उत्तराखंड

उत्तराखंड में जल संकट :चुनोतियाँ व समाधान की दिशा में प्रयास

वास्तव में पेयजल संकट आगामी भविष्य के लिए एक चुनोतिपूर्ण विषय है । इस जटिल समस्या के निवारण के लिए हमें केवल सरकारी नीतियों के भरोशे न बैठकर जनता को भी जागरूक करना होगा जिससे हम प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस मूल्यवान संसाधन को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए संजोकर रख पाएं। गाँवो से शहरो की तरफ होने वाले तीव्र पलायन के कारण शहरो पर अतरिक्त जनसंख्या दवाब बढ़ रहा है इस जनसंख्या दवाब के कारण शहरो में पेयजल की किल्लत साफ़ नज़र आती है । उत्तराखंड के अनेक इलाके ऐसे है जहाँ पानी भरने के लिए लोगो को घण्टों भर लाइन में रहना पड़ता है यह समस्या केवल शहरो में ही नही बल्कि उत्तराखंड के अनेक पहाड़ी गाँवो की भी है जहा आज भी महिलाए किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाकर अपनी आवश्यकताओ को पूरा करती है ।

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जीत के ऐतिहासिक मायने

आज भाजपा की जीत के लिए सबसे बड़ा कारण यह भी है कि भाजपा को विगत तीन माह में जुमलेबाज पार्टी , नेता विहीन दल तीन साल मेंकोई काम न कर पाने वाले दल के रूप में अलंकृत किया गया था। जिसका लाभ आज भाजपा व सहयोगी दलों को मिल रहा है। विगत 27 सालों से किस न किसी प्रकार से सपा, बसपा और कांग्रेस ही प्रदेश मं राज कर रहे थे लेकिन यह सभी दल अपनी नाकामियों को छिपाते हुए प्रदेश के बिगड़ते हुए हालातांे के लिए पीएम मोदेी व भाजपा को जिम्मेदार मान रहे थे। सबसे बड़ी राहत की बात यह मिली हे कि एग्जिट पोलों के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना किसी देरी के अपनी बुआ के साथ प्यार की पेंगे बढ़ानी शुरू कर दी थी

चुनावों की तैयारी मतदाता भी करें

एक बात बार-बार सामने आती रही है कि भारत के मतदाता राजनीतिज्ञों से ज्यादा अक्लमंद हैं। जहां नेताओं की अक्ल काम करना बन्द कर देती है वहां इन्हीं अनपढ़ और गरीब कहे जाने वाले मतदाताओं की अक्ल चलनी शुरू हो जाती है और ये देश की राजनीतिक दिशा तय कर देते हैं एवं राजनेताओं का भविष्य बना या बिगाड़ देते हैं।