विविधा आलीजा है मेरा शहर

आलीजा है मेरा शहर

श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु‘ राजस्थान के पश्चिम के थार के दूर तक फैले मरूस्थल में बसा एक छोटा सा शहर जिसकी पहचान आज भुजिया व…

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राजनीति व्यंग्य: नैनो कांग्रेस

व्यंग्य: नैनो कांग्रेस

विजय कुमार वैज्ञानिक भी बड़े अजीब होते हैं। कुछ बड़े से बड़ी, तो कुछ छोटे से भी छोटी चीज बनाने में लगे रहते हैं। जब…

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विविधा विकिलीक्स के भारतीय संस्करण की ज़रूरत नहीं…

विकिलीक्स के भारतीय संस्करण की ज़रूरत नहीं…

श्रीराम तिवारी देश-विदेश के विभिन्न सूचना माध्यमों में विकिलीक्स ने खासा स्थान बना लिया है. कुछ भारतीय मनचलों ने तो इसके भारतीय संस्करण की आवश्यकता…

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राजनीति वे कौन हैं, जो नीरा राडिया की बातों को संदेह से नहीं देखते?

वे कौन हैं, जो नीरा राडिया की बातों को संदेह से नहीं देखते?

अविनाश दास नीरा राडिया के पूरे प्रकरण में हमारे कुछ मित्रों की दलील है कि वह जिस पेशे और भूमिका में थी, उसने वही किया,…

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विविधा शहादत पर सियासत से कैसे रुकेगा आतंकवाद?

शहादत पर सियासत से कैसे रुकेगा आतंकवाद?

नीरज कुमार दुबे अपने बड़बोले बयानों से पहले भी विवाद खड़ा करते रहे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का यह कहना कि हेमंत करकरे ने मुंबई…

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राजनीति संसद न चलने देने के अपराधी ?

संसद न चलने देने के अपराधी ?

अपनी संसदीय परंपराओं को ध्वस्त करने में जुटे हैं सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता संजय द्विवेदी संसद को चलता न देखकर भी आखिर देश में…

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विविधा वाराणसी में यज़ीदियत ने फिर किया इंसानियत का खून

वाराणसी में यज़ीदियत ने फिर किया इंसानियत का खून

तनवीर जाफ़री विश्व प्रसिद्ध शहनाई वादक भारत रत्न बिसमिल्लाह खां का शहर वाराणसी गत् 7 दिसंबर की सायंकाल एक बार फिर दहल उठा। वाराणसी के…

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विविधा ‘प्रवक्ता, प्रावदा, और प्रॉवोक’- संस्कृत स्रोत

‘प्रवक्ता, प्रावदा, और प्रॉवोक’- संस्कृत स्रोत

विशेष : कुछ पाठक-मित्रों के अनुरोध पर, सुविधा के लिए, एक बिंदु लेकर ही, कुछ सौम्यता से, और सीमित विस्तार से ही, प्रस्तुति की है।…

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आलोचना साहित्य में नव्य उदारतावादी ग्लोबल दबाव

साहित्य में नव्य उदारतावादी ग्लोबल दबाव

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हमारे साहित्यकार यह मानकर चल रहे हैं अमरीकी नव्य उदार आर्थिक नीतियां बाजार,अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि को प्रभावित कर रही हैं लेकिन हिन्दीसाहित्य और…

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विविधा सवाल : “अभी मृत्यु और जीवन की कामना से कम्पित है यह शरीर!”

सवाल : “अभी मृत्यु और जीवन की कामना से कम्पित है यह शरीर!”

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ जब कोई कहता है कि वह 25 वर्ष का हो गया तो इसका सही अर्थ होता है-उसने अपने जीवन को 25…

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व्यंग्य हास्य-व्यंग्य /हवासिंह हवा-हवाई

हास्य-व्यंग्य /हवासिंह हवा-हवाई

पंडित सुरेश नीरव जब से हवासिंह किसी ऊपरी हवा के प्रभाव में आए हैं बेचारे की तो हवा ही खराब हो गई है। और हवा…

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कहानी बाल कहानी/ अच्छा-सा तोहफा

बाल कहानी/ अच्छा-सा तोहफा

चानपा बड़ी देर से चट्टान की ओट में खड़ा बारिश रुकने का इंतजार कर रहा था। अभी एक घंटा पहले आसमान बिल्कुल साफ था। चानपा…

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