कविता Default Post Thumbnail

दामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो।

राकेश कुमार आर्य दामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो। दुष्टाचारी पापाचारी के सामने तन गयी हो।।   तुम्हारे नाम से बहुत सी बहनों…

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पुस्तक समीक्षा Default Post Thumbnail

मातृसत्ताक समाज और ‘वोल्गा से गंगा’– सारदा बनर्जी

राहुल सांकृत्यायन की कृति ‘वोल्गा से गंगा’ मातृसत्ताक समाज में स्त्री वर्चस्व और स्त्री सम्मान को व्यक्त करने वाली बेजोड़ रचना है। इस रचना में…

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आर्थिकी Default Post Thumbnail

2013 की चिंता और चुनौतियां

  डॉ. आशीष वशिष्ठ बनने-बिगडऩे के ढेरों कारनामें अपने दामन में समेटकर 2012 भारी जनाक्रोश, आंदोलन और लोकतंत्र के चारों खंभों को हिलाकर विदा हो…

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बच्चों का पन्ना Default Post Thumbnail

छक्का

प्रभुदयाल श्रीवास्तव “दादाजी मैं छक्का मारूंगा”अमित ने क्रिकेट बेट लहराते हुये मुझसे कहा|वह एक हाथ में बाल लिये था”,बोला प्लीज़ बाँलिंग करो न दादाजी|” “अरे!…

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बच्चों का पन्ना Default Post Thumbnail

बाल कहानी – कीरत तीरथ

प्रभुदयाल श्रीवास्तव धरमपुरा रियासत के एक गांव में कीरत तीरथ नाम के दो सगे भाई रहते थे। किसी गंभीर बीमारी के चलते उनके पिता मल्थूराम…

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चिंतन Default Post Thumbnail

विडंबनाओं के देश में स्त्री-सुरक्षा..

अरुण कान्त शुक्ला दुनिया के किसी भी देश में रहने वाले इतनी विडंबनाओं के साथ नहीं जीते, जितनी विडंबनाओं के साथ हमें भारत में जीना…

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चिंतन Default Post Thumbnail

लापरवाह नागरिक बनाना चाहते हैं आदर्श राष्ट्र

एक से अधिक व्यक्तियों के जुड़ने से एक परिवार बनता है, परिवारों के मिलने से मोहल्ला, नगर और समाज का निर्माण का होता है। इसी…

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जन-जागरण Default Post Thumbnail

दामिनी कह गई- अब सोना नहीं

लोकेन्द्र सिंह राजपूत दु:खद, बेहद दु:खद २०१३ का आखिरी शनिवार। दामिनी चली गई। हमेशा के लिए इस बेदर्द दिल्ली से। बेहया दुनिया से, जहां उसे…

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राजनीति Default Post Thumbnail

गुज़रा राजनितिक परिदृश और जनमानस

अरविन्द विद्रोही भारत जैसे विशाल भू भाग वाले देश में विभिन्न धर्म को मानने वालों को समानता का दर्ज़ा प्राप्त है । भारत की लोकतान्त्रिक…

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जन-जागरण विदेशी दासता की पहचान है जनवरी का नया साल

विदेशी दासता की पहचान है जनवरी का नया साल

विनोद बंसल जनवरी के नजदीक आते ही जगह-जगह जश्न मनाने की तैयारियां प्रारम्भ हो जाती हैं। करोडों रुपए का खर्चा नव वर्ष की तैयारियों में…

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कविताएं-स्पर्श एवं सिनेमा

स्पर्श अजीब बात है दुनिया भर से हाथ मिलाकर मेरे हाथों ने खो दी है अपनी ऊष्मा स्पर्श की अनुभूति जड़ और चेतन के बीच…

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जन-जागरण बलात्कार : स्थितियां कैसे बदलेंगी?

बलात्कार : स्थितियां कैसे बदलेंगी?

सच यह है कि हमारे देश में कानून बनाने, कानून को लागू करने और कोर्ट से निर्णय या आदेश या न्याय या सजा मिलने के बाद उनका…

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