खेत-खलिहान हिन्दी लेखकों की ‘बाजारवाद’ को लेकर गलत समझ – गिरीश मिश्रा

हिन्दी लेखकों की ‘बाजारवाद’ को लेकर गलत समझ – गिरीश मिश्रा

पिछले कुछ वर्षों में हिंदी साहित्यकार और पत्रकार बडी संख्या में बाजार और एक अस्त्विहीन अवधारणा ‘बाजारवाद’ के खिलाफ लठ लेकर पडे हैं। कहना न…

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राजनीति मुक्तांचल की जंग है माओवाद

मुक्तांचल की जंग है माओवाद

अंग्रेजी मार्का बहुत सारे बुद्धिजीवी इन दिनों माओवाद पर फिदा हैं। वे बीच-बीच में आदिवासियों घूम आते हैं । प्रेस को फोटोसत्र के लिए बुला…

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राजनीति का कहन सुदर्शन जी

का कहन सुदर्शन जी

सुदर्शन जी का बयान देश की राजनीती में भूचाल ला रहा है । हर बार की तरह फिर से कांग्रेस की डुबती नैय्या को सोनिया…

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समाज मर्यादाओं की जकड़न – राखी रघुवंशी

मर्यादाओं की जकड़न – राखी रघुवंशी

कल अपने साथियों के साथ श्याम नगर की बस्ती में पुस्तकालय कार्यक्रम के लिए जाना हुआ। इस पुस्तकालय में कई दिनों के बाद गई। बच्चों…

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विविधा १४ नवंबर, संकल्प दिवस पर विशेष : चीन से भारत भूमि छुडाने का संकल्प

१४ नवंबर, संकल्प दिवस पर विशेष : चीन से भारत भूमि छुडाने का संकल्प

१४ नवंबर की महत्ता दो कारणों से है । पहला इसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की जन्मतिथि के रुप में मनाया जाता…

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खेत-खलिहान लुप्त होता किसान- गिरीश मिश्रा

लुप्त होता किसान- गिरीश मिश्रा

यदि वर्तमान भारत, विशेषकर हिंदी पत्रकारिता और साहित्य, को देखें तो किसान को लेकर स्पष्टता का सर्वथा अभाव मिलेगा। अनेक तथाकथित वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात…

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राजनीति सोनिया, सुदर्शन और शातिर कांग्रेस

सोनिया, सुदर्शन और शातिर कांग्रेस

क्या सोनिया गाँधी सभी सवालों से ऊपर हैं? क्या भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी और आम हिन्दुस्तानियों की नेहरु परिवार से जुड़ी भावनाओं का शातिराना इस्तेमाल…

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राजनीति कांग्रेस को लगी मिर्ची : सुदर्शन के बयान से तिलमिला गए कांग्रेसी

कांग्रेस को लगी मिर्ची : सुदर्शन के बयान से तिलमिला गए कांग्रेसी

सोनिया के खिलाफ सुदर्शन बयान पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग, गिलानी और अरुंधती के देश के खिलाफ बयान पर चुप्पी क्या जायज…

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राजनीति क्रांति, भूख और माओवाद

क्रांति, भूख और माओवाद

मैं पिछले 35 सालों से क्रांतिकारियों का साहित्य पढ़ रहा हूँ। इनमें कई रंगत के क्रांतिकारी रहे हैं जिनको पढ़ता रहा हूँ। खासकर माओवादियों और…

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खेत-खलिहान पर्यावरण की हमारी प्राचीन समझ

पर्यावरण की हमारी प्राचीन समझ

मेंढक तो टर्र-टर्र टर्राते हैं मैं तो बिल्कुल चकरा गया। मैं अंग्रजी की शिक्षापद्धति में पढ़ा-लिखा आधुनिक व्यक्ति हूं। उल्टी-सीधी बातें मैं नहीं मानता। मैं…

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राजनीति सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?

सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?

(10 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पूरे दो के जिला केन्द्रों पर संघ के कार्यकर्ताओं के नाम कथित आतंकवादी घटनाओं से जोड़ने व केन्द्र…

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राजनीति आत्मबोध : भारत की 70 करोड़ तरुण शक्ति कहाँ खो गई?

आत्मबोध : भारत की 70 करोड़ तरुण शक्ति कहाँ खो गई?

70 करोड़ युवाशक्ति से सुसज्जित देश क्यों अपंग है? क्यों गरीब है? भारत की तरुणाई क्यों माँ भारती का दर्द नहीं समझती? आईए, तुम्हें इसका…

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