कला-संस्कृति मधु कैटभ को दिए वरदान को  पूरा करने मकर संक्रांति के दिन मंदार आते हैं भगवान भधुसूदन

मधु कैटभ को दिए वरदान को  पूरा करने मकर संक्रांति के दिन मंदार आते हैं भगवान भधुसूदन

कुमार कृष्णन अनेक पौराणिक किंवदंतियों से जूझता मंदार पर्वत शांत, अविचल खड़ा है। काले पहाड़ पर उकेरी हुई कलाकृतियाँ सहज ही अतीत में खो जाने…

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धर्म-अध्यात्म सूर्य के उत्तरायण में आगमन का खगोलीय पर्व है मकर सक्रांति!

सूर्य के उत्तरायण में आगमन का खगोलीय पर्व है मकर सक्रांति!

डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है। इस दिन पुण्य काल प्रातः काल 09 बजकर 03 मिनट से लेकर संध्याकाल 05 बजकर 46 मिनट तक है। इस अवधि में स्नान-ध्यान, पूजा, जप-तप और दान कर सकते हैं। वहीं, महा पुण्य काल सुबह 09 बजकर 03 मिनट से लेकर 10 बजकर 48 मिनट तक है। इस दौरान पूजा और दान करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होगी। सूर्य देव सुबह 09 बजकर 03 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर ही मकर संक्रांति मनाई जाती है।    महाभारत काल में मकर संक्रांति दिसंबर में मनाई जाती थी। ऐसा उल्लेख मिलता है कि छ्ठी शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के समय में 24 दिसंबर को मकर संक्रांति मनाई गयी थी। अकबर के समय में 10 जनवरी और शिवाजी महाराज के काल में 11 जनवरी को मकर संक्रांति मनाये जाने का उल्लेख मिलता है।  मकर संक्रांति की तिथि का यह रहस्य इसलिए है क्योंकि सूर्य की गति एक साल में 20 सेकंड बढ जाती है। इस हिसाब से 5000 साल के बाद संभव है कि मकर संक्रांति जनवरी में नहीं, बल्कि फरवरी में मनाई जाने लगे। मकर सक्रांति को देश मे विभिन्न नामो से जाना जाता है।तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है किन्तु मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है।  हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार सूर्य का उत्तरायण होना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा नदी या पवित्र जल में स्नान करने का विधान है। साथ ही इस दिन गरीबों को गर्म कपड़े, अन्न का दान करना शुभ माना गया है। संक्रांति के दिन तिल से निर्मित सामग्री ग्रहण करने शुभ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।गरीब और असहाय लोगों को गर्म कपड़े का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस माह में लाल और पीले रंग के वस्त्र धारण करने से भाग्य में वृद्धि होती है। माह के रविवार के दिन तांबे के बर्तन में जल भर कर उसमें गुड़, लाल चंदन से सूर्य को अर्ध्‍य देने से पद सम्मान में वृद्धि होने के साथ शरीर में सकारात्मक शक्तियों का विकास होता है। साथ ही आध्यात्मिक शक्तियों का भी विकास होता है।कहते है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर फेंका था। भगवान की जीत को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है। शरद ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है और इसके बाद बसंत मौसम का आगमन आरंभ हो जाता है। इसके फलस्वरूप दिन लंबे और रात छोटी होने लगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं। ऐसे में पिता और पुत्र के बीच प्रेम बढ़ता है। ऐसे में भगवान सूर्य और शनि की अराधना शुभ फल देने वाला होता है। संक्रांति का यह पर्व भारतवर्ष तथा नेपाल के सभी प्रान्तों में अलग-अलग नाम व भांति-भांति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।भारत में इसके विभिन्न नाम है छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू में मकर सक्रांति,तमिलनाडु मेंताइ पोंगल, उझवर तिरुनल गुजरात, उत्तराखण्ड में उत्तरायण, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में माघी,असम में भोगाली बिहु ,कश्मीर में शिशुर सेंक्रात ,उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में खिचड़ी,पश्चिम बंगाल में पौष संक्रान्ति ,कर्नाटक में मकर संक्रमण व पंजाब में लोहड़ी रूप में मनाया जाता है।तो आइए इस खगोलीय परिवर्तन का स्वागत मकर सक्रांति रूप में कर अपने बड़ो का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। असहायों की सहायता करें।डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोके

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राजनीति रिटायर्ड अफ़सरों के बोझ तले दबा आरटीआई का ढाँचा

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सेवानिवृत्त अधिकारी उन विभागों के खिलाफ निर्णय लेने में संकोच कर सकता है, जिनके लिए उन्होंने कभी काम किया था, जिससे समझौतापूर्ण फैसले होते हैं।…

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लेख सनातन विश्व, अखंड भारत और रचनात्मक भविष्य के बारे में आखिर कब सोचेंगे हमारे युवा, पूछते हैं लोग

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कमलेश पांडेय युवा हृदय सम्राट स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि भारत के युवाओं में विशाल हृदय के साथ मातृभूमि और जनता की सेवा करने की…

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धर्म-अध्यात्म जीवंत रीति-रिवाजों और परंपराओं से सजा मकर संक्रांति का उत्सव

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हिंदू महाकाव्य महाभारत में मकर संक्रांति से जुड़े माघ मेले का उल्लेख है। हर बारह वर्ष बाद मकर संक्रांति पर कुंभ मेला आयोजित होता है,…

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राजनीति चुनावी जीत की नई इबारत लिखती महिला मतदाता

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ललित गर्ग चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दल महिलाओं को लुभाने के लिये आकर्षक कल्याणकारी योजनाओं एवं मुफ्त की सुविधाएं देने की बढ़-चढ़ कर घोषणाएं करने…

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कला-संस्कृति प्रयागराज में हो रहे महाकुम्भ का आध्यात्मिक महत्व

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डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी  हमारे संस्कृति के अनुसार कुंभ मेला एक धार्मिक आयोजन है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार मनाया जाता है। कुंभ मेले…

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राजनीति क्या एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च पर आंध्र सरकार बुलडोजर चलाएगी?

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                         रामस्वरूप रावतसरे आंध्र प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने गुंटूर जिले में स्थित कैल्वरी टेम्पल चर्च को गिराने के आदेश जारी किया है। यह चर्च…

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राजनीति भीषण आग से अमेरिका ही नहीं, दुनिया सबक ले

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 ललित गर्ग  अमेरिका के लॉस एंजेलिस में जंगल की बेकाबू आग फेलने, भारी तबाही, महाविनाश और भारी जन-धन की क्षति ने साबित किया…

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लेख भारत माता की महान सपूत स्वामी विवेकानंद

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आधुनिक विश्व को भारतीयता से परिचित कराने वाले नरेन्द्र नाथ दत्त उर्फ स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकत्ता में हुआ। वह दौर…

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शख्सियत स्वामी विवेकानंद: युवाओं के प्रेरणास्रोत

स्वामी विवेकानंद: युवाओं के प्रेरणास्रोत

राष्ट्रीय युवा दिवस / स्वामी विवेकानंद जयंती (12 जनवरी) – योगेश कुमार गोयलवर्तमान परिवेश में समाज में चारों तरफ अपराधों तथा भ्रष्टाचार का जो मकड़जाल…

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लेख भारतीयता के पर्याय-स्वामी विवेकानंद

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वीरेन्द्र सिंह परिहार  स्वामी विवेकानन्द उस समय अमेरिका और यूरोपियन देशों में हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की ध्वजा फहराकर और भारतवर्ष का दौरा करके कलकत्ता…

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