बड़े बुजुर्गों के चरणों में
Updated: October 8, 2012
जब से हुई दोस्ती उसकी मच्छरजी के साथ मक्खी उससे हर दिन करती मोबाईल पर बात। हाय हलो करते करते वह हँसती जाती है कहती…
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मत करना मनमानी
Updated: October 8, 2012
हाथी दादा थे जंगल में सबसे वृद्ध सयाने, डरे नहीं वे कभी किसी से किये काम मनमाने। आया मन तो सूंड़ बढ़ाकर ऊँचा पेड़…
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गौरवर्णी बादलों की बात
Updated: October 8, 2012
लग रहा है यह समय का फेर सा है, बादलों में अब प्रदूषण ढेर सा है। अब गुलाबी और कपसीली बदलियाँ लापता हैं, न…
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मेंढक मामा
Updated: October 8, 2012
क्यों न सच्ची बात बताते| मेंढक मामा क्यों टर्राते| डबरों में पानी कम है तो, बादल को क्यों नहीं बुलाते? यदि नहीं बरसा पानी तो…
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जंगल
Updated: October 8, 2012
पीपल नीम आम के जंगल होते बड़े काम के जंगल | कितने निश्छल भोले भाले होते तीर कमान के जंगल | कभी कभी क्यों हो…
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थोरियम घोटाला : पड़ताल एक कदम आगे : भाग-1
Updated: October 7, 2012
अभिनव शंकर पिछले लेख में मुख्यतः इस घोटाले की “परिकल्पना” बतायी गयी थी, पृष्ठभूमि समझाई गयी थी,बताया गया की कैसे एक बेहद सुनियोजित,सामरिक रूप से…
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ममता बरसी मगर इस बार मनमोहन पर नहीं
Updated: October 7, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम केंद्र सरकार के खुदरा व्यापार में ५१ फ़ीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, डीजल के दामों में बढ़ोतरी, घरेलू गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी घटाने…
Read moreअपलक देखतें सपनें
Updated: October 7, 2012
आँखों में था पूरा ही आकाश तब भी और अब भी और थे उसमें से झाँकतें निहारतें कृतज्ञता के ढेरों सितारें. और थे उसमें…
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गांधी संग्राहलय में एक दिन…
Updated: October 8, 2012
वन्दना शर्मा “आने वाली पीढ़ी को शायद ही यह यकीन होगा कि गांधी जैसा भी कोई हाड़-मांस का पुतला इस धरती पर चला होगा” यह…
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कल आ जाइये
Updated: October 6, 2012
एक सौ बीस करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश मे अगर कमी है तो बस आदमी की। विचित्र विडम्बना है, कि जिस देश की जनसंख्या…
Read moreअम्मा बापू
Updated: October 6, 2012
सुबह-सुबह जब धूप गुनगुनी, छत पर आती है| सूरज कि किरणों में बैठी, मां मुस्कराती है। आसमान भी देख देख कर, गदगद हो जाता|…
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नाक पकड़ ,सारी मत बोलो
Updated: October 6, 2012
आद्ध्या बोली,नाक पकड़ सारी मत बोलो दादाजी| नियम कायदे नहीं जानते ,पोल न खोलो दादाजी| कान पकड़कर ही तो सारी ,बोला जाता है हरदम, किंतु…
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