हिन्दी, हिन्दू , हिन्दुस्तान : शब्दों की दास्तान
Updated: July 19, 2013
डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री हिन्दी , हिन्दू , हिन्दुस्तान – आज ये शब्द सभी देशवासियों की शब्दावली के सुपरिचित शब्द हैं। इसलिए आज यह कल्पना करना भी कठिन है कि कभी ये शब्द सर्वथा अपरिचित थे,…
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हास्य व्यंग्य कविताएं : शिष्टाचार, भाईचारा, मौज
Updated: July 19, 2013
मिलन सिन्हा शिष्टाचार माल सब साफ़ किया विकास के नाम पर…
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उलझे हुए सवालात
Updated: July 19, 2013
जग मोहन ठाकन अजीब से हालात हैं , हम क्या करें ? उलझे हुए सवालात हैं , हम क्या करें ? एफ डी आर्इ विदेशी …
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उत्तराखण्ड-विनाश पर कुछ दोहे
Updated: July 19, 2013
डा.राज सक्सेना बोतल में गंगा भरी, बुझी न अनबुझ प्यास | नदियों को झीलें बना,अदभुत किया विकास || खण्ड-खण्ड पर्वत किये, खीँच-खीँच कर खाल…
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राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से पनप रहा है आतंकवाद
Updated: July 19, 2013
प्रो. ब्रह्मदीप अलुने विश्व में भारत आतंकवाद की प्रयोगशाला के रूप में पहचाना जाने लगा है। इराक, अफगानिस्तान जैसे राष्ट्र गृहयुद्ध से जूझ रहे…
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गुरु हरकृष्ण धिआईएै….
Updated: July 19, 2013
( गुरु हरकृष्ण जयंति विशेष 23 जुलाई) परमजीत कौर कलेर गुरु हरिकृष्ण धिआईए जिस डिठै सब दुख जाए ।।गुरबाणी की इस पंक्ति को सुनकर आपने…
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हम गरीब या वंचित को इंसान समझते ही कब हैं?
Updated: July 19, 2013
बिहार के एक स्कूल में मिड डे मील की वजह से हुई बच्चों की मृत्यु ने बहुत दुखी कर दिया है| यदि ये कोई साजिश…
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ये कैसी राजनीति
Updated: July 19, 2013
उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख राजनैतिक दल बहुजन समाज पार्टी का एक मुस्लिम सांसद भरी संसद में वंदेमातरम् का गान करने से मना कर देता…
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जातीय राजनीति के खेल पर अंकुश
Updated: July 18, 2013
प्रमोद भार्गव राजनीति के जातीय खेल पर अंकुश लगान की कवायद इलाहबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ लखनऊ ने कर दी है। इस फैसले का स्वागत…
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कानून से ऊपर न्याय-राकेश कुमार आर्य
Updated: July 18, 2013
गंगा यमुना में पानी की रफ्तार बढ़ी हुई है-मौसम बाढ़ का है। समय की रफ्तार भी तेज हो रही है-मौसम चुनावों (2014) का है। सही…
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दोहा:- जय नेता गन राजनीती
Updated: July 18, 2013
दोहा:- जय नेता गन राजनीती के तुमको करू प्रणाम // तुम्ही विधाता अन्यायी के करो चापलूसों का काम// चौपायी :- जय राजनीती के नेता गण // तुम मोहे हो निर्दयी के मन/// सब चमचो की करो भलायी // वे चाहे जितनी करे बुरायी // उन्हें आंच नहीं आने पाये // तुम्हरी कुर्सी भले ही जाये // भ्रष्टाचार में तुम आगे हो/// अवगुण कारी के धागे हो/// घपला झगड़ा तुम करवाते // सही जनों को यूं मरवाते // राजनीति के पके पुजारी/// तुम दोषी के करो रखवारी/// जुर्म करवाने में माहिर हो/// चोर उचक्कों में सामिल हो/// धन्य धन्य भारत के बीर // भोली जनता पे मारो तीर/// है कुर्सी का खेल निराला // हरदम ओढ़े रहो दुशाला/// रुपयों की तुमको भूख लगी है/// बेईमानी की प्यास जगी है/// कब तक ऐसे चलेगा काम/// चले जाओगे धुरिया धाम/// हाथ जोड़ कर नहीं बचोगे///…
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प्रगतिशील बिहार और गंदगी का साम्राज्य
Updated: July 18, 2013
निर्मल रानी देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार भी अन्य राज्यों की तरह इस समय प्रगति की राह पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा…
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