विश्ववार्ता कब तक चीन की चाटुकारिता  करते रहेंगे हम ?

कब तक चीन की चाटुकारिता करते रहेंगे हम ?

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” भारत और चीन के रिश्‍ते अपने आरंभिक काल से बेहद जटिल रहे हैं । जिसकी एक वजह भारत की कूटनीतिक विफलता तो…

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विविधा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा राजभाषा अधिनियम की खुली अवहेलना

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा राजभाषा अधिनियम की खुली अवहेलना

महामहिम राष्ट्रपति महोदय, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली मान्यवर, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा राजभाषा अधिनियम की खुली अवहेलना  मान्यवर को ज्ञात ही है कि राजभाषा अधिनियम…

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जन-जागरण बेलगाम लाल आतंक

बेलगाम लाल आतंक

हिमकर श्याम लाल आतंक बेलगाम होता जा रहा है। नक्सली, गरीबों और आदिवासियों की मदद करने की आड़ में राज्य सत्ता को लगातार चुनौती दे…

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खेल जगत इससे तो यह खेल ही डूब जायेगा

इससे तो यह खेल ही डूब जायेगा

70 के दशक में क्रिकेट भारत के सुदूर गांवों में उतरने लगा, तब मैदान में एक ओर गिल्ली डंडे चलते थे तो दूसरी ओर कुछ…

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कविता कविता : संकल्प

कविता : संकल्प

मिलन सिन्हा जो है खरा झंझावात में भी वही रह पायेगा खड़ा . नहीं दिखेगा वह कभी भी डरा-डरा . कोई भी उसे अपने संकल्प…

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व्यंग्य व्यंग्य बाण : डंडा सैल

व्यंग्य बाण : डंडा सैल

परसों शर्मा जी बहुत दिन बाद मिलने आये, तो उनकी सूजी हुई आंखों से दुख टपक रहा था। चेहरे से ऐसा लग रहा था मानो…

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राजनीति चीन के अनुकूल रही वार्ता

चीन के अनुकूल रही वार्ता

प्रमोद भार्गव विश्व – भूगोल पर नए शक्ति-केंद्रों के रुप में उभर रहे भारत और चीन की वार्ता, आखिरकार चीन के पक्ष में जाती दिखार्इ…

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कविता मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी

मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी

अब मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी कविताएँ ही पढ़ता हूँ कविता ही क्या ? तुम्हें भी तो पढता हूँ… महज़ एक कोशिश !   तुम्हारी मुस्कान…

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जन-जागरण इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए

इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए

तर्क और बहानों से आगे बढ़ने का समय इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए   माओवादी आतंकवाद के विकृत स्वरूप पर बौद्धिक विमर्शों…

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खेल जगत चोरी और सीनाजोरी

चोरी और सीनाजोरी

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” कभी भद्र जनों के खेलों के नाम से विख्‍यात क्रिकेट आज अभद्रता के सारे कीर्तिमानों को ध्‍वस्‍त करता नजर आ रहा है…

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विविधा बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में

बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में

सेवा में राष्ट्रपति राष्ट्रपति भवन भारत सरकार नई दिल्ली | विषय |- बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में हम भक्तजन आपसे निवेदन | श्रीमान जी…

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कविता कितने प्यार से

कितने प्यार से

सींचा था मैंने उस रिश्ते को अपने ही हाथों मे संभाला था उसे किसी फूल की तरह   समझदार तो था मगर हरबार हौसला बढाता…

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