कविता चंद शब्दों के अंश

चंद शब्दों के अंश

कुछ कहानियां और किस्से गाँव से बाहर के हिस्से में पुरानें बड़े दरख्तों पर टंगे हुए.   कुछ कानों और आँखों में कही बातें जो…

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आलोचना अस्मिता,आम्बेडकर और रामविलास शर्मा

अस्मिता,आम्बेडकर और रामविलास शर्मा

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी रामविलास शर्मा के लेखन में अस्मिता विमर्श को मार्क्सवादी नजरिए से देखा गया है। वे वर्गीय नजरिए से जातिप्रथा पर विचार करते हैं।…

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महिला-जगत चरित्रहीन आदर्शवाद

चरित्रहीन आदर्शवाद

(संदर्भःपूरब-पच्छिम फिल्म) आदित्य कुमार गिरि भारतीय हिन्दी फिल्मों का विश्लेषण करने पर जो एक बात सामने आती है वह यह है कि इसका पूरा चरित्र…

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आलोचना विरोध और स्त्री

विरोध और स्त्री

आदित्य कुमार गिरि आमतौर पर यह धारणा है कि स्त्री विमर्श के अन्तर्गत स्त्री लेखिकाएँ पुरुषों के प्रति घृणा का भाव रखती हैं।उन्हें मानो पुरुष…

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आर्थिकी वेदांता समूह को बाक्साइट खनन में झटका

वेदांता समूह को बाक्साइट खनन में झटका

न्यायालय से मिली ग्रामसभा को शक्ति संदर्भ:- वेदांता समूह को बाक्साइट खनन में झटका – प्रमोद भार्गव वेदांता जैसी खनिज उत्खनन की बहुराष्ट्रीय कंपनी और…

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राजनीति क्या नेहरू लोकतांत्रिक तानाशाह थे?

क्या नेहरू लोकतांत्रिक तानाशाह थे?

 आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरू एक स्वप्नदृष्ठा राजनीतिज्ञ के तौर पर विश्वभर में जाने जाते है, वे बीसवी शताब्दी के लोकप्रिय नेताओं में से…

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विविधा अब  खामोश क्‍यों हैं मानवाधिकारों के पैरोकार

अब खामोश क्‍यों हैं मानवाधिकारों के पैरोकार

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” मानवाधिकार वास्‍तव में एक जटिल विषय है । जटिल इसलिए क्‍योंकि इन्‍ही का लाभ लेकर ही अक्‍सर तथाकथित सेक्‍यूलर लोग आतंकियों के…

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कविता अक्सर……………….!!!

अक्सर……………….!!!

अक्सर ज़िन्दगी की तन्हाईयो में जब पीछे मुड़कर देखता हूँ ; तो धुंध पर चलते हुए दो अजनबी से साये नज़र आते है .. एक तुम्हारा और…

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कला-संस्कृति आदिवासी भाषाओं पर उपेक्षा का दंश…………….

आदिवासी भाषाओं पर उपेक्षा का दंश…………….

विशिष्ट सभ्यता, संस्कृति के नाम पर लगभग एक सौ वर्ष के  संघर्ष के बाद झारखंड राज्य तो अस्तित्व में आया, लेकिन इन विशिष्टताओं को पहचान…

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हिंद स्‍वराज जंग ए आजादी  में किसानों के सशस्त्र संघर्ष और आजादी के जश्न

जंग ए आजादी में किसानों के सशस्त्र संघर्ष और आजादी के जश्न

अरविन्द विद्रोही  लम्बी मुगलकालीन दासता के पश्चात् ब्रितानिया हुकूमत की गुलामी की बेड़ियों को काटने के अनवरत संग्राम का सुखद परिणाम 15 अगस्त ,1947 को…

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कविता आखिर क्यों ?

आखिर क्यों ?

हम कसाव को बिरयानी, खिलाते रहे- पूरी न्यायिक प्रकिया के बाद, लगाई फाँसी.. उन्होने सरबजीत को, पीट पीट कर मार डाला, मानवाधिकार, की बात करने…

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टॉप स्टोरी और कितने सरबजीत दम तोड़ेंगे?

और कितने सरबजीत दम तोड़ेंगे?

पाकिस्तान में लाहौर की कोटलखपत जेल में कैद सरबजीत की जिन्ना अस्पताल में हुई मौत को भारत सरकार की हार कहा जाए या पाकिस्तान का…

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