लेख राम से मित्रता के बाद सुग्रीव को भय ओर संदेहों से मिली मुक्ति

राम से मित्रता के बाद सुग्रीव को भय ओर संदेहों से मिली मुक्ति

                              (2)        सुग्रीव के जीवन मे झाँका जाये तो वह एक विषयी जीव रहा है जिसका आत्मविश्वास कभी भी खुद पर नही रहा ओर…

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राजनीति दिल्ली को एक अर्जुन चाहिए

दिल्ली को एक अर्जुन चाहिए

– ललित गर्ग- दिल्ली में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और चुनावी सरगर्मियां गरमा रही है। इन चुनावों में भाजपा, कांग्रेस एवं आप…

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राजनीति इंटरनेट पर शीर्ष अदालत का फैसला बनेगा नज़ीर!

इंटरनेट पर शीर्ष अदालत का फैसला बनेगा नज़ीर!

लिमटी खरे कानून और व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने की आशंकाओं को देखकर धारा 144 को लागू करना लाजिमी है पर लंबे समय तक इस…

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लेख युवा ही समाज के नवनिर्माता

युवा ही समाज के नवनिर्माता

हाथ बाँध , आँख मूँद किसी भी समय में अच्छे समय की परिकल्पना करना बेवकूफ़ी भरी कल्पना ही कहीं जायेगी । किसी भी गलत का…

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कविता खानावदोश झुग्गिया

खानावदोश झुग्गिया

भारत के हर शहर में होती है अछूत झुग्गियाॅ बसाहट से दूर किसी भी सड़क के किनारे खास मौके पर चार खूटियों और तिरपाल से…

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कविता बुढ़ापे पर सवार अजगर

बुढ़ापे पर सवार अजगर

आत्माराम यादव पीव बड़ी मासूमियत से बुजुर्ग पिता ने कहा- बेटा] बुढ़ापा अजगर सा आकर मेरे बुढ़ापे पर सवार हो गया है जिसने जकड़ रखे…

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कविता सोफे का दर्द

सोफे का दर्द

आत्माराम यादव पीव मैं अपने सोफे पर बैठा मोबाईल में डूबा हुआ था और ढूंढ रहा था पसंद की रिंगटोन चिड़ियों की चहकने-फुदकने कोयल-बुलबुल की…

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कविता मानव ही मानवता को शर्मसार करता है

मानव ही मानवता को शर्मसार करता है

मानव ही मानवता को शर्मसार करता है सांप डसने से क्या कभी इंकार करता है उसको भी सज़ा दो गुनहगार तो वह भी है जो…

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धर्म-अध्यात्म हमें ईश्वर के सत्यस्वरूप की ही उपासना करनी चाहिये असत्य की नहीं

हमें ईश्वर के सत्यस्वरूप की ही उपासना करनी चाहिये असत्य की नहीं

-मनमोहन कुमार आर्य                किसी भी वस्तु या पदार्थ का स्वरूप कुछ विशिष्ट गुणों को लिये हुए होता है। उन गुणों को जानकर उसके अनुरूप…

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कहानी हमशक्ल

हमशक्ल

हे ईश्वर किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। कटक के बाद जिस चेहरे को बामुश्किल से भूल पाया था, आज फिर से हूबहू मेरे…

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व्यंग्य मेरा वो मतलब नहीं था

मेरा वो मतलब नहीं था

“जामे जितनी बुद्धि है,तितनो देत बतायवाको बुरा ना मानिए,और कहाँ से लाय” देश में धरना -प्रदर्शन से विचलित ,और अपनी उदासीन टीआरपी से खिन्न फिल्म…

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कविता कहाँ गये भवानीप्रसाद मिश्र के ऊँघते अनमने जंगल

कहाँ गये भवानीप्रसाद मिश्र के ऊँघते अनमने जंगल

भवानीप्रसाद मिश्र ने देखे थे सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुये मिले थे वे उॅघते अनमने जंगल। झाड़ ऊॅचे और नीचे जो खड़े…

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