विविधा आखिर कब थमेगा यह मौत का मंजर?     नरेन्द्र भारती,

आखिर कब थमेगा यह मौत का मंजर? नरेन्द्र भारती,

एक बार फिर लाशों के ढेर लगे, चारों तरफ खून बिखरा, लाशों को ढकनें के लिए कफन भी कम पड़ गए । ऐसा ही दिल…

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विविधा देश की सरकारी संम्पति को जलाते व नुक्सान पहुंचाते आन्दोलनकारी — दोषी कौन ?- नरेन्द्र भारती

देश की सरकारी संम्पति को जलाते व नुक्सान पहुंचाते आन्दोलनकारी — दोषी कौन ?- नरेन्द्र भारती

लोकतन्त्र में प्रत्येक आदमी को अपनी बात कहने का हक है ,लेकिन जिस तरह से आन्दोलनकारी अपनी मांगों को मनवाने के लिए सरकारी सम्पति को…

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राजनीति आडवानी जी जनसंघ और बीजेपी के संस्थापक नही थे-अनिल गुप्ता

आडवानी जी जनसंघ और बीजेपी के संस्थापक नही थे-अनिल गुप्ता

हाल में भाजपा के वरिष्ठतम नेता श्री लाल कृष्ण अडवाणी जी द्वारा पार्टी की तीन समितियों से त्यागपत्र देने पर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया…

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राजनीति आर- पार की लड़ाई का वक्त

आर- पार की लड़ाई का वक्त

 वीरेंद्र सिंह परिहार बहुत से किन्तु – परन्तु और आपत्तियों के बावजूद जैसा कि प्रत्याशित था , भाजपा की गोवा में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी…

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राजनीति घोर अनास्था के युग में संघ-आस्था भाजपा का संकट हल कर गई!!  -प्रवीन गुगनानी

घोर अनास्था के युग में संघ-आस्था भाजपा का संकट हल कर गई!! -प्रवीन गुगनानी

“आज के परिदृश्य यह अविश्सनीय किन्तु सत्य है कि भाजपा संकट के सागर में गहरे धंस जाने के बाद तेजी से वापिस आई और शीघ्र…

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राजनीति पी.एम. पद की घोषणा और संविधान-राकेश कुमार आर्य

पी.एम. पद की घोषणा और संविधान-राकेश कुमार आर्य

भारत का संविधान कहीं भी ये घोषणा नही करता कि जब आम चुनाव हों तो किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को अपना भावी पी.एम.…

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राजनीति बड़ी ही कठिन हैं राह पनघट की-राकेश कुमार आर्य

बड़ी ही कठिन हैं राह पनघट की-राकेश कुमार आर्य

इतिहास लिखा जाता है, संघर्षों से। संघर्षों की यदि बात करें तो भाजपा के संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी इतिहास…

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विविधा खैरात बांटती राजनीति,और दम तोड़ता बचपन-राकेश कुमार आर्य

खैरात बांटती राजनीति,और दम तोड़ता बचपन-राकेश कुमार आर्य

एक ओर भूख और कुपोषण से दम तोड़ता बचपन है तो दूसरी ओर देश में ऊंची ऊंची अट्टालिकाएं हैं जो गरीब और गरीबी दोनों पर…

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कहानी बलिदान-विनय साहू

बलिदान-विनय साहू

थाने में एनकाउंटर में मारे गए अमजद की लाश रखी हुई है। उसी के बगल पुलिस की रोबदार वर्दी में मोहनीश बैठा हुआ था। हमेशा…

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कविता वसुधा कैसे मुस्कुराये !

वसुधा कैसे मुस्कुराये !

वसुधा कैसे मुस्कुराये ! एक सौ बाईस करोड़ का बोझ, कैसे उठा पाये ! बाग़ बग़ीचे खेत खलिहान सिमटे, फसल कोई कैसे सींचे । सबको…

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गजल मेरे जीने की रफ्तार कम तो नहीं- श्यामल सुमन

मेरे जीने की रफ्तार कम तो नहीं- श्यामल सुमन

मौत आती है आने दे डर है किसे, मेरे जीने की रफ्तार कम तो नहीं बाँटते ही रहो प्यार घटता नहीं, माप लेना तू सौ…

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दोहे रोटी पहले या खुदा-श्यमाल सुमन

रोटी पहले या खुदा-श्यमाल सुमन

निर्णय जो भी कोर्ट का मिल सब करें प्रणाम। खुदा तभी मिल पायेंगे और मिलेंगे राम।।   मंदिर-मस्जिद नाम पर कितने हुए अधर्म। लोग समझ…

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