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यमलोक में करप्शन का शुभारंभ

अशोक गौतम ….वे गुजरे तो अच्छा लगा कि चलो एक दिमाग खाने वाला तो गया। असल में आदमी तभी तक अच्छा लगता है जब तक…

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गजल ऐसी महंगाई में क्या करे आदमी

ऐसी महंगाई में क्या करे आदमी

शादाब जफर “शादाब’’ ऐसी महगॉई मै क्या करे आदमी पेट बच्चो का कैसे भरे आदमी   खू पसीना बहा कर भी रोटी नही कैसे अपना…

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विधि-कानून Default Post Thumbnail

त्वरित अन्वीक्षा : एक स्वप्न

एडवोकेट मनीराम शर्मा भारत में न्यायिकतंत्र इससे जुड़े पेशेवरों के लिए स्वर्ग है| मामलों के शीघ्र निपटान की ओर देश के कर्णधारों, न्यायविदों, वकीलों या…

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लेख तेलंगाना पर घिरती कांग्रेस…………….

तेलंगाना पर घिरती कांग्रेस…………….

शादाब जफर “शादाब’’ आंध्र प्रदेश से दिल्ली तक तेलंगाना के मुद्दे पर देश में एक बार फिर से चुनावी आग भडकाई जा रही है। आंध्र…

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राजनीति हिसार इस बार करेगा कई आर पार.

हिसार इस बार करेगा कई आर पार.

जगमोहन फुटेला हिसार के उपचुनाव में दो बातें होंगी. या तो कांग्रेस चुनाव जीतेगी या हारेगी. अगर वो जीतेगी तो ये चमत्कार होगा. और अगर…

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राजनीति यू0पी0ए0 और लेम्मिंग्स्

यू0पी0ए0 और लेम्मिंग्स्

लालकृष्ण आडवाणी गत् सप्ताह नई दिल्ली मे सम्पन्न भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समापन सत्र में मैंने प्रधानमंत्री की इन टिप्पणियों का हवाला दिया कि…

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धर्म-अध्यात्म इस्लाम और राजनीतिः कुछ सुभाषित

इस्लाम और राजनीतिः कुछ सुभाषित

समस्या को आँख मिला कर देख लेना भी उपयोगी है। उसमें समाधान की जो माँग है, वही समाधान उत्पन्न करेगी। ( स.ही. वात्स्यायन ‘अज्ञेय’)   …

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विविधा ग्लोबलाइजेशन : एक समसामयिक मूल्यांकन

ग्लोबलाइजेशन : एक समसामयिक मूल्यांकन

मीनाक्षी मीणा आज का युग संचार व प्रौद्योगिकी का युग है, जहां पर एल.पी.जी. (उदारीकरण, निजीकरण, ग्लोबलाइजेशन) की हवा बह रही है। एल.पी.जी. की इसी…

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पुस्तक समीक्षा पुस्‍तक समीक्षा/ ‘भारत क्‍या है’

पुस्‍तक समीक्षा/ ‘भारत क्‍या है’

कृष्ण जी मिश्र  ‘भारत क्‍या है’ के नाम से विख्यात सलिल ज्ञवाली की पुस्तक, जो भारतीय सोच और व्यापकता से प्रेरित शीर्ष वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, और…

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कहानी लाल और काली रात

लाल और काली रात

 गंगानन्‍द झा (सैयद अलावल, सतरहवी शताब्दी के बंगाल का महान कवि, की कविता,जिसकी नाव पुर्तगाली लुटेरो और तूफान का सामना करती हुई अराकान पँहुची थी।)…

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लेख गरीबी के बदलते पैमाने और मायने

गरीबी के बदलते पैमाने और मायने

राजेश कश्यप गत दिनों सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपनी एक रिपोर्ट में योजना आयोग ने कहा कि शहर में 32 रूपये और गाँव…

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लेख सरकार के विरोध से विपक्ष को लाभ मिले तो अन्ना का क्या क़सूर

सरकार के विरोध से विपक्ष को लाभ मिले तो अन्ना का क्या क़सूर

इक़बाल हिंदुस्तानी जनता के दबाव में बदल रहा है बीजेपी का एजेंडा ? अन्ना हज़ारे ने एक बार फिर जनलोकपाल बिल को लेकर हुंकार भरी…

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