आगरा

आगरा के ताज कोरिडोर के विहंगम विकास की योजना

कहा यह भी जाता है कि औरंगजेब के भाई दारा ने उसे मरवाने के लिए एक शराबी हाथी से भिड़वा दिया था दारा शिकोह की शादी के बाद शाहजहाँ ने दो हाथियों सुधाकर और सूरत सुंदर के बीच एक मुकाबला करवाया। ये मुगलों के मनोरंजन का पसंदीदा साधन हुआ करता था. अचानक सुधाकर घोड़े पर सवार औरंगज़ेब की तरफ़ अत्यंत क्रोध में दौड़ा. औरंगज़ेब ने सुधाकर के माथे पर भाले से वार किया जिससे वो और क्रोधित हो गया.उसने घोड़े को इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि औरंगज़ेब ज़मीन पर आ गिरे. प्रत्यक्षदर्शियों जिसमें उनके भाई शुजा और राजा जय सिंह शामिल थे, ने औरंगज़ेब को बचाने की कोशिश की लेकिन अंतत: दूसरे हाथी श्याम सुंदर ने सुधाकर का ध्यान बंटाया और उसे मुकाबले में दोबारा खीच लिया. इस घटना का ज़िक्र शाहजहाँ के दरबार के कवि अबू तालिब ख़ाँ ने अपनी कविताओं में किया है.इतिहासकार अक़िल ख़ाँ रज़ी अपनी किताब वकीयत-ए-आलमगीरी में लिखते हैं कि इस पूरे मुकाबले के दौरान दारा शिकोह पीछे खड़े रहे और उन्होंने औरंगज़ेब को बचाने की कोई कोशिश नहीं की.

आगरा की वेदना

कल कल करने वाली यमुना के तट पर होते हुए मैं प्यासा हूं। कारण यह है कि यमुना नें प्यास मिटाने की क्षमता खो दी है। पहले मेरी प्यास बुझाने के लिए यमुना काफी थी, लेकिन सरकारी नीतियों ने हत्या कर दी है। मेरी यमुना में पानी के नाम पर मलमूत्र और फैक्ट्रियों के कचरे मात्र है। दिल्ली, हरियाणा से ही मलमूत्र आ रहा है। मेरी यमुना को शुद्ध करने के लिए हजारों करोड़ रुपये जल निगम वाले डकार चुके हैं। सिर्फ बारिश में यमुना कुछ समय के लिए भरी हुई दिखती है। इसके बाद तो सिर्फ नाला ही नजर आती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यमुना में गंदगी डाली जा रही है।

बदलनी शुरु हो गई आगरा में यमुना की तस्बीर

यमुना निर्मलीकरण से सम्बन्धित समिति के दिनांक 06.08.2009 के आवेदनपत्र पर तत्कालीन आयुक्त महोदया माननीया राधा एस. चैहान की अध्यक्षता में दिनांक 17.08.2009 को आयुक्त सभागार में एक बैठक भी आहूत हो चुकी है। इसके कुछ विन्दुओं पर कुछ कार्यवाही भी हुई थी और कई अभी भी लम्बित पड़े हैं। इस कार्य के सम्पन्न होने पर जहां भारत की स्वच्छता व हरीतिमा का पुनः दर्शन सुगम हो सकेगा वहीं आगरा शहर एक हेरिटेज सिटी की ओर भी बढ़ सकेगा।

आगरा को सुधारने की जरुरत

वर्तमान समय में इस शहर की सर्वधिक बड़ी समस्या जाम की है । सप्ताहान्त में बाहर के मुसाफिर आगरा में ज्यादा आ जाते है। कहीं कोई रैली का आयोजन हुआ तो भी भीड़ बढ जाती है। जब शहर में प्रतियागिता की कोई परीक्षाये होती हैं तो भी यह भीड़ देखी जा सकती हैं। इसके समाधान के लिए प्रशासन जो भी उपाय करता है वह पर्याप्त नहीं होता है। पुलिस की पेट्रोलिंग इस उद्देश्य से कभी नहीं की जाती है। टैम्पां व रिक्शे सवारियों के लिए आम जनता की सुविधाओं की अनदेखी करते रहते हैं।

आगरा की नगर संरचना

लाकृति- भवन, निवास एवं आवादी:-आगरा नगर का विकास किसी निश्चित योजना के अनुकूल ना होकर अव्यवस्थित- बेतरतीब रुप में हुआ है। यह पुराने तथा नये आबादी का अनूठा संयोग है। यह विभिन्न समयों में अस्तित्व में आने वाले स्थलों का संगुटीकरण है, जो विकास-प्रसार प्रक्रिया द्वारा एक हो गये हैं। यह शहर विस्तारित योजना के अनुरुप ना होकर अनेक ऊंची नीची भूमि , नदी के किनारे का ऊंचा टीला, तलहटी तथा ऊंचा नीचा विशेष स्थलाकृति की रुपरेखा मात्र है।

आगरा में यमुना निर्मलीकरण कार्य योजना

डा. राधेश्याम द्विवेदी प्राचीन सभ्यतायें नदियों के किनारे विकसितः-प्राचीन सभ्यताओं का जन्म एवं उदगम नदियों

आगरा का केन्द्रीय कारागार: कारागार ही नही, बंदियों के लिये कल्याण केन्द्र भी

डा. राधेश्याम द्विवेदी आगरा उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक महानगर, ज़िला शहर व तहसील भी