राजनीति अवैध प्रवासियों की बेहूदा तरीके से वापसी जुड़े सवाल

अवैध प्रवासियों की बेहूदा तरीके से वापसी जुड़े सवाल

-ललित गर्ग – डंकी रूट यानी गैरकानूनी तरीके से अमेरिका गये करीब 200 भारतीयों को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिस असुविधा एवं अपमानजनक तरीके से…

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आर्थिकी बजट: भूटान को मिला सबसे ज्यादा, जानिए तनावपूर्ण संबंधों के बीच बांग्लादेश-मालदीव को क्या मिला

बजट: भूटान को मिला सबसे ज्यादा, जानिए तनावपूर्ण संबंधों के बीच बांग्लादेश-मालदीव को क्या मिला

राजेश जैन भारत हमेशा से अपने पड़ोसी देशों से अच्छे संबंधों का हामी रहा है। उनके सुख-दुःख में भागीदार रहता आया है। उनके लिए हमारे…

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मनोरंजन अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ इंडियन बुलबुल

अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ इंडियन बुलबुल

पुण्यतिथि पर विशेष :स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर प्रो़. श्याम सुंदर भाटियाबेशक सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर आजीवन अविवाहित रहीं, लेकिन यह भी सच है, फूल…

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लेख सुप्रीम कोर्ट – शव के साथ सेक्स करना रेप की श्रेणी में नहीं आता

सुप्रीम कोर्ट – शव के साथ सेक्स करना रेप की श्रेणी में नहीं आता

                      रामस्वरूप रावतसरे    सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 4 फरवरी 2025 को…

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राजनीति अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त हुए ट्रम्प

अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त हुए ट्रम्प

राजेश कुमार पासी डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने से पहले भारत में खुशी मनाई जा रही थी लेकिन उनकी प्रवासी नीति भारत में एक…

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मनोरंजन करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर यामी गौतम

करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर यामी गौतम

सुभाष शिरढोनकर‘फेंयर एंड लवली गर्ल’ के रूप में मशहूर बॉलीवुड एक्‍ट्रेस यामी गौतम सिल्‍वर स्क्रीन पर जिस अंदाज में अलग-अलग रोल्स के साथ एक्सपेरिमेंट करती…

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राजनीति एमएसटी के भरोसे आप और भाजपा तो जीरो फैक्टर से पार पाने की जुगत में कांग्रेस 

एमएसटी के भरोसे आप और भाजपा तो जीरो फैक्टर से पार पाने की जुगत में कांग्रेस 

सुशील कुमार ‘ नवीन ‘  दिल्ली में कई दिनों से चल रही राजनीतिक दलों की भागदौड़ बुधवार मतदान के बाद समाप्त हो गई। 8 फरवरी…

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राजनीति अमेरिका-चीन में पुनः शुरू हुए व्यापार युद्ध का कारोबारी लाभ आखिर कैसे उठाएगा भारत?

अमेरिका-चीन में पुनः शुरू हुए व्यापार युद्ध का कारोबारी लाभ आखिर कैसे उठाएगा भारत?

कमलेश पांडेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हम भारतीयों के मनोमस्तिष्क में  इसलिए हमेशा बसे रहते हैं कि उन्होंने आपदा को अवसर में बदलने का हुनर दिखलाया-सिखलाया-बतलाया…

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शख्सियत हमारा तो फील्ड ही चुनौतियों से भरा है – डिटेक्टिव गुरू राहुल राय गुप्ता

हमारा तो फील्ड ही चुनौतियों से भरा है – डिटेक्टिव गुरू राहुल राय गुप्ता

नीतू गुप्ता आपने एजेंट विनोद, जग्गा जासूस, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी, पोशम पा, डैशिंग डिटेक्टिव, बादशाह, हसीन दिलरूबा, बॉबी जासूस जैसी जासूसी पर आधारित फिल्मों में…

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लेख बढ़ता तनाव: हर शख्स परेशां सा क्यों है?

बढ़ता तनाव: हर शख्स परेशां सा क्यों है?

