कविता मां तुम कितना कुछ सहती हो

मां तुम कितना कुछ सहती हो

—विनय कुमार विनायकमां तुम कितना कुछसहती हो,फिरभी तुमकुछनाकहती हो,खाना हम सबको खिलाने तक,तुम मांदिनभर भूखी रहती हो! इस जहां में कहांकोईरचना,जो तेरे जैसेभूख-प्यास, नींदऔर ढेर…

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राजनीति तालीबानी राष्ट्र, दुनिया के लिए आफत

तालीबानी राष्ट्र, दुनिया के लिए आफत

प्रमोद भार्गव      राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान क्रूर तालीबानी शासकों के हाथ आ गया है। इसके साथ ही इस देश में भारी…

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राजनीति क्या तालिबान का उदय भारत को घेरने की बड़ी साज़िश…?

क्या तालिबान का उदय भारत को घेरने की बड़ी साज़िश…?

                              , अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कूटनीति जिस प्रकार से अपने पैर पसार रही है वह पूरी तरह से संकेत दे रही है कि इसके…

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विश्ववार्ता तालिबान औऱ भारत के क्षद्म सेक्यूलरवादी

तालिबान औऱ भारत के क्षद्म सेक्यूलरवादी

डॉ राघवेंद्र शर्माअफगानिस्तान में तालिबान राज से उपजे हालातों ने भारत के छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बहुलता,सहिष्णुता,जेंडर औऱ धार्मिक…

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कविता मेरे दिल का दर्द

मेरे दिल का दर्द

तेरी आंखों में मुझे अपना हाल दिखता है।लगता है मुझे भी तू भी बेहाल दिखता है।। बहाना ढूंढती रहती हूं,मैं बात करूं तुझसे।वो बात क्या…

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पर्यावरण इन 20 देशों की 73 फ़ीसद जनता मानती है पृथ्वी महाविनाश के मुहाने पर

इन 20 देशों की 73 फ़ीसद जनता मानती है पृथ्वी महाविनाश के मुहाने पर

आईपीसीसी की ताज़ा रिपोर्ट ‘कोड रेड’ के बाद आज ग्‍लोबल कॉमंस अलायंस ने द ग्लोबल कॉमन्स सर्वे: एटिट्यूड टू प्लेनेटरी स्टीवर्डशिप एंड ट्रांसफॉर्मेशन अमंग जी20…

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आर्थिकी पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं पर मंडराते खतरों का हल भारतीय दर्शन में है

पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं पर मंडराते खतरों का हल भारतीय दर्शन में है

 पश्चिमी देशों में उपभोक्तावाद के धरातल पर टिकी पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं पर आज स्पष्टतः खतरा मंडरा रहा है। 20वीं सदी में साम्यवाद के धराशायी होने के…

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पर्व - त्यौहार रिश्तों के मीठे बंधनों और प्यार के धागों का पर्व

रिश्तों के मीठे बंधनों और प्यार के धागों का पर्व

-ललित गर्ग –रक्षाबंधन एक खूबसूरत त्यौहार है जो प्यार, विश्वास, अपनापन एवं सुरक्षा का प्रतीक है यानी प्यार के धागों एवं मानवीय संवेदनाओं का पर्व।…

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लेख महिलाओं के लिए नहीं बदले आज़ादी के मायने

महिलाओं के लिए नहीं बदले आज़ादी के मायने

अर्चना किशोर छपरा, बिहार आज़ादी का दिन हर भारतवासी चाहे वह समाज के किसी भी तबके का हो, इस दिन को अच्छे से जानता व पहचानता है।…

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लेख मनुष्य की चहुंमुखी उन्नति का आधार विद्या की वृद्धि से ही सम्भव

मनुष्य की चहुंमुखी उन्नति का आधार विद्या की वृद्धि से ही सम्भव

-मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य के जीवन के दो यथार्थ हैं, पहला कि उसका जन्म हुआ है और दूसरा कि उसकी मृत्यु अवश्य होगी। मनुष्य को जन्म…

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धर्म-अध्यात्म विश्व के कंेद्र बिंदु पर नटराज-नृत्य

विश्व के कंेद्र बिंदु पर नटराज-नृत्य

प्रमोद भार्गव भगवान शिव का विश्व के केंद्र बिंदु पर तांंडव नृत्य करना ही इस तथ्य का ठोस प्रतीक है कि नटराज-प्रतिमा का संबंध प्रकृति…

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विश्ववार्ता तालिबान से भारत सरकार सीधा संवाद क्यों नहीं करती ?

तालिबान से भारत सरकार सीधा संवाद क्यों नहीं करती ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार गिर चुकी है लेकिन तालिबान की सरकार ने अभी तक औपचारिक सत्ता-ग्रहण नहीं किया है। किसी भी…

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