देवी साधना में त्रुटियॉ होती है अमंगलकारी
Updated: October 18, 2023
आत्माराम यादव पीव नवरात्रि में नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को 9 दिनों के लिए हरेक नगर, गाँव, मोहल्ले, कसवे आदि हजारो स्थानों पर प्राणप्रतिष्ठित…
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महाराजा अग्रसेन समाजवादी व्यवस्था के अग्रदूत थे
Updated: October 16, 2023
अग्रसेन जयन्ती- 15 अक्टूबर, 2023-ः ललित गर्ग:- कुशल शासकों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन कालजयी होता है और युग-युगों…
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पटना उच्च न्यायालय का फैसला भारत संघ की राजभाषा हिंदी में आना शुरू हुआ।
Updated: October 16, 2023
उत्तर प्रदेश इलाहबाद उच्च न्यायालय की तरह बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश के उच्च न्यायालयों में भी अंग्रेजी के अतिरिक्त हिंदी के प्रयोग का प्रावधान है।…
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नवरात्रि : नौ शक्तियों का मिलन पर्व
Updated: October 16, 2023
– योगेश कुमार गोयलनौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व की शुरूआत हो चुकी है। आदि शक्ति दुर्गा की पूजा के इस पावन पर्व का…
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मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा और विसर्जन का उत्साह
Updated: October 16, 2023
नवरात्रि पर विशेष ‘ आत्माराम यादव पीव आज के युग में पूजा की प्राणवस्तु अर्थात आध्यात्म साधना तिरोहित होने…
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आज सनातन धर्म विभिन्न आस्था और अवस्था से गुजर इस मुकाम पर पहुँचा
Updated: October 16, 2023
—विनय कुमार विनायक आज भारतवर्ष का सनातन धर्म विभिन्न आस्था और अवस्था से गुजर कर इस मुकाम पर पहुँचा, जहाँ से हम पीछे की स्थिति…
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भारत में निर्मित होने लगे हैं रोजगार के करोड़ों अवसर
Updated: October 16, 2023
भारतीय सनातन संस्कृति के बारे में विवेचन करते हुए, भारत में रचित वेद, पुराण एवं परम्पराओं के अनुसार, राजा का यह कर्तव्य माना गया है कि उसके राज्य में निवास कर रही प्रजा में प्रत्येक नागरिक को रोजगार उपलब्ध हो, राजा ऐसी व्यवस्था करे। जब तक भारतीय सनातन संस्कृति का भारत में पालन होता रहा, तब तक लगभग समस्त नागरिकों को रोजगार उपलब्ध होता रहा। प्राचीन भारत में विशेष रूप से गावों में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध रहते थे एवं शहरों की ओर पलायन भी बहुत कम होता था। बेरोजगारी की समस्या के बारे में तो भारत के प्राचीन शास्त्रों में वर्णन ही नहीं मिलता है। समस्त नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं वे अपने परिवार के समस्त सदस्यों का भरण पोषण करने में सक्षम रहते थे एवं परिवार के समस्त सदस्यों के साथ प्रसन्नत्ता एवं उत्साह के साथ रहते थे। जब कि आज की परिस्थितियों के बीच, वैश्विक स्तर पर, बेरोजगारी की समस्या एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर रही है। भारतीय सनातन संस्कृति का पालन करते हुए भारत आज आर्थिक प्रगति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज भारतीय अर्थव्यवस्था पूरे विश्व की लगभग सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। वर्ष 2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में 10वें स्थान पर थी जो आज 5वें स्थान पर पहुंच गई है एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति को देखते हुए अब उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2027-28 के पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी एवं यह अमेरिका एवं चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन जाएगी। भारत में केंद्र सरकार द्वारा लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि न केवल देश की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़े बल्कि भारत में युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के नए अवसर निर्मित हों। इस दृष्टि से भारत में अब अच्छी खबर आई है। भारत में अगस्त 2023 माह में 46.21 करोड़ नागरिकों को रोजगार मिला हुआ था जबकि अगस्त 2022 में 43.02 करोड़ नागरिकों को ही रोजगार प्राप्त था, इस प्रकार एक वर्ष के दौरान 3.19 करोड़ नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा वर्ष 2017 के बाद से प्रतिवर्ष देश में (जुलाई-जून वार्षिक अवधि के बीच) श्रम शक्ति सर्वेक्षण, यह जानने के लिए किया जाता है कि भारत के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एवं रोजगार की कैसी स्थिति है। हाल ही में जुलाई 2022 से जून 2023 की अवधि के बीच यह सर्वेक्षण कार्य सम्पन्न हुआ है। इस सम्बंध में जारी किए गए प्रतिवेदन में भारत में रोजगार की स्थिति के बारे में कई अच्छे तथ्य उभरकर सामने आए हैं। भारत में 15 वर्ष एवं इससे अधिक की आयु वाले नागरिकों के बीच श्रम शक्ति भागीदारी की दर (Labour Force Participation Rate) में लगातार अतुलनीय रूप से सुधार हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम शक्ति भागीदारी की दर वर्ष 2017-18 में 50.