राजनीति आसान नहीं चीतों का पुनर्वास

आसान नहीं चीतों का पुनर्वास

प्रमोद भार्गव  दुनिया में औद्योगिक विकास और बढ़ते शहरीकरण की वजह से वन्य प्राणियों के सामने चुनौतीपूर्ण हालात उत्पन्न हो गए हैं। उनके सरंक्षण एवं…

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राजनीति प्रतिबंधित ‘सिमी’ का सगा भाई है ‘पीएफआई

प्रतिबंधित ‘सिमी’ का सगा भाई है ‘पीएफआई

‘ -मनोज ज्वाला नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ लंबे समय दिल्ली केशाहीनबाग में आसमान सिर पर उठाने की मशक्कत कर रही‘भाड़े की भीड़’ के पीछे काम…

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समाज विवाह की बढ़ती उम्र पर खामोशी क्यों…?

विवाह की बढ़ती उम्र पर खामोशी क्यों…?

30-35 साल की युवक युवतियां बैठे है कुंवारे, फिर मौन क्यों हैं समाज के कर्ता-धर्ता  विकास छाबड़ा मदनगंज-किशनगढ़। कुंवारे बैठे लड़के लड़कियों की एक गंभीर…

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राजनीति दिल्ली की सत्ता शाहीन बाग से होकर गुजरेगी ?

दिल्ली की सत्ता शाहीन बाग से होकर गुजरेगी ?

मुरली मनोहर श्रीवास्तव दिल्ली चुनाव देश में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। दिल्ली की सत्ता का स्वाद भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों के…

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धर्म-अध्यात्म सनातन वैदिक धर्मियों के लिये राष्ट्र वन्दनीय है तथा सत्यार्थप्रकाश इसका पोषक है

सनातन वैदिक धर्मियों के लिये राष्ट्र वन्दनीय है तथा सत्यार्थप्रकाश इसका पोषक है

-मनमोहन कुमार आर्य                संसार में मत–मतान्तर तो अनेक हैं परन्तु धर्म एक ही है। वेद ही एकमात्र सर्वाधिक व पूर्ण मानवतावादी धर्म है। वेद…

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राजनीति नए राष्ट्र के निर्माण का रास्ता- मूकनायक

नए राष्ट्र के निर्माण का रास्ता- मूकनायक

पीड़ितो,पत्रकारिता की प्रतिबद्धता का प्रतीक- मूकनायक “स्वाभिमान, स्वबल, समानता, समान अधिकार, स्वाधीनता, स्वराज, स्वतंत्रता, सुद्रढ़ता, संघर्ष, संगठन का संकेतात्मक प्रतीक  है”- मूकनायक31 जनवरी 1920 को डॉ भीमराव…

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राजनीति राजनाथ सिंह की बढ़ती सक्रियता का सबब

राजनाथ सिंह की बढ़ती सक्रियता का सबब

– ललित गर्ग- रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इनदिनों एक अलग तरह की सक्रियता को लेकर चर्चा में है। उनका राजनीतिक प्रभुत्व एवं कद में उछाल भले…

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व्यंग्य बापू ! सत्याग्रह पर हैं

बापू ! सत्याग्रह पर हैं

                         प्रभुनाथ शुक्ल हमारे मित्र ढोंगी लाल ने काफी हाउस में चुस्कियां लेते हुए…

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धर्म-अध्यात्म ईश्वर ने संसार की रचना क्यों की?

ईश्वर ने संसार की रचना क्यों की?

-मनमोहन कुमार आर्य                हम इस संसार में उत्पन्न हुए हैं व वर्षों से रह रहे हैं। जन्म से पूर्व हम कहां थे, क्या करते…

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व्यंग्य खिचड़ी बनाम बिरयानी

खिचड़ी बनाम बिरयानी

“मालिन का है दोष नहीं ,ये दोष है सौदागर का, जो भाव पूछता गजरे का और देता दाम महावर का”  ऐसा ही कुछ आजकल के धरना…

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राजनीति क्या महज औपचारिक रह गई है गांधी टोपी!

क्या महज औपचारिक रह गई है गांधी टोपी!

लिमटी खरे कांग्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। एक दशक से कांग्रेस अपने मूल मार्ग से…

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पर्यावरण फिर दिखाई दे सकते हैं कुलांचे भरते चीते

फिर दिखाई दे सकते हैं कुलांचे भरते चीते

लिमटी खरे लगभग 72 साल पहले भारत से चीता विलुप्त हो गया था। देश में काफी विलंब से ही सही सरकारों के द्वारा बाघ, शेर…

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