कहो कौन्तेय-३६
Updated: October 1, 2011
(अर्जुन का निवातकवच दानवों से युद्ध) विपिन किशोर सिन्हा मैंने उनकी आज्ञा शिरिधार्य की। मातलि दिव्य रथ के साथ उपस्थित हुआ। स्वयं देवराज ने मेरे…
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कहो कौन्तेय-३४ (महाभारत पर आधारित उपन्यास अंश)
Updated: December 6, 2011
(अर्जुन को दिव्यास्त्रों की प्राप्ति) विपिन किशोर सिन्हा हिमालय और गंधमादन पर्वत को लांघते हुए अति शीघ्र मैं इन्द्रकील पर्वत पर पहुंचा। मुझे देवराज इन्द्र…
Read moreकहो कौन्तेय-३५
Updated: October 1, 2011
(अर्जुन की सदेह स्वर्ग-यात्रा) विपिन किशोर सिन्हा – क्या खोया की गणना कर ही रहा था कि देवराज के रथ की घरघराहट सुनाई पड़ी। जैसे-जैसे…
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खेती-बाड़ी और बोलीभाषा
Updated: December 6, 2011
क्षेत्रपाल शर्मा खेतीबाड़ी …… सुर्खरू होता है इन्सां ठोकरें खाने के बाद रंग देती है हिना पत्थर पे घिस जाने के बाद बहुत समय पहले…
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व्यंग्य/ नारद की चुप्पी के निहितार्थ
Updated: December 6, 2011
अशोक गौतम सुनो विक्रम! जैसे ही उन्होंने घोषणा की कि देश के प्रधानमंत्री बनने के उनके मुकाबले उनके अधिक चांस है तो बाबा के बुरे…
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अफसरान को उपकृत करने का औचित्य
Updated: December 6, 2011
लिमटी खरे तीस से चालीस बरस सरकार की सेवा करने के बाद सेवानिवृत हो जाते हैं सरकारी कर्मचारी। इसके बाद भी इनका मन नहीं भरता।…
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एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय
Updated: December 6, 2011
बृजनन्दन यादव वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्हें सत्ता में कोर्इ आकर्षण नहीं था। फिर भी अपने अनुयायियों के दिलों पर राज करते थे। वे…
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नवजागरण काल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा और हिन्दी पत्रकारिता
Updated: December 6, 2011
डा. मयंक चतुर्वेदी नव जागरण से तात्पर्य है भारत में आधुनिकता का प्रवेश, वैज्ञानिक दृषिटकोण का विकसित होना और किसी भी घटना के परिप्रेक्ष्य में…
Read moreहाजी याक़ूब: बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले!
Updated: December 6, 2011
ऐसे लोग सियासत में अपना कारोबार करने आते हैं! -इक़बाल हिंदुस्तानी पूर्व मंत्री और मेरठ शहर से विधायक हाजी याकूब कुरैशी को सिखों के खिलाफ…
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चिटठी की चपेट में चिदंबरम
Updated: October 1, 2011
प्रमोद भार्गव बहुमूल्य तरंगों ;2 जी स्पेक्टमद्ध के आवंटन से जुड़ी चिटठी की चपेट में पी चिदंबरम भी आ गए हैं। चिटठी के जरिए होने…
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ये पबिलक है–सब जानती है …..
Updated: December 6, 2011
जग मोहन ठाकन हमारे समय में जब छात्र पढ़ार्इ शुरु करते थे ,तो पहला पाठ अ-अनार और म-मछली का होता था। बाद में जब हम…
Read moreगरीबी के झटके
Updated: December 6, 2011
राजकुमार साहू देखिए, गरीबों को गरीबी के झटके सहने की आदत होती है या कहें कि वे गरीबी को अपने जीवन में अपना लेते हैं।…
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