भाजपा-शिवसेना सरकार : यही तो मिला था जनादेश
Updated: July 1, 2022
सुरेश हिंदुस्थानीमहाराष्ट्र में लम्बे समय तक चली राजनीतिक लड़ाई के परिणामस्वरूप राज्य में भाजपा-शिवसेना की सरकार बन गई है। शिवसेना किसकी है और भविष्य में…
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आदमी हो आदमी के लिए कुछ भला करो
Updated: June 30, 2022
—विनय कुमार विनायकराजनीति ना करो आदमी होआदमी के लिए कुछ भला करो जीओ और मरो! जब तुम काम करते हो मरने मारने के गंदे,तब तुम…
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कोरोना महामारी के बावजूद भारत में आय की असमानता हो रही है कम
Updated: June 30, 2022
कोरोना महामारी के खंडकाल में चूंकि आर्थिक गतिविधियां पूरे विश्व में ही विपरीत रूप से प्रभावित हुई थीं और इससे न केवल कई गरीब परिवारों…
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महंगी होती खाद से खेती करना मुश्किल
Updated: June 29, 2022
-प्रियंका ‘सौरभ’ उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरक खेतों की उर्वरता बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए आयात…
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराने का दांव उल्टा पड़ा
Updated: June 29, 2022
गुजरात दंगे शीर्ष न्यायालय का फैसला प्रमोद भार्गव आखिरकार गुजरात के सांप्रदायिक दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने का दांव याचिकाकर्ताओं और उसके उत्प्रेरकों को ही उल्टा पड़ गया। अब प्रमुख साजिशकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ और आईपीएस आरबी श्रीकुमार पुलिस हिरासत में हैं। जकिया जाफरी ने एसआईटी रिपोर्ट के विरुद्ध शीर्ष न्यायालय में याचिका दायर की थी। दरअसल इन दंगों में जकिया के पति एहसान जाफरी की मौत हो गई थी। इन दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराने की मांग न्यायालय से की गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने न केवल इस मांग को खारिज कियाए बल्कि एसआईटी की जांच और एसआईटी द्वारा मोदी को दी गई क्लीन चिट को सही ठहराया। अलबत्ता न्यायालय ने तीखा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि ष्यह याचिका कड़ाही को खौलाते रहने की मंशा से दायर की गई है। जाहिर है, इसके पीछे का इरादा गलत है। अतएव इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है। ऐसे लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही जरूरी है।यह टिप्पणी न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ ने 452 पृष्ठ के फैसले में करते हुए कहा है कि जकिया की याचिका किसी दूसरे के निर्देशों से प्रेरित है। जकिया याचिका के बहाने परोक्ष रूप से अदालत में विचाराधीन मामलों में दिए गए फैसलों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं। ऐसा क्यों कियाए यह उन्हें पता है। स्पष्ट रूप से उन्होंने किनके इशारे पर ऐसा कियाए यह जांच का विषय है जिसे किया जाना आवश्यक है। 2002 में राजधानी अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार से जुड़े मामले में विशेष जांच दल अदालत ने फैसला सुनाया था। अहमदाबाद में हुए दंगों के 14 साल बाद यह फैसला आया था। यह मामला कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या से जुड़ा था। बहुचर्चित इस मामले में विशेष जांच दल ने 66 आरोपियों को नामजद किया था। इनमें से 24 आरोपियों को दोषी और 36 को निर्दोष करार दिया गया था। 24 में से 11 को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया। बांकी 13 को इससे कमतर अपराधों का दोषी माना था। कुल आरोपियों में से 6 की मौत फैसला आने से पहले ही हो चुकी थी। इस फैसले की सबसे अहम बात यह रही कि किसी भी आरोपी को धारा 120.बी के तहत पूर्व नियोजित साजिश का दोषी नहीं पाया गया था। अदालत ने इस संदर्भ में स्पष्ट रूप से कहा था कि उपद्रवी भीड़ ने जो कुछ भी कियाए वह क्षणिक या तात्कालिक उत्तेजना के चलते किया। दरअसल कांग्रेस समेत जो भी वामपंथी दलए विदेशी धन से पोषित चंद एनजीओ और बौद्विक धड़े थे जिन्होंने अपने बयानों और छद्म लेखन से यह धारणा रचने की पुरजोर कोशिश…
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वन्य जीवों और पेड़ों के लिए अपनी जान पर खेलता बिश्नोई समाज
Updated: June 29, 2022
-सत्यवान ‘सौरभ’ बिश्नोई आंदोलन पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और हरित जीवन के पहले संगठित समर्थकों में से एक है। बिश्नोइयों को भारत का पहला पर्यावरणविद…
