कविता-समय
Updated: October 2, 2012
समय का, न आदि है न अंत, भ्रम होता है कभी, जैसे समय रुक गया हो, भ्रम होता है कभी, जैसे समय दौड़ता हो, पर…
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खून के कई रिश्ते खून के ही प्यासे हैं…..
Updated: October 2, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी मुश्किलों में लोगों को खूब आज़माते हैं, जो खरे उतरते हैं दोस्त बन जाते हैं। जैसे छोटे बच्चे हैं कुछ भी जानते…
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जंगल का प्रजातंत्र
Updated: October 2, 2012
बहुत ही सुहावना मौसम था सुबह ही झमाझम बारिस हो चुकी थी और अब गुनगुनी धूप निकल आई थी|जंगल के सभी जानवर खुशी के मारे…
Read moreरंग बिरंगे पाउच के पीछे का तबाह बचपन
Updated: October 2, 2012
15 मिनट एक बच्चे अशोक के साथ … एस के नागर ये तस्वीर आज सुबह मेरे ऑफिस के नीचे की हें .. हर रोज की…
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बापू और शास्त्री को जीवन में उतारना
Updated: October 2, 2012
याद करने से ज्यादा जरूरी है बापू और शास्त्री को जीवन में उतारना डॉ. दीपक आचार्य आज का दिन राष्ट्रपति महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री…
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तो आवश्यक बुद्धि विकास|
Updated: October 1, 2012
जितना दूर समझते हो तुम, उतना दूर नहीं आकाश| दृढ़ विश्वास सबल शक्ति हो, तो पाओगे बिल्कुल पास| अगर नहीं छू पाये तो भी,…
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भारतीय संप्रभुता पर संकट: एक विवेचन
Updated: September 30, 2012
सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’ विकीलिक्स के खुलासों ने रातांे रात पूरी दुनिया की रंगत बदल कर रख दी है । इसका सीधा सा असर अमेरिका पर पड़ता…
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आधी रात बीत गई
Updated: October 2, 2012
प्रभुदयाल श्रीवास्तव आठ लोरियां सुना चुकी हूँ, परियों वाली कथा सुनाई| आधी रात बीत गई बीत भैया, अब तक तुमको नींद न आई| थपकी…
Read moreराष्ट्र भाषा हिंदी की दुर्दशा
Updated: September 30, 2012
राकेश कुमार आर्य आज हम स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक हैं। हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी है, इस भाषा को बोलने वाले विश्व में सबसे अधिक…
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भारत की सही पहचान – भाग २
Updated: October 1, 2012
विश्व मोहन तिवारी राष्ट्र की अवधारणा भी वेदों – ऋग्वेद तथा अथर्ववेद – में है। देखें : ऋग्वेद के निम्नोक्त मंत्र हमारी मातृभूमि तथा संस्कृति…
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व्हाइट हाउस की दिलचस्प जंग………………….
Updated: September 30, 2012
हर्षवर्धन पाण्डे अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की जंग इन दिनों परवान पर है | ४५ वे राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा ने दुबारा राष्ट्रपति बनने के…
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भगत सिंह – एक महान सामाजिक चिन्तक:राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’
Updated: October 2, 2012
भारत माँ के लिए हँसते-हँसते जन कुर्बान कर देने वाले ”नास्तिक” नहीं हो सकते | लेकिन मात्रभूमि का एक दीवाना अपने को नास्तिक कहता था…
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