कविता कविता:अपने ही कमरे मेँ– मोतीलाल

कविता:अपने ही कमरे मेँ– मोतीलाल

एक विस्मृत जर्जर कमरे मेँ मै गिर जाता हूँ और गुजरता हूँ नम तंतुओँ के बीच से नष्ट हो चुकी चीजोँ के बीच जैसे मवेशियाँ…

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चिंतन बद् दुआएँ न लें,ये ही करती हैं बरबाद

बद् दुआएँ न लें,ये ही करती हैं बरबाद

 डॉ. दीपक आचार्य दुआओं का जितना असर होता है उससे कहीं ज्यादा असर होता है बद् दुआओं का। क्योंकि दुआएँ देते वक्त प्रसन्नता का भाव…

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समाज जननी तेरी जय है।

जननी तेरी जय है।

राजेश कश्यप ‘‘माँ !’’ यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार…

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समाज मॉ की ममता, मां का ऑचल जींस और टॉप में गायब हो गया ……..

मॉ की ममता, मां का ऑचल जींस और टॉप में गायब हो गया ……..

शादाब जफर ‘‘शादाब’’ दुनिया ने आज भले ही चाहे कितनी तरक्की कर ली हो, पर हम लोगो द्वारा स्थापित दिखावे की तैयार की गई इस…

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कविता-श्यामल सुमन

श्यामल सुमन सेवा है साहित्य सुमन व्यापार नहीं लेखन में प्रतिबंध मुझे स्वीकार नहीं प्रायोजित रचना से कोई प्यार नहीं   बच के रहना साहित्यिक…

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समाज समलैंगिक स्वीकृति के मायने

समलैंगिक स्वीकृति के मायने

हरपाल सिंह इस पृथ्वी पर जीवन और सृष्टि का सुचारू रूप से संचालन करती है । इसके लिये उसकी अपनी व्यवस्थाएं हैं अनुकुलता और स्वतंत्रता…

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पशुता का लक्षण है जुगाली

अशुद्ध मुख से आती है दरिद्रता डॉ. दीपक आचार्य मनुष्य का शरीर धारण कर लेने से ही जीवन सफल नहीं हो जाता बल्कि मनुष्यता की…

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चिंतन तय सीमा में करें काम-काज

तय सीमा में करें काम-काज

 डॉ. दीपक आचार्य संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय…

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गजल गजल-आये दिन गिरने लगीं जब….-इकबाल हिंदुस्तानी

गजल-आये दिन गिरने लगीं जब….-इकबाल हिंदुस्तानी

भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां….. आये दिन गिरने लगीं जब गुलशनों में बिजलियां, अब संभलकर उड़ रही हैं गुलशनों में तितलियां।   उनके…

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गजल गजल-वतन महफ़ूज़ रखना है हमें खुद भी फ़ना होकर…..इकबाल हिंदुस्तानी

गजल-वतन महफ़ूज़ रखना है हमें खुद भी फ़ना होकर…..इकबाल हिंदुस्तानी

इसी मिटटी में रहना है खुशी से या ख़फ़ा होकर, कहां हम जायेंगे बतलाइये तुमसे जुदा होकर।   ये है वक़्ती सभी नज़दीकियां धोखा ना…

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राजनीति नेताओं की झूठी शान और देश की दुर्गति

नेताओं की झूठी शान और देश की दुर्गति

 सिद्धार्थ शंकर गौतम वर्तमान में राजनीति जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को हल करने की बजाय भोग-विलासिता का साधन मात्र बन गई है| राजनीति के गुण-दोषों…

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घोटाले…भक्ति वाले

  2जी घोटाला, आदर्श घोटाला,बोफोर्स व अन्य सैनिक घोटाले,कौमनवैल्थ गेम्स का घोटाला, उ.प्र. का स्वास्थ्य घोटाला, बिहार का चारा घोटाला और पता नहीं कितने घोटाले…

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