राजनीति जनता को बेवकूफ बना रहे हैं राजनैतिक दल

जनता को बेवकूफ बना रहे हैं राजनैतिक दल

डॉ. आशीष वशिष्ठ देश का वर्तमान राजनैतिक माहौल और दलों का आचरण देश और जनहित में नहीं है। मंहगाई, खुदरा बाजार में विदेशी निवेश और…

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प्रवक्ता न्यूज़ Default Post Thumbnail

भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ

भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ का अखिल भारतीय अधिवेषण ३० सितम्बर २०१२,रविवार को दिल्ली के सिरीफोर्ट आडिटोरियम में संपन्न हो गया | एक दिवसीय इस…

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शख्सियत एक सच्चा जनकवि हरीश भादानी

एक सच्चा जनकवि हरीश भादानी

अरुण माहेश्वरी हरीश भादानी की तीसरी पुण्य तिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि लेख सचमुच इससे कठिन शायद ही कोई दूसरा काम हो सकता है कि एक…

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विविधा Default Post Thumbnail

विचारों की सान पर गांधी का मूल्यांकन

सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’ सुबह सवेरे एक गीत ने ‘साथी मुबारक तुम्हे हो जश्न ये जीत का,पर इतना याद रहे एक साथी और भी था’ ने मुझे…

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महिला-जगत सीरियल-उन्मादना और स्त्री / सारदा बनर्जी

सीरियल-उन्मादना और स्त्री / सारदा बनर्जी

हाल-फिलहाल यह देखा जा रहा है कि टी.वी. सीरियल के साथ स्त्रियों का गहरा संपर्क बन रहा है। चाहे वह लड़की हो, युवती हो, औरत…

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आर्थिकी संवैधानिक संस्थाओं पर हमलावार होती सरकार

संवैधानिक संस्थाओं पर हमलावार होती सरकार

डॉ. आशीष वशिष्ठ संवैधानिक संस्थाओं पर कांग्रेस नीत संप्रग सरकार का लगातार हमलावार होना और उसकी कार्यप्रणाली पर उंगली उठाना सरकार की नीति और नीयत…

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जन-जागरण “ मिस्टर “ से “ महात्मा “

“ मिस्टर “ से “ महात्मा “

डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री ” गाँधी ” उपनाम सुनते ही आज की पीढ़ी के लोगों को राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, राजीव गाँधी, इंदिरा गाँधी ( जिनके…

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मीडिया वर्तमान पत्रकारिता को बाजारवाद से बचाना होगा

वर्तमान पत्रकारिता को बाजारवाद से बचाना होगा

अविनाश वाचस्‍पति महात्‍मा गांधी की पत्रकारिता अच्‍छाई, सच्‍चाई और अहिंसा की रही है। उसी के जरिए देश को आजाद कराया गया और वो सिर्फ आजाद…

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कविता Default Post Thumbnail

कविता – छलनी

मोतीलाल बहुत देख चुका शहरों का शोरगुल जीवन के प्रतिरोध ।   जब द्रष्य की ऊंचाई पर शहर के नक्शे गर्मी की मायूसी सा हमारे…

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कविता कविता-समय

कविता-समय

समय का, न आदि है न अंत, भ्रम होता है कभी, जैसे समय रुक गया हो, भ्रम होता है कभी, जैसे समय दौड़ता हो, पर…

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गजल खून के कई रिश्ते खून के ही प्यासे हैं…..

खून के कई रिश्ते खून के ही प्यासे हैं…..

इक़बाल हिंदुस्तानी मुश्किलों में लोगों को खूब आज़माते हैं, जो खरे उतरते हैं दोस्त बन जाते हैं।   जैसे छोटे बच्चे हैं कुछ भी जानते…

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बच्चों का पन्ना जंगल का प्रजातंत्र

जंगल का प्रजातंत्र

बहुत ही सुहावना मौसम था सुबह ही झमाझम बारिस हो चुकी थी और अब गुनगुनी धूप निकल आई थी|जंगल के सभी जानवर खुशी के मारे…

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