अमरपाल सिंह वर्मा रोजमर्रा की भागमभाग और आपाधापी में लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ता मानसिक तनाव एवं अवसाद लोगों के जीवन में ऐसा खलल डाल रहा है, जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। टेंशन एवं डिप्रेशन से जूझने वाले लोग ऐसे निराशाजनक दौर से गुजर रहे हैं जो न उन्हें दिन में चैन लेने दे रहा है और न रात को आराम। यह समस्या न केवल युवाओं बल्कि हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। अब तो बच्चे भी तनाव से अछूते नहीं रहे हैं। यह ऐसी विश्वव्यापी  समस्या है, जिसके शिकार लोग रहते भले ही अलग-अलग देशों में हों पर उनका दर्द एक जैसा है। हमारे देश में तनाव ने लोगों की जीवनचर्या को अस्त व्यस्त कर दिया है।   एक ओर जहां बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का दबाव तनाव की वजह है, वहीं परिस्थितियों के साथ सामंजस्य न बैठाने से भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता भी तनाव का कारण बन रही है। आर्थिक संकट का सामना करने वाले व्यक्तियों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में आ रही कठिनाई भी तनाव और अवसाद की वजह है। किसान, मजदूर, अधिकारी, कर्मचारी, इंजीनियर, अभिनेता, नेता, व्यापारी, दुकानदार, स्त्री, पुरुष सब इससे पीडि़त हैं। शायद ही कोई ऐसा वर्ग है जिसे तनाव ने छोड़ा हो। स्कूल-कॉलेज के बच्चों को शिक्षा और कॅरियर को लेकर बढ़ता दबाव परेशान किए हुए है। परीक्षा जनित तनाव, अच्छे अंक प्राप्त करने का प्रेशर और अच्छी नौकरी पाने का दबाव युवाओं को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर रहा है।  समाज में कुछ बनकर  दिखाने की चाहत भी तनाव का प्रमुख कारण बन गई है। जब महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो दिमाग में केमिकल लोचा पैदा होने लगता है। बढ़ती नशावृत्ति और बिखरते परिवार भी टेंशन का सबब बन रहे हैं। परिवारों में संघर्ष और रिश्तों में खटास मानसिक बीमारियों को बढ़ावा रहा है। हाल के सालों में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी मानसिक अवसाद की नई वजह बनकर उभरा है। वर्चुअल दुनिया में व्यस्त लोग हकीकत में अकेले पड़ते जा रहे हैं।  देश में मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराता संकट गंभीर स्थिति बन चुका है। इसका खतरनाक परिणाम बढ़ती आत्महत्याओं के रूप में सामने आ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2021 में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की जबकि 2022 में 1.70 लाख से ज्यादा लोगों ने मौत को गले लगा लिया। यह भयावह आंकड़े समाज के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग अवसाद, चिंता, मानसिक विकारों और अकेलेपन की वजह से आत्महत्या करते हैं। रिश्तों में तनाव, विवाह संबंधी समस्याएं और फेमिली स्पोर्ट का अभाव भी बड़ी वजह है। कर्ज का बोझ और वित्तीय समस्याएं भी इसके प्रमुख कारणों में हैं। कई बार शारीरिक- मानसिक उत्पीडऩ, विशेष रूप से यौन उत्पीडऩ के कारण भी लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। देश में महिलाओं से ज्यादा शादीशुदा पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। छात्रों द्वारा सुसाइड की बढ़ती घटनाएं भी चिंता की वजह बन रही हैं।यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मानसिक स्वास्थ्य की हालत  खराब है। 15 से 24 साल के प्रत्येक 7 लोगों में से एक व्यक्ति खराब मेंटल हेल्थ से गुजर रहा है। एक सर्वे से पता चलता है कि खराब मेंटल हेल्थ से पीडि़त लोगों में से 41 फीसदी ही किसी काउंसलर या मनोचिकित्सक के पास जाना उचित समझते हैं। गांवों में तो मानसिक बीमारी को कोई बीमारी ही नहीं समझा जाता है। गांवों में मनो चिकित्सकों का अभाव भी एक समस्या है। लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ानी जरूरी है। लोगों को बताया जाना चाहिए कि मानसिक समस्याएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी शारीरिक बीमारियां होती हैं। गांवों में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को ‘पागल’ करार देकर उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। जगह-जगह जंजीरों में बंधे मनोरोगी समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता का ज्वलंत उदारण हैं।  मौजूदा दौर में यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कोई कमजोरी नहीं हैं बल्कि यह एक चुनौती है जिसका सामना परस्पर सहयोग, समझ और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए। अमरपाल सिंह वर्मा

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राजनीति देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करते अवैध बांग्लादेशी

देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करते अवैध बांग्लादेशी

रामस्वरूप रावतसरे     बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का नाम ‘दिल्ली में अवैध अप्रवासी, सामाजिक-आर्थिक और…

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बच्चों का पन्ना किताबों और अखबारों को बनाइए अपना साथी, ज़िन्दगी को जीने और देखने का बदल जाएगा नज़रिया। 

किताबों और अखबारों को बनाइए अपना साथी, ज़िन्दगी को जीने और देखने का बदल जाएगा नज़रिया। 

-डॉ सत्यवान सौरभ युवा लोगों में इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल की वज़ह से किताबों में दिलचस्पी कम होती जा रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और…

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