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आयु निर्धारण सिर्फ जन्म नहीं मानसिक आत्मिक स्थिति से होती
Updated: June 29, 2022
—विनय कुमार विनायकमानव की आयु का निर्धारणसिर्फ जन्म नहीं मानसिक स्थितिऔर आत्मा के पूर्व जन्मों सेसंग्रहित ज्ञान व यादाश्त से होती! सब मानव समकालीन होते…
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भारत ने विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में लगाई लम्बी छलांग
Updated: June 29, 2022
अभी हाल ही में, 15 जून 2022 को, स्विटजरलैंड स्थित प्रबंधन विकास संस्थान (इन्स्टिटयूट फोर मेनेजमेंट डेवलपमेंट) द्वारा विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक जारी किया गया है।…
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भारत के लिए G7 शिखर सम्मेलन के मायने
Updated: June 29, 2022
डॉ. संतोष कुमार भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के विशेष निमंत्रण पर…
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मुर्मू के बहाने आदिवासी विकास का मर्म
Updated: June 29, 2022
-ः ललित गर्गः- आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए द्रौपदी…
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खिलौनों की दुनिया के वो मिट्टी के घर याद आते हैं।
Updated: June 29, 2022
-प्रियंका ‘सौरभ’ सदियों से मिटटी के घर बनाने की जो परम्परा चली आ रही है; भारत में 118 मिलियन घरों में से 65 मिलियन मिट्टी…
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वैदिक धर्म का समग्रता से प्रचार गुरुकुलीय शिक्षा से ही सम्भव
Updated: June 29, 2022
–मनमोहन कुमार आर्य गुरुकुल एक लोकप्रिय शब्द है। यह वैदिक शिक्षा पद्धति का द्योतक शब्द है। वैदिक धर्म व संस्कृति का आधार ग्रन्थ वेद है। वेद चार हैं जिनके नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं। यह चार वेद सृष्टि के आरम्भ में सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अनादि, अनन्त, न्यायकारी, सृष्टिकर्ता और जीवों को उनके कर्मानुसार सुख-दुःख व मनुष्यादि जन्म देने वाले ईश्वर से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को प्राप्त हुए थे। वेद ईश्वर की अपनी भाषा संस्कृत में हैं जो लौकिक संस्कृत से भिन्न है और जिसके शब्द व पद रूढ़ न होकर योगरूढ़ हैं। वेदों को जानने व समझने के लिए वैदिक संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है और इसके लिए वर्णोच्चारण शिक्षा सहित व्याकरण के अष्टाध्यायी व महाभाष्य आदि ग्रन्थों का बाल व युवावस्था में लगभग तीन वर्ष तक अध्ययन करना व कराना आवश्यक है। यह अध्ययन किसी एक गुरु से किया जा सकता है। प्राचीन काल में वेदों के विद्वान जिन्हें ब्राह्मण कहा जाता था, वह शिक्षा व व्याकरण आदि का ज्ञान वनों में स्थित अपने गुरुकुल, अर्थात् गुरु के कुल, में कराया करते थे जहां अनेक विद्यार्थी एक गुरु से व्याकरण व उसके बाद निरुक्त आदि वेदांगों व उपांगों आदि अनेक ऋषिकृत ग्रन्थों का अध्ययन करते थे। यह परम्परा महाभारत के बाद यवन व अंग्रेजों के समय में भंग कर दी गई थी जिसका उद्देश्य वैदिक धर्म व संस्कृति को समाप्त कर विदेशी मतों को महिमा मण्डित करना था। इसका उद्देश्य लोगों का येन केन प्रकारेण धर्मान्तरण व मतान्तरण करना मुख्य था। इस कारण दिन प्रति दिन वैदिक धर्म व संस्कृति का पतन हो रहा था। महर्षि दयानन्द ने इस स्थिति को यथार्थ रूप में समझा था और संस्कृत का अध्ययन कराने के लिए एक के बाद दूसरी कई संस्कृत पाठशालाओं का अलग अलग स्थानों पर स्थापन किया था। किन्हीं कारणों से इन पाठशालाओं को आशा के अनुरुप सफलता न मिलने पर उन्हें बन्द करना पड़ा तथापि ऋषि दयानन्द ने जहां एक ओर सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, संस्कारविधि, आर्याभिविनय व ऋग्वेद-यजुर्वेद भाष्य आदि का प्रणयन किया वहीं उन्होंने व्यापकरण पर भी अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थ लिखकर अपने अनुयायियों को गुरुकुल स्थापित कर संस्कृत व वेदादि ग्रन्थों के पठन पाठन का मार्ग भी प्रशस्त किया था। ऋषि दयानन्द धर्मवेत्ता एवं समाज सुधारक सहित सच्चे देशभक्त, ऋषि, योगी व समस्त वैदिक साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान थे। उन्होंने वैदिक धर्म, इसकी मान्यताओं एवं सिद्धान्तों के प्रचार सहित समाज सुधार का अभूतपूर्व कार्य किया। 30…
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