कांग्रेस

कांग्रेस : विनाश काले विपरीत बुद्धि

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सिमटने के बाद कांग्रेस ने अपने आपको संभालने का कोई प्रयास नहीं किया, इसके चलते उसे देश के महत्व पूर्ण राज्यों में भी पराजय का दंश झेलना पड़ा। कांग्रेस ऐसा क्यों कर रही है, इसका जवाब यही हो सकता है कि सरकारी सुविधाओं के बिना कांग्रेस के नेताओं की स्थिति जल बिन मझली के समान हो जाती है। उसकी तड़पन कांग्रेसी नेताओं के स्वरों में सुनाई देती है।

कांग्रेस का एक ही गलती को बार-बार दोहराना ?

कांग्रेस की नई राजनीतिक अलोचना की शुरूआत यहीं से होती है। जब भाजपा एवं अन्‍य राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने इस विषय को लेकर कांग्रेस को घेरा तो उसने सफाई दी कि यह प्रिंट की गलती है। क्‍या कांग्रेस जैसी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी से यह अपेक्षा की जा सकती है‍ कि वह इस प्रकार की ग‍लतियां करने की गुंजाइश अपने यहां रखे, जबकि उसे पता है कि उसके एक नेता पं. नेहरू की गलती जम्‍मू-कश्‍मीर मामले पर इतनी भारी पड़ी है कि देश आजतक उसे भुगत रहा है।

कहीं अपने होने का अर्थ ही न खो दें राहुल गांधी !

राहुल गांधी शुरू से ही राजनीति को लेकर दुविधा में दिखते रहे हैं। वे सार्वजनिक रूप से यहां तक कह चुके हैं कि सत्ता तो जहर है। लेकिन फिर भी मनमोहन सिंह की पहली सरकार में ही मंत्री बन गए होते, तो देश चलाना सीख जाते और सत्ता का जहर पीना भी। कांग्रेस ने अगली बार फिर जब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था, तब भी उनको न बनाकर, राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया जाता, तो कोई कांग्रेस का क्या बिगाड़ लेता ?

गुजरात की आंधी में मारवाड़ का ‘गांधी’

दिसंबर से पहले गुजरात में चुनाव होने हैं। लेकिन समय बहुत कम है। थोड़ा सा जमीनी स्तर पर जाकर देखें, तो गहलोत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि गुजरात के कई कई गांवों में न तो कांग्रेस का कोई नाम लेनेवाला है और न ही कोई शुभचिंतक। फिर, प्रदेश में कांग्रेस का कोई भी ऐसा नेता नहीं है, जिसके नाम से कहीं पर भी एक हजार लोग भी इकट्ठे किए जा सकें। गुजरात मं तो राहुल गांधी को भी रोड़ शो के जरिए लोगों की संख्या ज्यादा दिखाने का नुस्खा अपनाना पड़ता है। हालांकि गुजरात के सारे कांग्रेसी नेता थोड़े बहुत जनाधारवाले जरूर हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में माहौल खड़ा कर दे, यह क्षमता किसी में नहीं है। जिस गुजरात में कांग्रेस मरणासन्न अवस्था में हैं, वहां गहलोत के लिए अपनी पार्टी को चुनाव जितवाना तो दूर बल्कि कांग्रेस संगठन को फिर से खड़ा करना भी जिस एक अलग किस्म की चुनौती है, उस पर विस्तार से बात कभी और करेंगे।

असाधारण जनादेश के नैतिक दायित्व

प्रश्न उठता है कि ऐसा क्या है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में। उत्तर है देश को लंबे समय बाद ऐसा नेतृत्व मिला है जिसकी प्रामाणिकता, परिश्रम एवं निष्ठा पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं है। उत्तर है कि प्रधानमंत्री मोदी उस पार्टी के कार्यकर्ता हैं जिसका अधिष्ठान राष्ट सर्वोपरि है। उत्तर है, भाजपा के पीछे उन हजारों, लाखों, करोड़ों कार्यकर्ताओं एवं जन सामान्य का विश्वास है जो भाजपा के सदस्य नहीं हैं पर यह मानते हैं कि देश के लिए आज भाजपा आवश्यक है। उत्तर है, कि आज भाजपा को उनका भी समर्थन प्राप्त है जो परंपरागत रूप से भाजपा के साथ नहीं रहे हैं।