लेख आह! इंदौर, वाह…इंदौरी

आह! इंदौर, वाह…इंदौरी

मनोज कुमारइंदौर में मौत की बावड़ी से धडक़न टूटने की गिनती हो रही है। सबके अपने सूत्र, सबके अपने आंकड़ेें। पलकें नम हो गई हैं।…

Read more
राजनीति समाज के ताने बाने से खिलवाड़ करती ‘हेट स्पीच’

समाज के ताने बाने से खिलवाड़ करती ‘हेट स्पीच’

साम्प्रदायिक एजेंट अक्सर चुनावी लाभ के लिए धर्म के नाम पर लोगों का ध्रुवीकरण करने के लिए हेट स्पीच का उपयोग करते हैं। साम्प्रदायिक घृणा…

Read more
राजनीति धर्म एवं राजनीति का घालमेल घातक है

धर्म एवं राजनीति का घालमेल घातक है

ललित गर्ग धर्म और राजनीति के घालमेल से समाज एवं राष्ट्र में उन्माद, अराजकता एवं अशांति पैदा हो रही है, राजनीति धर्म का बेजा इस्तेमाल…

Read more
राजनीति नफरती सोच एवं हेट स्पीच पर न्यायालय की सख्ती

नफरती सोच एवं हेट स्पीच पर न्यायालय की सख्ती

ललित गर्ग राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक ताने-बाने को ध्वस्त कर रहे जहरीले भाषणों की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। संकीर्णता एवं साम्प्रदायिकता का…

Read more
लेख पुरस्कारों का बढ़ता बाजार

पुरस्कारों का बढ़ता बाजार

पुरस्कारों के बढ़ते बाजार के में देने और लेने वाले दोनों की भूमिका है। देने वाले अपने आप खत्म हो जायेंगे अगर लेने वाले न…

Read more
लेख भगवान महावीर एक कालातीत संस्कृति

भगवान महावीर एक कालातीत संस्कृति

– :  समणी स्वर्णप्रज्ञा  :- भारतीय संस्कृति ऋषि और कृषि प्रधान संस्कृति रही है। समय-समय पर विभिन्न ऋषियों, मुनियों संन्यासियों और पैगम्बरों ने अवतार लेकर…

Read more
कविता मै मन के भाव लिखता हूं

मै मन के भाव लिखता हूं

मन में भाव आते हैं तो मै लिखता हूं।दिल में दर्द होता है तो मै लिखता हूं।।किसी का कुछ न लेता हूं न मै देता…

Read more
राजनीति क्या है हिन्दू फोबिया का कारण

क्या है हिन्दू फोबिया का कारण

आज जहां एक तरफ देश में हिन्दू राष्ट्र चर्चा का विषय बना हुआ है। तो दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में रामनवमी के जुलूस…

Read more
कला-संस्कृति हमेशा प्रासंगिक रहेगी भगवान महावीर की अमृतवाणी

हमेशा प्रासंगिक रहेगी भगवान महावीर की अमृतवाणी

– योगेश कुमार गोयल‘अहिंसा परमो धर्मः’ सिद्धांत के लिए जाने जाते रहे भगवान महावीर का अहिंसा दर्शन आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक और जरूरी…

Read more
कविता बचाए रखनी होगी कथा कहने व सुनने की परम्परा

बचाए रखनी होगी कथा कहने व सुनने की परम्परा

—विनय कुमार विनायकबचाए रखनी होगी कथा कहने व सुनने की परम्पराकहानी के मुख्य पात्र और सारे किरदार तो चले गएमगर कथा में बची है उनकी…

Read more
लेख आत्मनिर्भरता से ही सशक्तिकरण संभव है

आत्मनिर्भरता से ही सशक्तिकरण संभव है

अर्चना किशोर छपरा, बिहार आजकल महिलाएं वह सब कुछ कर रही हैं जिस पर वर्षों से पुरुषों का एकाधिकार था. लेकिन कई ऐसे छोटे स्तर के…

Read more
कविता राम मेरे फिर आज हैं चोटिल

राम मेरे फिर आज हैं चोटिल

राम मेरे फिर आज हैं चोटिलफैके गए हैं पत्थर उन पररोक लो, इससे पहले किराम पर पत्थर फैंकनाएक रिवायत बन जाए,राम मेरे फिर आज हैं…

Read more