थोड़ा सा फर्क
Updated: September 27, 2012
“दादाजी दादाजी ‘बनाना’ को हिंदी में क्या बोलते हैं?” “बेटे ‘बनाना’ को हिंदी में केला कहते हैं|” “और दादाजी वो जो राउंड ,राउंड, ऱेड, रेड…
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तमिलनाडु में हिन्दी लोकप्रिय?
Updated: September 27, 2012
डॉ. मधुसूदन उवाच ॐ प्रति वर्ष ६ लाख हिन्दी के परीक्षार्थी। ॐ सर्वाधिक लोकप्रिय तृतीय भाषा ॐ हिन्दी प्रचार सभा काफी व्यस्त ॐ जपानी का…
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कविता-पुनर्जन्म:विजय निकोर
Updated: September 27, 2012
तुम्हारा अंकुरित स्नेह सुकुमार ज्यों अकलंकित आकाश ने फेंक दिए सितारे सारे मेरी झोली में आज, और फिर भी मैं डरा-डरा-सा खड़ा रहा कितने कटु…
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आर्थिक-सुधारों की राजनीती और बदहाल जन
Updated: September 27, 2012
पियुष द्विवेदी ‘भारत’ ममता बनर्जी द्वारा किराने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नीतिगत मतभेद के चलते यूपीए-२ को नमस्कार करने के बाद, आर्थिक-सुधारों के निहितार्थ…
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अन्ना-केजरीवाल मतभेद: बात दरअसल ये है…
Updated: September 27, 2012
निर्मल रानी जिस प्रकार गुज़रा एक वर्ष टीम अन्ना द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध तथा जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में छेड़े गए आंदोलन को लेकर सुर्खियों…
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महाराष्ट्र के बहाने हितों को साधने की राजनीति
Updated: September 27, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम केंद्र सरकार पर मंडराते सियासी संकट को अधिक गहरा करते हुए एनसीपी कोटे से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस्तीफ़ा दे…
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नहीं पेड़ पे पैसा उगता
Updated: September 27, 2012
श्यामल सुमन बहुत सुना बचपन से भाई, नहीं पेड़ पे पैसा उगता अभी खबर दिल्ली से आई, नहीं पेड़ पे पैसा उगता अर्थशास्त्र के…
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पीतांबरलाल और ठग
Updated: September 27, 2012
पुराने समय की बात है लाला पीतांबर लाल धरमपुरा रियासत के दीवान थे|समय के पावंद तेज तर्रार और ईमानदार |बड़ी समस्यओं को चुटकी मे हल…
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कविता-आशा
Updated: September 27, 2012
बीनू भटनागर वो अंधेरी राते, वो बेचैन सासे, कुछ आँसू ,कुछ आँहें, लम्बी डगर, कंटीली राहें। थके पैरों के ये छाले, डराने लगे वही साये,…
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छंगाजी की नाक
Updated: September 27, 2012
वैसे तो मुझे कटिंग कराने का कतई शौक नहीं है किंतु अच्छे खासे पुरुष को बेदर्द जमाने के लोग नारी की उपाधि से विभूषित न…
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राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण ममता अकेली पड़ीं
Updated: September 26, 2012
जगदीश्वर चतुर्वेदी ममता बनर्जी और सोनिया गांधी में कल तक मित्रता थी, इन दिनों दोनों नेत्रियों में छत्तीस का आंकड़ा है। ममता की राजनीतिक अदूरदर्शिता…
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अस्मिता, वर्चस्व और अमेरिकी जेल व्यवस्था / जगदीश्वर चतुर्वेदी
Updated: September 26, 2012
अमेरिका ने अपने देश में इस तरह की संस्कृति निर्मित की है जिसमें पुलिस और न्याय की हिंसा सामान्य और वैध लगती है। जिस तरह…
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