कविता कविता ; भाई से प्रतिघात करो – श्यामल सुमन

कविता ; भाई से प्रतिघात करो – श्यामल सुमन

श्यामल सुमन मजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो   धर्म,…

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समाज आधी दुनिया कर ली मुठी में

आधी दुनिया कर ली मुठी में

जितेंद्र कुमार नामदेव दुनिया को अपना लोहा मनवाना तो भारतीयों की पुरानी आदतों में सुमार है। दुनिया के नक्शें पर तेजी से विकसित होते देशों…

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कविता रघुनाथ सिंह की दो कविताएं

रघुनाथ सिंह की दो कविताएं

सत्यमेव जयते  सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते मच रहा है शोर घोर और चारों ओर हमारे सेक्यूलरवादियों में हमारे अंगरेजी मीडिया में और हमारी अफसरशाही में…

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राजनीति बढ़ सकता है भाजपा पर संघ का नियंत्रण

बढ़ सकता है भाजपा पर संघ का नियंत्रण

सुनील अमर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का कार्यकाल पूरा होने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी उनका स्थान ले सकते हैं, ऐसी…

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साहित्‍य गीत ; कितना लोकलुभावन होता – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

गीत ; कितना लोकलुभावन होता – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव कितना लोक लुभावन होता था गिल्ली डंडे का खेल‌|   पिलु बनाकर छोटी सी उसमें गिल्ली को रखते चारों ओर खिलाड़ी बच्चे हँसते…

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कविता कविता ; चिंता या चेतना – मोतीलाल

कविता ; चिंता या चेतना – मोतीलाल

मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपों के सामने कर्म और विचार के अंतराल में अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीं बन पाता…

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कविता कविता ; मंत्र – श्यामल सुमन

कविता ; मंत्र – श्यामल सुमन

श्यामल सुमन लोकतंत्र! जिसकी आत्मा में पहले “लोक”, बाद में “तंत्र”। मगर अब नित्य पाठ हो रहा- “तंत्र” का नया मंत्र।   परिणाम! नीयत, नैतिकता…

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राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

 लिमटी खरे  अंधविश्वासी राजमाता और युवराज! जनता के सामने भले ही अंधविश्वास पर घंटों भाषण देने में राजनेताओं को महारथ हासिल हो पर जमीनी हकीकत…

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विविधा बोफोर्स का जिन्न फिर हुआ प्रकट

बोफोर्स का जिन्न फिर हुआ प्रकट

सिद्धार्थ शंकर गौतम इंदिरा गाँधी के पुत्र राजीव गाँधी के राजनीतिक जीवन को लील जाने वाले बोफोर्स घोटाले के पिटारे से इस बार ऐसा खुलासा…

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विविधा मिलावटी दूध का बढ़ता साम्राज्य

मिलावटी दूध का बढ़ता साम्राज्य

निर्मल रानी भारत में दूध को सबसे अधिक पवित्र,पौष्टिïक खाद्य एवं पेय पदार्थ माना जाता है। पीने के अतिरिक्त दूध का प्रयोग विभिन्न रूपों में…

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कविता कविता – चिँता या चेतना-मोतीलाल

कविता – चिँता या चेतना-मोतीलाल

मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपोँ के सामने कर्म और विचार के अंतराल मेँ अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीँ बन पाता…

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चिंतन परायेपन का अहसास

परायेपन का अहसास

डॉ. दीपक आचार्य परायी सामग्री देती है परायेपन का अहसास जो अपना है वही दे सकता है अपनेपन का अहसास। जो पराया है उसे अपनाने…

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