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 60.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वर्ष 2017-18 में 47.6 प्रतिशत से बढ़कर 50.4 प्रतिशत हो गई है। इसी प्रकार, पुरुषों में यह दर वर्ष 2017-18 में 75.8 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 78.5 प्रतिशत एवं महिलाओं में यह दर वर्ष 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 37 प्रतिशत हो गई है। इसी प्रकार, भारत में 15 वर्ष एवं अधिक की आयु के नागरिकों के बीच कर्मचारी जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio) में भी अतुलनीय सुधार दृष्टिगोचर है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कर्मचारी जनसंख्या अनुपात वर्ष 2017-18 के 48.1 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 59.4 प्रतिशत हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 43.9 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 47.7 प्रतिशत हो गया है। पुरुषों के बीच यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 71.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 76 प्रतिशत हो गया है और महिलाओं में यह अनुपात वर्ष 2017-18 के 22 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 35.9 प्रतिशत हो गया है। जब देश में श्रम शक्ति भागीदारी की दर एवं कर्मचारी जनसंख्या अनुपात में लगातार सुधार दिखाई दे रहा है तो स्वाभाविक रूप से भारत में बेरोजगारी की दर में भी कमी दृष्टिगोचर हो रही है। उक्त सर्वेक्षण के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 में 5.3 प्रतिशत थी जो वर्ष 2022-23 में घटकर 2.4 प्रतिशत रह गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 7.7 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 5.4 प्रतिशत पर आ गई है। पुरुषों के बीच बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 6.1 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 3.3 प्रतिशत हो गई है तो वहीं महिलाओं के बीच बेरोजगारी की दर वर्ष 2017-18 के 5.6 प्रतिशत से वर्ष 2022-23 में घटकर 2.9 प्रतिशत हो गई है। भारत में आज भी 60 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों में यदि रोजगार के नए अवसर अधिक मात्रा में निर्मित हो रहे हैं तो यह एक बहुत अच्छा सुधार है। इसी प्रकार, भारत में पुरुषों के बीच यदि बेरोजगारी की दर काफी कम हो रही है तो भारतीय महिलाओं को श्रम बाजार में उतरना ही होगा, और ऐसा होता दिखाई भी दे रहा है, अतः यह भी एक उत्तम सुधार है। भारत में महिला शक्ति यदि श्रम बाजार में उतरती है तो भारत में मजदूरी की दरों को भी संतुलित रखा जा सकता है जिससे उत्पादों की लागत में तेज वृद्धि को रोका जा सकेगा और भारत में निर्मित उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लम्बे समत तक प्रतिस्पर्धी बने रह सकेंगे। प्रहलाद सबनानी
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क्या नई विश्व व्यवस्था के लिए अपरिहार्य है विश्वयुद्ध ?
Updated: October 16, 2023
– अनुज अग्रवालऔर इसराइल पर हमास द्वारा आतंकी हमला करा, रुस व चीन ने अमेरिका व नाटो पर निर्णायक चोट कर ही दी। हालांकि मंच…
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‘गरीबी हटाओ’ में गरीब हट गए, लेकिन गरीबी नहीं हटी
Updated: October 16, 2023
अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस- 17 अक्टूबर, 2023 -ललित गर्ग – दुनियाभर में फैली गरीबी के निराकरण के लिए ही संयुक्त राष्ट्र ने साल 1992 में हर साल…
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हम सब हिंदुस्तानी हैं
Updated: October 14, 2023
महिमा जोशीकन्यालीकोट, उत्तराखंड ना पूछो ज़माने से किक्या हमारी कहानी हैहमारी पहचान बस इतनी हैकि हम सब हिंदुस्तानी हैंदेश से करते प्यार इतनाकि जान भी…
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चुनौती एवं गंभीर समस्या बन रहा है ई-कचरा
Updated: October 14, 2023
ई-अपशिष्ट दिवस- 14 अक्टूबर, 2023 ललित गर्ग दुुनिया डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं की ओर तेजी से बढ़ रही है, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं एवं…
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