बिहार का बदलता परिवेश – संतोष सारंग
Updated: December 24, 2011
बिहार के बंटवारे के बाद प्रचुर प्राकृतिक संसाधन झारखंड के हिस्से में चला गया। यहां के लोगों को बाढ़ व सुखाड़ की त्रासदी मिली। ऊपर…
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न्यायपालिका और लोकतंत्र – राजीव तिवारी
Updated: December 24, 2011
न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका का समन्वित स्वरूप ही लोकतंत्र होता है। लोकतंत्र में न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका एक दूसरे के पूरक भी होते हैं तथा…
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महंगाई घटने के आसार!
Updated: December 24, 2011
नई दिल्ली. महंगाई से जहां परेशान जनमानस बेहाल है, वहीं सरकार का मानना है महंगाई में कमी के संकेत मिले हैं. कृषि एवं उपभोक्ता मामले,…
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दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
Updated: December 24, 2011
मकबूल फिदा हुसैन को लेकर फिर चर्चा है। कतर की नागरिकता लेने के बाद उनके पक्ष में तकरीरें की जा रही है। प्रगतिशील और भारतीय…
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मोदी के लिए नासूर बनता जा रहा है महुआ का किसान आन्दोलन
Updated: December 24, 2011
भावनगर जिले के महुआ प्रखंड में निरमा डिटरजेंट प्राईवेट लि0 को गुजरात सरकार ने सीमेंट उद्योग लगाने के लिए 4500 हेक्टर जमीन आवंटित की है।…
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पुस्तक समीक्षा/‘बुद्धिजीवियों’ की मुश्किल
Updated: December 24, 2011
पूरन चंद जोशी की नयी किताब ‘यादों से रची यात्रा’ किसी उपन्यास की तरह एक सांस में पढ़ गया। सभ्यता के भविष्य को लेकर गहरे…
Read moreविकासमूलक संचार की तलाश में
Updated: December 24, 2011
विकासमूलक सम्प्रेषण का लक्ष्य है शोषण से मुक्ति दिलाना। व्यक्तिगत और सामुदायिक सशक्तिकरण। इस अर्थ में विकासमूलक सम्प्रेषण सिर्फ संदेश देने का काम नहीं करता…
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जनता के पैसे का तबियत से दुरूपयोग करते हैं जनसेवक
Updated: December 24, 2011
आजाद भारत में जनता को दो महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है, एक है वोट देने का, और दूसरा है कर देने का। वोट देकर वह…
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कहां गई गौरैया की चहचहाहट
Updated: December 24, 2011
याद है, जब छोटे थे, तब स्कूल जाने के लिए अलह सुबह उठाया जाता था, यह कहकर देखो चिडिया आई, देखो कौआ आया, वो देखो…
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गौ आधारित ग्रामीण विकास – हेमंत दुबे
Updated: December 24, 2011
कृषि में रसायनों का अनियंत्रित उपयोग मानव जगत के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य हेतु हानिकारक है। अनुसंधानों के तथ्य यह बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों…
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शांति का आधार: शिक्षा – डॉ रामजी सिंह
Updated: December 24, 2011
शांति जीवन की आधारभूत अशंका है, लेकिन विडंबना है, वह आदिकाल से इसके लिए अशांति के आयोजन में लगा रहा है। यही कारण है अशांति…
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सफ़ेद दूध का काला कारोबार
Updated: December 24, 2011
उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते धन की चाहत ने लोगों को संवेदनहीन बना दिया है। वे पैसा कमाने के लिए खाद्य पदार्थों में भी मिलावट करने…
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