कविता गांधारी का शाप फला है सुन लो हे अफगान

गांधारी का शाप फला है सुन लो हे अफगान

—विनय कुमार विनायकगांधारी का शाप फला हैसुन लो हे गांधार देश के अफगान!तुम मानो या ना मान,ये बहन वंश के नाश का परिणाम! गांधारी तेरी…

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कविता मन

मन

मन ही मन को जानता,मन को मन से प्रीत।मन ही मनमानी करे,मन ही मन का मीत।मन झूमे,मन बांवरा,मन की है अद्भुत रीत।मन के हारे हार…

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लेख श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन एवं अलौकिक लीलाएं

श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन एवं अलौकिक लीलाएं

– योगेश कुमार गोयलजन्माष्टमी का त्यौहार प्रतिवर्ष भाद्रपक्ष कृष्णाष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व का…

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साहित्‍य कमल हमेशा कीचड़ में खिलता

कमल हमेशा कीचड़ में खिलता

—विनय कुमार विनायककमल हमेशा कीचड़ में खिलताबिना खाद पानी के हींमगर रुआब गुलाब से कम नहीं! कमल प्रतीक है हिन्दू संस्कृति का,कमल राजा है तमाम…

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लेख श्रीकृष्ण की धर्म नीति

श्रीकृष्ण की धर्म नीति

‘‘नरोचित किन्तु क्या यह कर्म होगा ?नहीं इससे मलिन क्या धर्म होगा ?’’अर्जुन की इस जिज्ञासा पर कृष्ण का उत्तर विस्मयजनक है; अद्भुत है-‘‘हंसे केशव,…

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लेख सारस्वत व्यक्तित्व के धनी डाॅ बेचन

सारस्वत व्यक्तित्व के धनी डाॅ बेचन

(पुण्य तिथि 30अगस्त पर विशेष)कुमार कृष्णनबहुआयामी सारस्वत व्यक्तित्व के धनी थे डाॅ विष्णु किशोर झा ‘बेचन’। बिहार के साहित्यिक,सांस्कृतिक एवं शैक्षिक जीवन के सशक्त हस्ताक्षर…

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कविता जीवन की कुछ सच्चाईयां

जीवन की कुछ सच्चाईयां

मृत्यु है जीवन का अंतिम छोर,ये तो सबको एक दिन आयेगी।इससे बच न सका कोई प्राणी,ये तो सबको संग ले जायेगी।। आता है जीवन में…

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लेख आपके यहां क्या खास है?

आपके यहां क्या खास है?

मनोज कुमारआपके यहां खास क्या मिलता है? यह सवाल हमारे यहां आम है. शौकिन भारतीय जहां कहीं भी जाते हैं, उनका सबसे पहले सवाल यही…

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धर्म-अध्यात्म ईश्वर अनादि काल से हमारा साथी है और हमेशा रहेगा

ईश्वर अनादि काल से हमारा साथी है और हमेशा रहेगा

-मनमोहन कुमार आर्यअथर्ववेद के एक मन्त्र ‘अन्ति सन्तं न जहात्यन्ति सन्तं न पश्यति। देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति।।’ में कहा गया है कि…

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लेख कुछ और नहीं समझीयेगा , फर्क है सिर्फ नज़रिए का

कुछ और नहीं समझीयेगा , फर्क है सिर्फ नज़रिए का

‘१७००० फीट ऊँचाई पर स्थित ये वो भूभाग है, जहां घांस का टुकड़ा भी नहीं उगता. लद्दाख अनुपयोगी, और रहने के लायक जगह नहीं है.…

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राजनीति याद आ रही ससुराल जाती मिनी , मेवा बेचते रहमत, नेताजी सुभाष, टैगोर

याद आ रही ससुराल जाती मिनी , मेवा बेचते रहमत, नेताजी सुभाष, टैगोर

जैसे-जैसे तालिबान काबुल को अपने कब्जे में ले रहा,मेरी आंखों के सामने शरद के पत्तों की तरह सरसराकर गुज़र रही तस्वीरें, कहानी.. काबुल का रहमत…

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कविता नए दौर का धृतराष्ट्र

नए दौर का धृतराष्ट्र

—विनय कुमार विनायकतुमघृणा के पात्र हो,क्योंकि तुम धृतराष्ट्रहो!तुमने समग्र मानवता ही नहींसमग्रसृष्टि जगत के हिस्सों केस्नेह, प्यार, सहकार को समेटकरअपने लाड़ले दुर्योधन की झोली में…

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