राजनीति शर्मनिरपेक्षता

शर्मनिरपेक्षता

विजय कुमार शर्मा जी यों तो हर समय राजनीतिक मूड में रहते हैं; पर यदि उनके हाथ में ताजा समाचार पत्र हो, तो समझिये कि…

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राजनीति लंबे राजनैतिक सफर के अंतिम पड़ाव पर लडखडा गए थे दादा!

लंबे राजनैतिक सफर के अंतिम पड़ाव पर लडखडा गए थे दादा!

भारत के इतिहास मे पहली बार कोई वित्त मंत्री रायसीना हिल्स जाना चाहता हैं और वो हैं प्रणव मुखर्जी । इस देश मे वित्त मंत्री…

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आर्थिकी बॉलीवुड में कालाधनः सरकार को अब पता चला ?

बॉलीवुड में कालाधनः सरकार को अब पता चला ?

इक़बाल हिंदुस्तानी जब तक सब जगह स्टिंग ऑप्रशन नहीं होगा, सरकार नहीं जागेगी? हमारी सरकार कितनी भोली है उसको आज तक यही नहीं पता था…

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गजल गजल:सुमन पागल अरजने में- श्यामल सुमन

गजल:सुमन पागल अरजने में- श्यामल सुमन

खुशी की दिल में चाहत गर, खुशी के गीत गाते हैं भरोसा क्या है साँसों का, चलो गम को भुलाते हैं   दिलों में गम…

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व्यंग्य फंस गए चोर वर्ना वंस-मोर

फंस गए चोर वर्ना वंस-मोर

एल.आर.गाँधी सत्ता के भद्रलोक से दो भद्र पुरुषों की आज एक साथ विदाई ,कारण लगभग एक ही …. बस एक का तीर निशाने पर रहा…

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गजल गजल:देश बंटने से बचाना है ज़रा याद रहे…..

गजल:देश बंटने से बचाना है ज़रा याद रहे…..

इक़बाल हिंदुस्तानी तुमको कुछ करके दिखाना है ज़रा याद रहे, सबको इंसाफ़ दिलाना है ज़रा याद रहे।   बम कोई सा भी बनाओ तुम्हें पूरा…

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जन-जागरण हिंदी की आम-बोलचाल में अंग्रेजी की सेंध

हिंदी की आम-बोलचाल में अंग्रेजी की सेंध

पियूष द्विवेदी ‘आय विल गो नाव’, ‘वी विल कम’, ‘राम डोंट कॉल मी’, ‘ही डोंट नो मी’ अगर आपने इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ा…

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गजल गजल:बेच रहे तरकारी लोग- श्यामल सुमन

गजल:बेच रहे तरकारी लोग- श्यामल सुमन

प्रायः जो सरकारी लोग आज बने व्यापारी लोग   लोकतंत्र में बढ़ा रहे हैं प्रतिदिन ये बीमारी लोग   आमलोग के अधिकारों को छीन रहे…

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कविता:आरक्षण की वेदी पर…-बीनू भटनागर

आरक्षण के मुद्दे पर, यों तो सब दल साथ खड़े हैं, इतनी छीना झपटी देखकर, हम तो शर्मसार खड़े हैं। संसद तो बन गया अखाड़ा,…

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राजनीति रायसीना की रेस के बीच उपराष्ट्रपति की होड़

रायसीना की रेस के बीच उपराष्ट्रपति की होड़

 सिद्धार्थ शंकर गौतम यूपीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद हेतु वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम घोषित होते ही राजनीतिक सरगर्मियां पुनः तेज़ हो गई…

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समाज आरक्षण…या संरक्षण

आरक्षण…या संरक्षण

बीनू भटनागर जिस समय काम के अनुसार वर्णप्रथा का आरंभ हुआ होगा उस वख़्त संभवतः वह वख़्त का तक़ाज़ा ही रहा होगा योग्यता और क्षमता…

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गजल गजल:पूछो तो भगवान है क्या–श्यामल सुमन

गजल:पूछो तो भगवान है क्या–श्यामल सुमन

समझदार की भीड़ सामने एक सुमन नादान है क्या मन्दिर मस्जिद गिरिजाघर में पूछो तो भगवान है क्या   पालनहार वही जब सबका मरते भूखे…

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