आत्म-अनुशासन बरतें
Updated: July 13, 2012
डॉ. दीपक आचार्य मरीज से मिलने जाएं तब आत्म-अनुशासन बरतें जीवन के हर कर्म में अनुशासन का महत्त्व है और यह बाहर से नहीं आता…
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भ्रष्टतंत्र सुधरे तो कुछ काम बने
Updated: July 22, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ गुडगांव की माही बोरवेल के गडढे में गिरकर मर जाती है और एहतियाती कदम उठाने की बजाए प्रशासन लीक पीटने का काम…
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चिदंबरम जी! रोटी रोज़ चाहिये और आइसक्रीम कभी कभी ।
Updated: July 13, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी उन 77 प्रतिशत का क्या होगा जिनकी आय 20 रू. प्रतिदिन है? इतिहास के जानकार बताते हैं कि फ्रांस की महारानी मेरी एंटोनी…
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अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी थे ‘रुस्तम-ए-हिंद’ दारा सिंह
Updated: July 12, 2012
तनवीर जाफ़री देश के पहले और आखिरी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान तथा फ्री स्टाईल कुश्ती लड़ने वाले योद्धा एवं फिल्म अभिनेता दारा सिंह का 84…
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करामाती होते हैं कुत्ते
Updated: July 12, 2012
डॉ. दीपक आचार्य दुमहिलाऊ हों, चाहें भौंकने वाले पूरी दुनिया में कुत्तों का अपना अलग ही संसार है। जात-जात के कुत्ते संसार भर में हर…
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बचकाने बयानो से उत्तर प्रदेश का विकास नही होगा
Updated: July 12, 2012
शादाब जफर‘‘शादाब’’ सरकार और राजनेताओ के सार्वजनिक जीवन को भ्रष्टाचार से बचाने के लिये हो रही जद्दोजहद का आगे चलकर भले ही कोई भी नतीजा…
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संघ के नक्शे-कदम पर ………….
Updated: July 12, 2012
वीरेन्द्र सिंह परिहार राहुल गांधी ने अभी गत दिनों कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को आदर्श मानते हुए कांग्रेस को भी संघ के…
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अखिलेश का बीस लक्खा निर्णय
Updated: July 12, 2012
सांसद एवं विधायक निधि : विवेक और विधि का हो सामंजस्य अखिलेश का बीस लक्खा निर्णय वापिस लेना इस बात का प्रमाण है कि जन…
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भाजपा और संगमा के वैचारिक ध्रुव
Updated: July 12, 2012
राष्ट्रपति चुनावों को लेकर राजग और विशेषतः भाजपा की स्थिति जिस प्रकार की बनी है उससे भारतीय राजनीति का एक नया और विशिष्ट मुखडा उजागर…
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गुमटियों का व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था का अनिवार्य अंग
Updated: July 12, 2012
प्रवीण गुगनानी अतिक्रमण एक ऐसा शब्द है जो आजकल सर्वाधिक चर्चा में है खासतौर से व्यावसायिक अतिक्रमण जो की छोटी छोटी दुकानों याँ यूँ कहे…
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संस्मरण / दीदी
Updated: July 12, 2012
– गंगानन्द झा डॉक्टर कल्याणी दास मिश्र मनुष्य ने भगवान से कहा—“विधाता! तुम्हारी दुनिया तो बहुत ही निर्मम और हृदयहीन है। इसको रहने लायक बनाने…
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अगर तुम न होते ह्वेनसांग…।
Updated: July 12, 2012
[यात्रा वृत्तांत] – राजीव रंजन प्रसाद ——————————— [लेखन करते हुए ह्वेनसांग, संग्रहाल से एक तैलचित्र] रिक्शेवाले से नाम ठीक तरह उच्चारित नहीं हो रहा…
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