लेख पेड़ के नीचे चल रहे हैं गांव के कई सरकारी स्कूल

पेड़ के नीचे चल रहे हैं गांव के कई सरकारी स्कूल

सपना कुमारीमुजफ्फरपुर, बिहारबिहार के सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से शिक्षकों एवं बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझते रहे हैं. राज्य के 38 जिलों में…

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राजनीति नरेन्द्र मोदी हैं भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा

नरेन्द्र मोदी हैं भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा

– ललित गर्ग-प्रधानमंत्री संस्कृतिपुरुष श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा युगपुरुष बनकर न केवल संस्कृति का संरक्षण किया बल्कि उसके पुनर्जागरण…

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लेख पुरुष संवेदनशीलता के बिना महिला सशक्तिकरण अधूरा

पुरुष संवेदनशीलता के बिना महिला सशक्तिकरण अधूरा

यह कहना कि केवल महिलाएं ही इस मानसिकता की शिकार हैं, आधा सच होगा। हाल के दिनों में, पुरुषों पर पितृसत्ता के प्रभाव के संबंध…

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महिला-जगत नारी स्मिता – सवाल भरोसे का ?

नारी स्मिता – सवाल भरोसे का ?

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राजनीति असहिष्णुुता की ही निष्पत्ति है युद्ध एवं आतंकवाद

असहिष्णुुता की ही निष्पत्ति है युद्ध एवं आतंकवाद

अन्तर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस – 16 नवम्बर, 2023  ललित गर्ग  विश्व में सहिष्णुता को बढ़ावा देने और जन-जन में शांति, सहनशीलता एवं संवेदना के लिये जागरूकता…

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राजनीति भारत पर विदेशी हमले , स्व की रक्षा का संघर्ष और उसका परिणाम

भारत पर विदेशी हमले , स्व की रक्षा का संघर्ष और उसका परिणाम

– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत में विदेशी आक्रमणकारियों का इतिहास लम्बा है और उलझन भरा भी है । बहुत दूर न भी जाएँ तो…

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राजनीति बिरसा मुंडा का जीवन व उनका उलगुलान: मूलनिवासी दिवस का खंडन 

बिरसा मुंडा का जीवन व उनका उलगुलान: मूलनिवासी दिवस का खंडन 

आज हमारे बिरसा मुंडा भगवान की जयंती है। अपने जनजातीय समाज को साथ लेकर उलगुलान किया था उन्होने। उलगुलान अर्थात हल्ला बोल, क्रांति का ही एक…

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राजनीति नोटा के उपयोग के कुछ नुक्सान भी हैं – 100 प्रतिशत मतदान से चुने गए प्रतिनिधियों की गुणवत्ता उच्चस्तर की होगी

नोटा के उपयोग के कुछ नुक्सान भी हैं – 100 प्रतिशत मतदान से चुने गए प्रतिनिधियों की गुणवत्ता उच्चस्तर की होगी

