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कहो कौन्तेय-३५

(अर्जुन की सदेह स्वर्ग-यात्रा) विपिन किशोर सिन्हा – क्या खोया की गणना कर ही रहा था कि देवराज के रथ की घरघराहट सुनाई पड़ी। जैसे-जैसे…

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खेत-खलिहान खेती-बाड़ी और बोलीभाषा

खेती-बाड़ी और बोलीभाषा

क्षेत्रपाल शर्मा खेतीबाड़ी …… सुर्खरू होता है इन्सां ठोकरें खाने के बाद रंग देती है हिना पत्थर पे घिस जाने के बाद बहुत समय पहले…

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व्यंग्य व्यंग्य/ नारद की चुप्पी के निहितार्थ

व्यंग्य/ नारद की चुप्पी के निहितार्थ

 अशोक गौतम सुनो विक्रम! जैसे ही उन्होंने घोषणा की कि देश के प्रधानमंत्री बनने के उनके मुकाबले उनके अधिक चांस है तो बाबा के बुरे…

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राजनीति अफसरान को उपकृत करने का औचित्य

अफसरान को उपकृत करने का औचित्य

लिमटी खरे तीस से चालीस बरस सरकार की सेवा करने के बाद सेवानिवृत हो जाते हैं सरकारी कर्मचारी। इसके बाद भी इनका मन नहीं भरता।…

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लेख एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय

एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय

बृजनन्दन यादव वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्हें सत्ता में कोर्इ आकर्षण नहीं था। फिर भी अपने अनुयायियों के दिलों पर राज करते थे। वे…

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लेख नवजागरण काल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा और हिन्दी पत्रकारिता

नवजागरण काल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा और हिन्दी पत्रकारिता

डा. मयंक चतुर्वेदी नव जागरण से तात्पर्य है भारत में आधुनिकता का प्रवेश, वैज्ञानिक दृषिटकोण का विकसित होना और किसी भी घटना के परिप्रेक्ष्य में…

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हाजी याक़ूब: बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले!

ऐसे लोग सियासत में अपना कारोबार करने आते हैं! -इक़बाल हिंदुस्तानी पूर्व मंत्री और मेरठ शहर से विधायक हाजी याकूब कुरैशी को सिखों के खिलाफ…

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राजनीति चिटठी की चपेट में चिदंबरम

चिटठी की चपेट में चिदंबरम

प्रमोद भार्गव बहुमूल्य तरंगों ;2 जी स्पेक्टमद्ध के आवंटन से जुड़ी चिटठी की चपेट में पी चिदंबरम भी आ गए हैं। चिटठी के जरिए होने…

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व्यंग्य ये पबिलक है–सब जानती है …..

ये पबिलक है–सब जानती है …..

जग मोहन ठाकन हमारे समय में जब छात्र पढ़ार्इ शुरु करते थे ,तो पहला पाठ अ-अनार और म-मछली का होता था। बाद में जब हम…

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गरीबी के झटके

राजकुमार साहू देखिए, गरीबों को गरीबी के झटके सहने की आदत होती है या कहें कि वे गरीबी को अपने जीवन में अपना लेते हैं।…

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लेख श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी

श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी

वीरेन्द्र जैन इसमें कोई सन्देह नहीं कि हिन्दी व्यंग्य के भीष्मपितामह हरिशंकर परसाई ही माने जाते हैं किंतु गत शताब्दी के सातवें दशक में अपने…

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लेख पत्रकारों की बदलती दिशा और दशा

पत्रकारों की बदलती दिशा और दशा

डॉ. शशि तिवारी शब्दों में वो ताकत होती है जो बन्दूक की गोली, तोप के गोले एवं तलवार में नहीं होती है। अस्त्र-शस्त्र से घायल…

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