कविता आखिर क्यों ?

आखिर क्यों ?

हम कसाव को बिरयानी, खिलाते रहे- पूरी न्यायिक प्रकिया के बाद, लगाई फाँसी.. उन्होने सरबजीत को, पीट पीट कर मार डाला, मानवाधिकार, की बात करने…

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टॉप स्टोरी और कितने सरबजीत दम तोड़ेंगे?

और कितने सरबजीत दम तोड़ेंगे?

पाकिस्तान में लाहौर की कोटलखपत जेल में कैद सरबजीत की जिन्ना अस्पताल में हुई मौत को भारत सरकार की हार कहा जाए या पाकिस्तान का…

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कविता : प्रशासन और दु:शासन

 मिलन सिन्हा जनता आज द्रौपदी बन गयी है पांडवों  की ईमानदारी कल की बात हो गयी है कृष्ण का अता-पता नहीं गलत को ही लोग…

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ज़िन्दगी

राघवेन्द्र कुमार “राघव”   क्या सर्दी और क्या गर्मी,    मुफ़लिसी तो मुफ़लिसी है ।     कांपती और झुलसती ज़िन्दगी चलती तो है ,  …

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विविधा हवाईयन-अंग्रेज़ी-हिंदी शब्द सीमा

हवाईयन-अंग्रेज़ी-हिंदी शब्द सीमा

डॉ. मधुसूदन ॐ –शब्द किस सामग्री से, और कैसे बनता है? ॐ–शब्द समृद्धि की चरम सीमा। ॐ–अंग्रेज़ी की अपेक्षा  हिंदी २१ गुणा समृद्ध? एक: शब्दों…

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टॉप स्टोरी प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण जन-असुविधाएं एवं क्षति

प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण जन-असुविधाएं एवं क्षति

निर्मल रानी हमारा देश में इस समय जहां राष्ट्रीय स्तर पर तमाम राष्ट्रीय राजमार्ग, उपमार्ग, नगरों, क़स्बों व महल्लों की सड़कें व गलियां, तमाम बड़े…

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राजनीति वफादारी और ईमानदारी में अंतर होता है-

वफादारी और ईमानदारी में अंतर होता है-

 सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” भ्रष्‍टाचार और घपले घोटालों में आकंठ डूबी कांग्रेस पार्टी की विश्‍वसनीयता दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है । हांलाकि कांग्रेस अब…

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टॉप स्टोरी सरबजीत सिंह….मृत्यु की डगर पर

सरबजीत सिंह….मृत्यु की डगर पर

वीरेन्द्र सिंह चौहान लाहौर के जिन्ना अस्पताल में सरबजीत सिंह  मृत्यु की डगर पर कोमा से एक कदम और आगे बढ़ गया है। खबर है…

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राजनीति दुर्जन कुमार सज्जन कुमार बन कर घूम रहे हैं

दुर्जन कुमार सज्जन कुमार बन कर घूम रहे हैं

कुलदीप चंद अग्निहोत्री  कल  सबूतों के अभाव में केन्द्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष अदालत में सज्जन कुमार बंदी होने से बच गये । उन्हें…

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जन-जागरण हक़ हनन और मजदूर दिवस

हक़ हनन और मजदूर दिवस

अबदुल रशीद मजदूरों की एकता को भंग कर तथाकथित मजदूर यूनियन अपनी-अपनी दुकान चलाने के सिवा करते ही क्या है? 1 मई मजदूर दिवस, आखिर…

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कविता गीत कैसे बनाऊँ

गीत कैसे बनाऊँ

                                   बेसुरी सी ज़िन्दगी मे, स्वर मै कैसे लगाऊँ।…

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गजल रिश्ते भी हो गये हैं व्यापार की तरह….

रिश्ते भी हो गये हैं व्यापार की तरह….

               इक़बाल हिंदुस्तानी दावा तो कर रहे थे वफ़ादार की तरह , अब क्यों खड़े हैं आप ख़तावार की…

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