भारत आज वैश्विक पटल पर एक महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है एवं भारत विश्व को कई क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने की स्थिति में भी आ गया है। कुछ देश (चीन एवं पाकिस्तान सहित) भारत की इस उपलब्धि को सहन नहीं कर पा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर समस्त विघटनकारी शक्तियां मिलकर भारत को तोड़ना चाहती हैं। इन विघटनकारी शक्तियों द्वारा भारत में जातीय संघर्ष खड़ा करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। जबकि भारत के कई सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगठन समस्त भारतीय समाज में एकजुटता बनाए रखना चाहते हैं ताकि भारत को एक बार पुनः विश्व गुरु बनाया जा सके। परंतु, आज  विघटनकारी शक्तियों के निशाने पर मुखर रूप से हिंदुत्व, भारत एवं संघ आ गया है।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्वयंसेवकों में राष्ट्रीयता का भाव विकसित किया है। संघ के स्वयंसेवक समाज की सज्जन शक्ति के साथ मिलकर समाज में जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे है कि किस प्रकार इन विघटनकारी शक्तियों को परास्त किया जा सकता है। भारत में शीघ्र ही निर्वाचन काल प्रारम्भ होने जा रहा है। भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आज राष्ट्र को भारत माता के प्रति समर्पण का भाव रखने वाले नागरिकों की बहुत अधिक आवश्यकता है। अतः भारतीय समाज द्वारा निर्वाचन में 100 प्रतिशत मतदान किया जाय एवं राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत प्रत्याशी ही चुनाव जीत सकें, इसके लिए समाज को साथ लेकर भारतीय नागरिकों द्वारा विशेष प्रयास किये जाने चाहिए। इस संदर्भ में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा भी कई तरह के प्रयास समय समय पर किए जाते हैं ताकि देश के नागरिकों द्वारा 100 प्रतिशत मतदान किया जा सके। निश्चित ही 50 प्रतिशत नागरिकों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि की तुलना में 90 अथवा 100 प्रतिशत नागरिकों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि बेहतर प्रतिनिधि ही साबित होंगे। अतः अधिक से अधिक मतदान किया जाना आज समय की आवश्यकता है। इससे चुने गए प्रतिनिधियों की गुणवत्ता में तो सुधार होगा ही साथ ही, वर्तमान समय में भारत की आर्थिक प्रगति भी जारी रह सकेगी एवं भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित होते हुए भी हम लोग देख सकेंगे।  कई बार विभिन्न दलों के समस्त प्रत्याशी कुछ मतदाताओं को पसंद नहीं आते हैं, इन परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को नोटा का बटन दबाने का अधिकार रहता है। परंतु, कोई प्रत्याशी मतदाता की नजर में 100 प्रतिशत खरा प्रत्याशी होगा, ऐसा सम्भव भी तो नहीं है। इन परिस्थितियों में कम से कम बुरे प्रत्याशी को चुना जा सकता है। नोटा का बटन दबाकर तो कम बुरे प्रत्याशी के स्थान अधिक बुरा प्रत्याशी ही चुना जा सकता है। संघ के परम पूज्य सर संघचालक भी कहते हैं कि “नोटा में हम लोग सर्वोत्तम को भी किनारे कर देते हैं और इसका फायदा सबसे बुरा उम्मीदवार ले जाता है। होना यह चाहिए कि हमारे पास जो सर्वोत्तम उपलब्ध है, उसे चुन लें। प्रजातंत्र में सौ फीसदी लोग सही मिलेंगे, ऐसा बहुत मुश्किल है।” यह आकलन पूर्णत: सही ही कहा जा सकता है क्योंकि मतदाता भले ही नोटा दबा कर यह समझे कि उसने सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार कर दिया है लेकिन शायद उसे यह नहीं पता होता कि इस से किसी ऐसे उम्मीदवार की कम अंतर से हार हो सकती है जो उन सबमे सबसे बेहतर हो। ऐसे में नोटा को गए वोट अगर उस हारे उम्मीदवार को जाते तो वह जीत सकता था। अगर इस कारण किसी बुरे उम्मीदवार की जीत हो जाती है तो फिर नोटा दबाने के कोई मायने ही नहीं रह जाते।  भारत में चुनावों पर हजारों करोड़ रुपए की राशि खर्च होती है। अतः केंद्र एवं राज्यों में मजबूत सरकारों का चुना जाना अति आवश्यक है, ताकि वे अपने 5 वर्ष के कार्यकाल को सफलता पूर्वक सम्पन्न कर सकें। यदि 100 प्रतिशत मतदान के साथ किसी भी सरकार को चुना जाता है तो निश्चित ही मजबूत सरकार होगी एवं वह अपना कार्यकाल पूर्ण कर सकने में सफल भी होगी और इस प्रकार मध्यावधि चुनावों की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। इस प्रकार, देश के करोड़ों रुपयों के खर्च को बचाया जा सकेगा। इसलिए भारत में आज पढ़े लिखे एवं समझदार वर्ग को भी आगे आकर 100 प्रतिशत मतदान के लिए प्रयास करने चाहिएं, क्योंकि जिस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में भारत आज आगे बढ़ रहा है, यह कार्य लम्बे समय तक जारी रहना चाहिए। इजराईल के नागरिकों में देश प्रेम की भावना के चलते ही 3 लाख से अधिक नागरिकों ने आगे आकर सेना में भर्ती होने के वहां की सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार किया है। भारत में भी देश के प्रतिनिधि राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव रखने वाले ही होने चाहिए। भारतीय समाज की एकजुटता के कारण ही आज भारत में रामसेतु का विध्वंस रुक सका है, जम्मू एवं कश्मीर में लागू धारा 370 एवं धारा 35ए हटाई जा सकी है, 500 वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में निर्मित हो रहा है, जिसका उद्घाटन 22 जनवरी 2024 में पूज्य संत महात्माओं के साथ भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद मोदी जी के कर कमलों द्वारा सम्पन्न होने जा रहा है। जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता आज भारत के पास है और भारत इस समूह के समस्त देशों को एकजुट बनाए रखने में सफल रहा है। भारत ने चन्द्रयान को चन्द्रमा के दक्षिणी भाग पर सफलता पूर्वक उतारने में सफलता हासिल की है एवं चन्द्रमा की सतह पर “शिवशक्ति” को अंकित करने में भी सफलता पाई है। भारत आज अपनी सीमाओं की मजबूती के साथ सुरक्षा करने में सफल हो रहा है। खेलों के क्षेत्र में भी नित नए झंडे गाड़े जा रहे हैं, हाल ही में चीन में सम्पन्न हुई एशियाई खेल प्रतियोगिताओं में भारत ने 107 पदकों को हासिल कर एक रिकार्ड बनाया है।  इसी प्रकार नागरिकों को आज अच्छी सड़कें मिली हैं, पानी-बिजली की उपलब्धता बढ़ी है, राज्यों में विकास की यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्यों के चुनाव भी बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि राज्य सभा सदस्य राज्य के विधायकों द्वारा ही चुने जाते हैं। इस दृष्टि से विभिन्न राज्यों के चुनाव में भी 100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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राजनीति राम मंदिर के लिए चार दशक लड़ी किन्तु श्रेय नहीं लिया

राम मंदिर के लिए चार दशक लड़ी किन्तु श्रेय नहीं लिया

-विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता-विहिप              अयोध्या का नाम आते ही भगवान श्री राम की जन्मभूमि और उसके लिए सतत् संघर्ष करने वाले एक संगठन का…

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मीडिया चिंताजनक है अखबारों और लेखकों की स्थिति

चिंताजनक है अखबारों और लेखकों की स्थिति

समाचार पत्र और यहां तक कि लेखकों को भी अस्तित्व बचाने के लिए गूगल व फे़सबुक को मात देना होगा। बदहाल होती स्थिति पर सवाल…

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लेख कृषि के माध्यम से सशक्त होती ग्रामीण महिलाएं

कृषि के माध्यम से सशक्त होती ग्रामीण महिलाएं

तानियाचौरसों, उत्तराखंड देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किए जाते हैं। इसके लिए केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकार…

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कविता संकल्प

संकल्प

दीपों के इस महा उत्सव में एक दीप कर्म-ज्योति का हम भी जलाएं। धरा के गहन तिमिर को हर लें हम स्वमेव दीपक बन जाएं।।…

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