प्रवक्ता न्यूज़ अफजल को फांसी

अफजल को फांसी

आर. के. गुप्ता मौहम्मद अफजल को आखिरकार 2014 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सरकार ने 09 फरवरी, 2013 को फांसी दे…

Read more
जन-जागरण आओ समझें: हिन्दी अक्षरों का वैज्ञानिक स्वरूप-भाग 2

आओ समझें: हिन्दी अक्षरों का वैज्ञानिक स्वरूप-भाग 2

व्यंजन अक्षर अभी तक हमने हिंदी वर्णमाला के स्वर कहे जाने वाले अक्षरों के विषय में कुछ समझने का प्रयास किया है। अब हम व्यंजनों…

Read more
टॉप स्टोरी सार्थक परिणाम है अफजल की फांसी

सार्थक परिणाम है अफजल की फांसी

प्रमोद भार्गव सामंती युग में जिस तरह से देश के वजूद के प्रतीक दुर्ग हुआ करते थे और दुर्ग पर हमले का मतलब राश्ट पर…

Read more
शख्सियत मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की कवायद ?

मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की कवायद ?

प्रमोद भार्गव भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता जिस तरह से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए पैरवी की होड़ में लगे हैं, उसकी…

Read more
राजनीति लौह पुरुष ने अभी हार कहाँ मानी है ?

लौह पुरुष ने अभी हार कहाँ मानी है ?

ज़ाहिर है, भारतीय राजनीति की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस और भाजपा इन दिनों आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मुद्दे और नेता की तलाश में…

Read more
राजनीति क्या सांप्रदायिक ऐजेन्डे पर होगा लोक सभा चुनाव ?

क्या सांप्रदायिक ऐजेन्डे पर होगा लोक सभा चुनाव ?

 मुजफ्फर भारती- हिंदुस्‍तान की राजनीति में वोट बैंक पॉलिटिक्‍स कोई नई बात नहीं है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्‍या अगले चुनाव में राजनीतिक…

Read more
विविधा अटूट हैं इस्लाम और संगीत के रिश्ते

अटूट हैं इस्लाम और संगीत के रिश्ते

तनवीर जाफ़री फ़तवा जारी करने में महारत रखने वाले तमाम नीम-हकीम मुल्लओं द्वारा समय-समय पर इस्लाम धर्म के हवाले से ऐसे विवादित फतवे जारी किए…

Read more
राजनीति ‘सिद्धांतों और सिंहासन के दोराहे पर खड़ी है भाजपा

‘सिद्धांतों और सिंहासन के दोराहे पर खड़ी है भाजपा

 सिद्धार्थ मिश्र स्वतंत्र’ लोकसभा चुनावों के नजदीक आने के साथ सभी दलों की बेचैनी साफ दिखाई दे रही है । बात चाहे भाजपा की हो…

Read more
गजल अहसास ए दर्द वो करे गर चोट खायें हम….

अहसास ए दर्द वो करे गर चोट खायें हम….

इक़बाल हिंदुस्तानी नामो निशां भी जुल्म का जिसमें ना पायें हम, ऐसा निज़ाम देश में लाकर दिखायें हम।   अब ऐसे आदमी को मसीहा बनाइये,…

Read more
कविता मैने कहाँ मांगा था…

मैने कहाँ मांगा था…

मैने कहाँ मांगा था सारा आसमा, दो चार तारे बहुत थे मेरे लियें, दो चार तारे भी नहीं मिले तो क्या.. चाँद की चाँदनी तो…

Read more
कविता मौन

मौन

विजय निकोर तुम्हारी याद के मन्द्र – स्वर धीरे से बिंध गए मुझे कहीं सपने में खो गए और मैं किंकर्तव्यविमूढ़ अपने विस्मरण से खीजता…

Read more
कविता बसंत बहार

बसंत बहार

गूंजा राग बसंत बहार दिशा दिशा सम्मोहित हैं, फूल खिले तो रंग बिखरे हैं, गूंजा जब मधुरिम आलाप। भंवरों पर छाया उन्माद, स्वरों की हुई…

Read more