राजनीति ममता बनर्जी में माकपा की आवाजें

ममता बनर्जी में माकपा की आवाजें

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद आमलोगों को लग रहा था कि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव…

Read more
विधि-कानून भूमि अधिग्रहण की चुनौती

भूमि अधिग्रहण की चुनौती

डा.ए.डी.खत्री सरकार और न्यायालय और दोनों के समक्ष चुनौती भारत में अंग्रेज जो क़ानून बना गए, हमारी सरकारें उन्हीं से अपनी रोजी- रोटी चला रही…

Read more
खेत-खलिहान खेतीकिसानी को लीलते भूमण्डलीय आदर्श

खेतीकिसानी को लीलते भूमण्डलीय आदर्श

प्रमोद भार्गव यह साफ हो गया है कि भूमण्डलीय आदर्श भारतीय खेतीकिसानी को लील रहे हैं। औद्योगिक विकास और शहरीकरण ने हजारों गांव और हजारों…

Read more
समाज भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुशासन बाबू हुए चारों खाने चित

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुशासन बाबू हुए चारों खाने चित

सतीश सिंह कर्नाटक, दिल्ली और उत्तरप्रदेश के बाद अब बिहार भी घोटालों के घेरे में आ गया है। सुशासन बाबू के सुशासन की हवा निकल…

Read more
हिंद स्‍वराज बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने

बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने

रामदास सोनी ( स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने बरसों पूर्व भारतीयों को उनके गौरवशाली इतिहास और परम्परा से परिचित करवाने के लिए भारतीय इतिहास के छः…

Read more
हिंद स्‍वराज बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने (भाग -2)

बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने (भाग -2)

रामदास सोनी अब प्रश्न खड़ा होता है कि उस दिन कांग्रेस की सभा में सुभाषचन्द्र बोस ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो 15 अगस्त 1947…

Read more
हिंद स्‍वराज बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने (भाग 3)

बीसवीं सदी में भारतीय इतिहास के छः काले पन्ने (भाग 3)

 रामदास सोनी दूसरे काले पन्ने को भारत का काला पन्ना कहा जाये या विश्व का ही एक काला पन्ना माना जायेए इसे भविष्य तय करेगा।…

Read more
पुस्तक समीक्षा “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद

“हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद

माओवादियों ने बस्‍तर को आग के हवाले कर दिया है, जिसकी तपिश में भोले-भाले आदिवासी झुलस रहे हैं। माओवादी भले ही इन क्षेत्रों के विकास…

Read more
राजनीति राजनीति का नया दौर

राजनीति का नया दौर

राकेश श्रीवास्तव यह हमारे लोकतांत्रिक विकास की असफलता ही है कि जनता दिल की सच्चाई (जाति और निजी स्वार्थों के बादलों को छांटकर) और गहराई…

Read more
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर

हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर

पंडित सुरेश नीरव सब शरीर धरे के दंड हैं। इसलिए जब भी किसी स्वर्गीय का भेजे में खयाल आता है तब-तब मैं हाइली इन्फलेमेबल ईर्ष्या…

Read more
आलोचना हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल

हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हिन्दी बुर्जुआवर्ग का हिन्दीभाषा और साहित्य से तीन-तेरह का संबंध है। हिन्दीभाषी बुर्जुआवर्ग में आत्मत्याग की भावना कम है। उसमें दौलत,शानो-शौकत और सामाजिक…

Read more
स्‍वास्‍थ्‍य-योग पंचगव्य चिकत्सा और भारतीय गोवंश

पंचगव्य चिकत्सा और भारतीय गोवंश

डा.राजेश कपूर भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद परम्परा में अनादी काल से गो का स्थान अत्यंत महत्व का रहा है. पञ्च गव्य के नाम से जाने…

Read more