समाज आधुनिकता बनाम परिवार

आधुनिकता बनाम परिवार

परिवार की हमारी पारम्परिक अवधारणा और संरचना को आधुनिकता के ज्वार के कारण काफी तनाव का सामना करना पड रहा है । मनुष्य एक ही…

Read more
लेख नरेंद्र भाई अभी दिल्ली दूर है…

नरेंद्र भाई अभी दिल्ली दूर है…

श्रीराम तिवारी भारत में राजनीति को कुआँर की कुतिया समझ कर सरे राह लतियाने वालों में दिग्भ्रमित विपक्ष और टी आर पी रोग से पीड़ित…

Read more
आलोचना Default Post Thumbnail

”पिट कर नहीं, पीट कर आओ, लोगों को घेर कर मारो”

गिरीश पंकज ”पिट कर नहीं, पीट कर आओ, लोगों को घेर कर मारो” . यह ”महान” प्रेरक वाक्य किसी तानाशाह का नहीं, लोकशाही के एक…

Read more
लेख बाबा रामदेव की हुंकार में समझदारी

बाबा रामदेव की हुंकार में समझदारी

प्रमोद भार्गव महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली रही झांसी से बाबा रामदेव ने कालाधन वापिस लाने की जो हुंकार भरी है, वह अब समझदारी का पर्याय…

Read more
व्यंग्य वक्तव्य की तैयारी

वक्तव्य की तैयारी

विजय कुमार भारत सरकार चाहती है कि देश में शांति रहे। देश में भले ही न रहे; पर दिल्ली में अवश्य रहे, चूंकि राजधानी होने…

Read more
व्यंग्य महंगाई ‘डायन’ है कि सरकार

महंगाई ‘डायन’ है कि सरकार

राजकुमार साहू महंगाई पर हम बेकार की तोहमत लगाते रहते हैं। अभी जब बाजार में सामग्रियां सातवें आसमान में महंगाई की मार के कारण उछलने…

Read more
लेख भारत माता के देश में लाचार है जननी

भारत माता के देश में लाचार है जननी

 लिमटी खरे दुनिया के चौधरी अमेरिका की मशहूर पत्रिका न्यूजवीक ने एक सर्वे कराया है जिसमें भारत गणराज्य में महिलाओं की दयनीय स्थिति का वर्णन…

Read more
गजल Default Post Thumbnail

गजलें

आदमी के खून का ही आदमी प्यासा मिला गॉव से पहुंचा बाहर तो हर तरफ धोखा मिला   सेठ के बच्चे खिला कर घर जो…

Read more
कार्टून व्‍यंगचित्र/वीरेन्‍द्र : 2जी घोटाला

व्‍यंगचित्र/वीरेन्‍द्र : 2जी घोटाला

Read more
राजनीति प्रधानमंत्री पद के लिए बिछती शतरंजी बिसातें

प्रधानमंत्री पद के लिए बिछती शतरंजी बिसातें

निर्मल रानी अगले लोकसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए सभी राजनैतिक दल मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के तरह-तरह के फार्मूले तलाश करने लगे…

Read more
आलोचना Default Post Thumbnail

सरकार गरीबी नहीं गरीबों को हटाना चाहती है!

इक़बाल हिंदुस्तानी पूंजीवादी नीतियों पर चलकर तो यही होना स्वाभाविक है! अगर कोई आदमी बीमार हो और उसे यही पता नहीं लगे कि उसको क्या…

Read more
व्यंग्य ‘मौनमोहन’ से मिन्नतें

‘मौनमोहन’ से मिन्नतें

राजकुमार साहू हे ‘मौनमोहन’, आपको सादर नमस्कार। आप इतने निरा मन से क्यों अपना राजनीतिक चक्र घुमा रहे हैं। जिस ताजगी के साथ आपने देश…

Read more