समाज भारतीय अफसरशाही की दशा और दिशा

भारतीय अफसरशाही की दशा और दिशा

कोषपूर्वा: सर्वारम्भाः। तस्मात पूर्वं कोषमवेक्षेत। कौटिल्य अर्थशास्त्रमःअघ्याय 8 प्रकरण 24 श्लोक 1 (सभी कार्य कोष पर निर्भर है। इसलिये राजा को चाहिये कि सबसे पहले…

Read more
कविता वह

वह

जब मैं सोकर उठता हूँ प्रातः तडके. अलार्म की आवाज सुनकर. पहला ध्यान जाता है इस ओर. वह आयेगी या नही? मैं जल्दी जल्दी तैयार…

Read more
लेख तन से लिपटा चीथडा है पेट से पत्थर बधॉ,,,,,,

तन से लिपटा चीथडा है पेट से पत्थर बधॉ,,,,,,

आज इस कम्प्यूटर युग में मजदूर को मजदूरी के लाले पडे है। ऐसे में 1 मई को मजदूर दिवस मनाये तो कौन मनाये। कल तक…

Read more
समाज मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी!

मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी!

एक दिन बाद यानी 1 मई को देशभर में बड़ी-बड़ी सभाएं होगी, बड़े-बड़े सेमीनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मजदूरों के हितों की बड़ी-बड़ी योजनाएं भी…

Read more
कविता प्रिय अपनी बाहों में भर लो।

प्रिय अपनी बाहों में भर लो।

विप्रलम्ब    तन शीतल मन शीतल कर दो, प्रिय अपनी बाहों में भर लो। ————————————— मंद हवाओं का ये झौंका, आंचल को सहलाता हैं। —————————————…

Read more
आलोचना पुलिस टेनिंग स्कूल में सेक्स ट्रेनिंग

पुलिस टेनिंग स्कूल में सेक्स ट्रेनिंग

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पुलिस टेनिंग स्कूल में महिला कांस्टेबल यौन शौषण। पुलिस टेनिंग स्कूल में महिला कांस्टेबल यौन उत्पीड़न की इस घटना ने देश…

Read more
बच्चों का पन्ना खतरों से खेलते बचपन पर अंकुश

खतरों से खेलते बचपन पर अंकुश

खतरों से खेलते बचपन पर सर्वोच्च न्यायालय की अंकुश लगाने की पहल एक अच्छी शुरूआत है। क्योंकि करतब दिखाने वाले नाबालिग बच्चों को प्रदर्शन के…

Read more
विविधा अकेला अन्ना बेचारा क्या कर सकेगा?

अकेला अन्ना बेचारा क्या कर सकेगा?

पवन कुमार अरविंद भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए अकेला बेचारा बूढ़ा अन्ना क्या कर सकेगा। क्योंकि यह भ्रष्टाचार अत्र, तत्र, अन्यत्र और सर्वत्र विराजमान है,…

Read more
धर्म-अध्यात्म प्रकृति ईश्वर ही तो है…

प्रकृति ईश्वर ही तो है…

दिवस दिनेश गौड़   मित्रों अभी कुछ दिन पहले किसी ने मुझसे कहा कि भाई आज से मैं मंदिरों में भगवान की पूजा नहीं करूँगा,…

Read more
राजनीति संतों से परहेज क्यों?

संतों से परहेज क्यों?

लोकेन्द्र सिंह राजपूत अक्सर कहा जाता है कि साधु-सन्यासियों को राजनीति में दखल नहीं देना चाहिए। उनका काम धर्म-अध्यात्म के प्रचार तक ही सीमित रहे…

Read more
विविधा भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी क्यों?

भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी क्यों?

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि इन दिनों भारत में हर क्षेत्र में, भ्रष्टाचार चरम पर है|…

Read more
विविधा अन्ना के माध्यम से जनता का संदेश

अन्ना के माध्यम से जनता का संदेश

सुरेश बरनवाल यदि अन्ना कोई विदेशी सेलिब्रिटी होते और फेसबुक पर होते तो उन्हें क्लिक करने वालों की संख्या भी मीडिया के लिए एक समाचार…

Read more