कविता घाव समय के

घाव समय के

  अस्तित्व की शाखाओं पर बैठे अनगिन घाव जो वास्तव में भरे नहीं समय को बहकाते रहे पपड़ी के पीछे थे हरे आए-गए रिसते रहे…

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व्यंग्य व्यंग्य बाण : रोग दरबारी

व्यंग्य बाण : रोग दरबारी

विजय कुमार लोग समझते हैं कि नौकरी से अवकाश प्राप्त कर लेने के बाद व्यक्ति की मौज ही मौज है; पर इसमें कितनी मौज है…

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विविधा जो तटस्थ हैं…।

जो तटस्थ हैं…।

विजय कुमार पिछले दिनों उ0प्र0 शासन के एक मंत्री आजम खान को अमरीका के हवाई अड्डे पर जांच के लिए कुछ देर रोका गया। सुना…

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जन-जागरण विवादित है ईसा मसीह की जन्मतिथि

विवादित है ईसा मसीह की जन्मतिथि

डा.राज सक्सेना भगवान राम के अस्तित्व पर बेझिझक अंगुली उठा ने वालों से एक प्रश्न किया जा सकता है कि वे क्या प्रभुपुत्र ईसा मसीह…

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प्रवक्ता न्यूज़ मैं जिंदा रह सकता हूं

मैं जिंदा रह सकता हूं

तपतीधरती,तपताअम्बर,मैं तिल-तिल सह सकता हूं | इन दोनों के बीच में तप कर,मैं जिंदा रह सकता हूं | जिन से मेरे दिल के रिश्ते, देस…

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टेक्नोलॉजी परमाणु बिजली उत्पादन का खुलता रास्ता

परमाणु बिजली उत्पादन का खुलता रास्ता

संदर्भ:- कुडनकुलम परमाणु संयंत्र को शीर्श न्यायालय की मंजूरी प्रमोद भार्गव तमिलनाडू के कुडनकुलम परमाणु विधुत संयंत्र को सर्वोच्च न्यायालय की हरी झण्डी मिलने के…

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विधि-कानून न्याय पाने की भाषायी आज़ादी

न्याय पाने की भाषायी आज़ादी

राजीव गुप्ता स्वतंत्रता पूर्व भारत मे सरकारी समारोहों में ‘गाड सेव द किंग’ या ‘गाड सेव द क़्वीन’ गाया जाता था. पर्ंतु 15 अगस्त 1947…

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विश्ववार्ता कैसा होगा नवाज़ शरीफ़ का पाकिस्तान?

कैसा होगा नवाज़ शरीफ़ का पाकिस्तान?

तनवीर जाफ़री पाकिस्तान के मतदाताओं ने एक बार फिर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ (पीएमएलएन)को बहुमत देकर नवाज़ शरीफ को प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित किए…

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आर्थिकी चीन को ज्यादा जरुरत है भारत की

चीन को ज्यादा जरुरत है भारत की

प्रमोद भार्गव चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग की यह प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा है। इसी की तैयारी में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने…

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आर्थिकी भारत के बाजार से चीन मालामाल

भारत के बाजार से चीन मालामाल

भारत के बड़े बाजार में धंधा कर चोखा मुनाफा बटोरने वाली कंपनियों की दो जमात है। एक वह जो अपने उत्पाद में थोड़ी बहुत गुणवत्ता…

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कविता “गुलाब भरा आँगन”

“गुलाब भरा आँगन”

सहजता सिमटता हवा का झोंका सहज होनें का करता था भरपूर प्रयास. बांवरा सा हवा का वह झोंका गुलाबों भरे आँगन से चुरा लेता था…

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समाज भारत में समलैंगिक(पुरूष) व्यभिचार

भारत में समलैंगिक(पुरूष) व्यभिचार

डा.राज सक्सेना समलैंगिक(पुरूष) व्यभिचार के सम्बन्ध में अनेक विद्वान लेखकों ने हर दिशा और  हर दृष्टिकोण से खोंज की है | वे अपनी इस खोज…

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