‘आप’ से कितना जुड़ेगा आम आदमी
Updated: November 26, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ आखिरकार एक सामाजिक जनआंदोलन की कोख से राजनीतिक दल का जन्म हो ही गया. इण्डिया अंगेस्ट करप्शन के मुख्य कर्ता-धर्ता, पूर्व आयकर…
Read moreमाफ़ी क्यों मांगें नरेन्द्र मोदी??
Updated: November 26, 2012
गुजरात के चुनाव जैसे जैसे निकट आते जा रहें है एवं चुनावी समर की सरगर्मियां बढती जा रही हैं वैसे वैसे ही अनेकों विश्लेषण और…
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अपनी ही जड़ों से उखड़ते आदिवासी
Updated: November 24, 2012
आदिवासियों के नायक बिरसा मुण्डा की जंयती के अवसर पर दिल्ली में देश के दूर दराज के राज्यों से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने…
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राम बनाम राम जेठामलानी
Updated: November 24, 2012
वीरेन्द्र सिंह परिहार देश के ख्याति-लब्ध अधिवक्ता और भाजपा के राज्यसभा सासंद रामजेठामलानी का गत दिनों का यह कथन काफी तूल पकड़ चुका है कि…
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सफेद दूध का काला कारोबार
Updated: November 24, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ दूध देशभर के आशीर्वाद में पिरोया हुआ शब्द है। रिश्ते में बड़ा आज भी छोटे को आशीष देते समय दूध और पुत्र…
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कविता – उसे चुनना है
Updated: November 24, 2012
मैं अंतरिक्ष में भटक रहा हूँ पिंजरे में कैद मात्र शून्य की तरह लचीली रेखा भी मेरे साथ घुम रही है मैं आश्वस्त हूँ सभी…
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और क्या चाहिये…
Updated: November 24, 2012
राह है ,राही भी है ,मंज़िल भले ही दूर हो, एक पड़ाव चाहिये मुड़कर देखने के लिये। कला है, ,प्रतिभा है, रचना है,,, ,,…
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‘इस्लामिक द्विराष्ट्रवाद एवं संविधान
Updated: November 24, 2012
जब भारत स्वतन्त्र होने की प्रक्रिया से निकल रहा था तभी भारत के लिए संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा का गठन हो गया था। 9…
Read moreहाथ पांव अपने हैं दिल दिमाग़ गिरवीं हैं…..
Updated: November 24, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी कै़द में सता लो तुम पर मिटा नहीं सकते, है सदा ए हक़ मेरी तुम दबा नहीं सकते। ध्ूाप का मुसाफिर…
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फांसी के पीछे की स्याह सियासत
Updated: November 24, 2012
सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’ देश की अखंडता पर कुठाराघात करने वाले कसाब को इस दुनिया से रूखसत हुए 48 घंटे से भी ज्यादा हो गये । इसके…
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आतंकियों की धमकी को हलके में न ले सरकारr
Updated: November 24, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम देश की अस्मिता पर हमला करने वाले दुर्दांत आतंकी आमिर अजमल कसाब को दी गई फांसी पर विश्व भर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं…
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भारतीय जनतंत्र अपने में अनूठा
Updated: November 21, 2012
अनिल अनुप भारतीय जनतंत्र शब्दों में बहुत बड़ा कहा जाता है पर गुणत्व में बहुत सी खामियां हैं। यदि जनतंत्र का आशय देशहित को ताक…
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