चुका है। इसमें कोई…

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