लेख विंड एनेर्जी इंडस्ट्री में 2027 तक भरपूर नौकरियों की उम्मीद

विंड एनेर्जी इंडस्ट्री में 2027 तक भरपूर नौकरियों की उम्मीद

ग्लोबल विंड ऑर्गेनाइजेशन (जीडब्ल्यूओ) और ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (जीडब्ल्यूईसी) की एक ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2027 तक अनुमानित पवन ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण, स्थापना, संचालन और रखरखाव जैसे कार्यों…

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राजनीति आसान नहीं है मुख्यमंत्री शिवराज का श्राद्ध

आसान नहीं है मुख्यमंत्री शिवराज का श्राद्ध

प्रमोद भार्गव विधानसभा चुनाव के महासंग्राम की शुरुआत होते ही कांग्रेस और भाजपा में श्राद्ध को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। दरअसल सोशल मीडिया…

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लेख शादी-ब्याह: बढ़ता दिखावा-घटता अपनापन

शादी-ब्याह: बढ़ता दिखावा-घटता अपनापन

भौतिकता की पराकाष्ठा के समय में जिसमें प्रत्येक कार्य व रिश्तों को धन की बुनियाद पर खड़ा किया जाने लगा है और वो सम्पूर्ण मानव…

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राजनीति इजरायल और हमास के युद्ध से मानवता पर बढ़ता खतरा

इजरायल और हमास के युद्ध से मानवता पर बढ़ता खतरा

-ललित गर्ग- रूस और यूक्रेन के बाद अब इजरायल और हमास के बीच धमासान युद्ध के काले बादल विश्व युद्ध की संभावनाओं को बल देते…

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राजनीति भारत की विदेश नीति और इजरायल संकट

भारत की विदेश नीति और इजरायल संकट

इसरायल और फिलिस्तीनियों के बीच दुश्मनी की आग दशकों पुरानी है। इसराइल के अस्तित्व को मिटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर षड़यंत्र चलते रहते हैं ।…

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कविता जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?

जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?

जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?मैं उन्हें कैसे समझाऊ कि मैं कोई देवता नहीं हॅू एक सीधा-साधा इंसान हॅू जो इंसानियत से जीना चाहता हॅू।पर वे मानते ही नहीं मुझे देवता की तरह पूजे आते हैं, जाने क्यों मुझ इंसान को देवता बताते है?ये दुनिया बड़ी जालिम है जो हम जैसों के पीछे पडी हैकभी ढंग के इंसान तो न बन पाये पर ये देवता बनाने पर अड़ी है।किन्तु मैं देवता नहीं बनना चाहता एक इंसान बनना चाहता हॅू ?इनके लिये किसी को भी देवता बनाना कितना सरल है ये हर सीधे सादे इंसान को पहले पत्थर जड बनाते हैं।उजाडकर दुनिया उसकी ये उसे नीरस बनाते है।जिन्हें ये देवता बनाते है अक्सर वह इनके करीब होता है इनका अपना तो कम उनके अपनों का सपना होता है।दूसरों के सपनों को चुराकर ये अपनी हकीकत बनाते है।प्रेम को जीने वालों को निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु ही पीड़ा का ताज पहनाकर बेबसी की माला पहनाते है।उनकी आँखों से जुदाई के आँसू बहाकर उनके हृदय में गर्मी का सैलाव लाते है।दो प्रेम करने वाले इंसानों को ये पहले बिछुडवाते है।प्रेम की लाश ढोने वाले हर इंसान को ये देवता बनाते है। आत्‍माराम यादव पीव

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आर्थिकी वैश्विक वित्तीय संस्थान भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ा रहे हैं

वैश्विक वित्तीय संस्थान भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ा रहे हैं

वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश आर्थिक समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। साथ ही, रूस यूक्रेन के बीच युद्ध अभी थमा भी नहीं था कि आतंकवादी संगठन हमास ने इजराईल पर हमला कर दिया, जिससे अब इजराईल एवं हमास के बीच युद्ध छिड़ गया है और अब तो एक तरह से लेबनान भी इस युद्ध में कूद गया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत में अप्रैल-जून 2023 तिमाही में उम्मीद से अधिक खपत का हवाला देते हुए वित्त-वर्ष 2023-24 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ की ओर से किया गया यह बदलाव भारत के आंकड़ों में किए गए कई बदलावों में सबसे नया है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्वानुमानों के अनुसार वित्त-वर्ष 2023-24 के लिए भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। आईएमएफ के अनुसार आने वाले समय में भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आईएमएफ के पूर्व विश्व बैंक द्वारा भी एक ताजा प्रतिवेदन में यह अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2023-24 में 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करेगी। विकास की वजह देश में लगातार बढ़ रहा निवेश और घरेलू मांग का बढ़ना बताया गया है। विश्व बैंक की इंडिया डेवलपमेंट अपडेट (आईडीयू) प्रतिवेदन में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन कायम है। इस कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में रफ्तार बनी रहेगी।  इसी प्रकार, आर्थिक विकास एवं सहयोग संगठन (ओईसीडी) द्वारा जारी किए गए एक अन्य प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2023 में भारत की विकास दर 6.3 प्रतिशत एवं वर्ष 2024 में 6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक वृद्धि दर रहने वाली है। जबकि इसी अवधि के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर क्रमश: 3 प्रतिशत एवं 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। जी-20 समूह में शामिल विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर वर्ष 2023 में 1.5 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। एक अन्य वैश्विक निवेश बैंक मार्गन स्टेनली द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में तेज वृद्धि दर के बाद पूरे वित्तीय वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ाया गया है। मार्गन स्टेनली ने अब पूरे वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले मार्गन स्टेनली ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर को 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। निवेश बैंक ने कहा है कि मजबूत घरेलू मांग के चलते भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में संशोधन किया गया है। अप्रैल-जून 2023 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो मार्गन स्टेनली के पूर्व अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। चीन की विस्तारवादी नीतियों के चलते अब विश्व के कई देशों का चीन पर विश्वास लगातार कम हो रहा है, जिसके कारण विकसित देशों की कई कम्पनियां चीन से अपनी विनिर्माण इकाईयों को अन्य देशों में स्थानांतरित कर रही हैं। इससे चीन में कई आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो रही है। इस बीच भारत ने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भारत में अपनी विनिर्माण इकाईयां स्थापित करने हेतु आकर्षित करने उद्देश्य से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपनी विनिर्माण इकाईयों को अब भारत में स्थापित कर रही हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, स्मार्ट फोन उत्पादन, फार्मा, टेक्सटाइल, सुरक्षा उपकरणों के निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण इकाईयों की स्थापना की जा रही है।  भारत की लगातार बढ़ती आर्थिक विकास दर के चलते अब भारत में बेरोजगारी की दर भी कम हो रही है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण वार्षिक प्रतिवेदन 2022-2023 के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए भारत में बेरोजगारी की दर जुलाई 2022 से जून 2023 के खंडकाल के दौरान छह वर्ष के निचले स्तर अर्थात 3.2 प्रतिशत पर आ गई है। एनएसएसओ के अनुसार, एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह 7.6 प्रतिशत थी। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए वर्तमान साप्ताहिक स्थिति में श्रमबल भागीदारी भी बढ़ी है। अप्रैल-जून 2023 में साप्ताहिक स्थिति में श्रमबल भागीदारी बढ़कर 48.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो एक वर्ष पहले 47.5 प्रतिशत थी। हर्ष का विषय यह भी है कि अब भारत में औपचारिक रोजगार की संख्या तुलनात्मक रूप से अधिक तेज गति से बढ़ रही है। औपचारिक रोजगार में कर्मचारियों को सरकारी नियमों के अंतर्गत समस्त प्रकार की सुविधाएं (प्रॉविडेंट फंड, पेंशन, मेडिकल सुविधा, आदि) नियोक्ताओं द्वारा प्रदान की जाती हैं। जबकि अनौपचारिक रोजगार की श्रेणी के कर्मचारियों को केवल मजदूरी अथवा वेतन ही प्रदान किया जाता है। इस प्रकार भारत में अब कर्मचारियों एवं मजदूरों की औसत आय में वृद्धि भी दृष्टिगोचर है।  भारत में अब तो त्यौहारी मौसम भी प्रारम्भ होने जा रहा है। नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, क्रिसमस दिवस, नव वर्ष, महाशिवरात्रि, होली, आदि  जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं, जिन्हें भारत के नागरिक बड़े ही उत्साह के साथ मानते हैं एवं इन त्यौहारों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी योगदान रहता है। साथ ही, भारत में अब धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन भी बहुत तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे निश्चित ही भारत के आर्थिक विकास को बल मिलेगा। अतः वैश्विक स्तर पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा भारत के आर्थिक विकास के अनुमान के संदर्भ में जारी किये जा रहे संशोधित अनुमान निश्चित ही सही साबित होंगे। 

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पर्यावरण भीषण गर्मी से आपके बच्चे का बुढ़ापा हो सकता है ख़राब

भीषण गर्मी से आपके बच्चे का बुढ़ापा हो सकता है ख़राब

इस नए शोध की मानें तो जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी आपके बच्चे का बुढ़ापा खराब कर सकती है। अगर आप कल की किसी ऐसी…

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लेख बढ़ते नेत्र-रोगियों से दुनिया धुंधली हो रही है

बढ़ते नेत्र-रोगियों से दुनिया धुंधली हो रही है

विश्व दृष्टि दिवस- 12 अक्टूबर, 2023-ः ललित गर्ग :-विश्व दृष्टि दिवस प्रत्येक वर्ष अक्तूबर के दूसरे गुरुवार को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इस…

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राजनीति मतदाता जागरूक बने एवं दिखाये अपनी ताकत

मतदाता जागरूक बने एवं दिखाये अपनी ताकत

-ः ललित गर्ग  :- पांच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उनकी तारीखों का भी ऐलान हो…

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लेख कोयले से अगर दुनिया बना रही दूरी तो रोज़ 100 खदानकर्मियों की बढ़ भी रही मजबूरी 

कोयले से अगर दुनिया बना रही दूरी तो रोज़ 100 खदानकर्मियों की बढ़ भी रही मजबूरी 

कोयले से दूरी यूं तो ज़रूरी है, लेकिन उससे नजदीकी बहुतों की मजबूरी भी है। मसलन उन मजदूरों की को कोयला खदानों में काम करते हैं।…

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महत्वपूर्ण लेख बालिकाएं कब तक बेचारगी का जीवन जीयेगी?

बालिकाएं कब तक बेचारगी का जीवन जीयेगी?

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस- 11 अक्टूबर, 2023 – ललित गर्ग- दुनियाभर में बालिकाओं की बेचारगी को दूर करने, सुरक्षित एवं सम्मानपूर्ण जीवन प्रदत्त करने, उनके सेहतमंद जीवन…

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