विविधा रोज सर कटाओ, रोज शहीद कहलाओ..

रोज सर कटाओ, रोज शहीद कहलाओ..

 अरुण कान्त शुक्ला कल भगत सिंह का जन्म दिवस है| बीते हुए कल देश के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का जन्म दिन था। यह विडम्बना नहीं चुने…

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व्यंग्य सरकार आपकी शक्कर खाई है

सरकार आपकी शक्कर खाई है

प्रभुदयाल श्रीवास्तव सरकार ने अपने चमचे की तरफ बंदूक तान दी और शूट करने का मन बना लिया|चमचा बेचारा घबरा गया,सरकार के हाथ पैर जोड़ने…

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व्यंग्य हिन्दी बेचारी और मेरी लाचारी

हिन्दी बेचारी और मेरी लाचारी

 अशोक बजाज लेडीज़ एंड जेंटलमेन, गुड मार्निंग   पूरे इण्डिया में 14 सितंबर को औपचारिक रूप से हिंदी दिवस मनाया गया. मेरा स्कूल मीडियम इंगलिश…

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शख्सियत अक्षुण्ण है संस्कृति की मौलिकता – दीनदयाल उपाध्याय

अक्षुण्ण है संस्कृति की मौलिकता – दीनदयाल उपाध्याय

  अशोक बजाज पं. दीनदयाल उपाध्याय की जंयती 25 सितम्बर पर विशेष पं. दीनदयाल उपाध्याय एक महान राष्ट्र चिन्तक एवं एकात्ममानव दर्शन के प्रणेता थे.…

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विविधा व्यंग्य/ मेरी ऐनक प्लीज!

व्यंग्य/ मेरी ऐनक प्लीज!

अशोक गौतम इधर सरकार ने महंगाई से त्रस्त बंदे को महंगाई भत्ता देने की घोषणा भर की तो सुबह उधर लाला ने आटा बीस से…

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राजनीति महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल / मा. गो. वैद्य

महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल / मा. गो. वैद्य

मराठी में ‘घड़ामोड़’ (बनना-बिगड़ना) यह एक बहुत अच्छा अर्थपूर्ण शब्द है. ‘घड़ामोड़’ मतलब जिसमें कुछ बनता है और कुछ बिगड़ता भी है. बात सही तरीके…

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विविधा ‘हिंदी प्रलाप’ – अरुण माहेश्वरी

‘हिंदी प्रलाप’ – अरुण माहेश्वरी

दक्षिण अफ्रीका के विश्व हिंदी सम्मेलन से घूम कर आने के ठीक बाद हिंदी के प्रोफेसर और भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पूर्व…

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बच्चों का पन्ना यहां कुत्ते रहते हैं

यहां कुत्ते रहते हैं

बहुत दिनों बाद इंदौर आना हुआ तो पुराने साथियों की याद आ गई|जय प्रकाश गुप्ता और मैं कई साला एक ही विभाग में काम करते…

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विविधा महाराजा की वापसी

महाराजा की वापसी

सतीश सिंह सरकार द्वारा बरती अनियमितता, गलत प्रबंधन और अंदरुनी गड़बडि़यों की वजह से आज महाराजा कंगाली के कगार पर है। एक जनहित याचिका में…

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महिला-जगत स्त्री-आकर्षण का केन्द्र : अनुभूति, ताकत नहीं – सारदा बनर्जी

स्त्री-आकर्षण का केन्द्र : अनुभूति, ताकत नहीं – सारदा बनर्जी

आम तौर पर पुरुषों में यह धारणा प्रचलित रही है कि स्त्रियां पुरुषों के मर्दानगी वाले एटीट्यूड, बलिष्ठ भुजाओं वाले ताकतवर शरीर से ही आकर्षित…

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गजल बस उलझन की बात यही है

बस उलझन की बात यही है

श्यामल सुमन किसकी गलती कौन सही है बस उलझन की बात यही है   हंगामे की जड़ में पाया कारण तो बिलकुल सतही है  …

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कविता कविता-चींटी

कविता-चींटी

चींटी मिश्री के इक दाने को, लाखों चलीं उठाने को, अपने घर ले जाने को, ऐसा संगठन नहीं मिलता, इंसानो को।   ये हैं छोटी…

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