नोटबंदी

‘नोटबंदी’ के बाद ‘बत्ती बंदी’ यानी बड़ा फैसला…

अब बात करें राज्य सरकारों की तो, केन्द्र की भांति राज्य सरकार इस पर फैसला खुद लेगी,लेकिन माना जा रहा है कि केन्द्रीय फैसले के बाद राज्यों पर इसे लागू करने का दबाव रहेगा। दरअसल खासकर भाजपा शासित राज्यों पर इसका सीधा असर आएगा। हालांकि,पहले बहुत सारे मंत्री ‘लालबत्ती’ होने के पक्ष में बयान देते रहे हैं,तो अब इसे छोड़ने से उनके दिल में कसक तो रहेगी,पर इसे जनहित में सही समय पर लिया गया स्वस्थ निर्णय मानना इनकी भी मजबूरी है। यदि फैसले की खिलाफत की तो सम्भव है कि,पीएम ऐसे मंत्रियों को पुराने नोट की तरह अनुपयोगी कर दें।

नोटबंदी की तरह शराबबंदी भी

आज जरुरत इस बात की है कि देश में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। इस प्रतिबंध के बावजूद शराब रुकेगी नहीं, जैसे कि हत्याएं नहीं रुकतीं। इस्लाम में शराब की मनाही है लेकिन इस्लामी देशों के घरों में शराब के भंडार भरे होते हैं। इसीलिए कानून से भी ज्यादा संस्कार की जरुरत है। बचपन से ही यदि शराब या नशाबाजी के खिलाफ संस्कार दिए जाएं तो शराबबंदी के कानून का पालन सही ढंग से हो सकता है।

अवमानना के लिए विशेषाधिकार का प्रयोग क्यूँ नहीं ?

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का कितना बड़ामखौल है इस देश में कि वर्तमान प्रधानमंत्री के लिये अभद्रशब्दों और गालियों का प्रयोग अधिकतर विपक्ष के नेता और छुटभइये कर सकते हैं परंतु वर्तमान प्रधानमंत्री किसी पूर्व प्रधानमंत्री को रेनकोट पहनकर स्नान करने की बात नहीं कह सकता। वर्तमान सरकार के नोटबंदी के निर्णय को पूर्व प्रधानमंत्री संगठित लूट और कानूनी लूट की संज्ञा तो दे सकता है परंतु पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुए अरबों के बहुचर्चित घोटालों जिनके लिये सर्वोच्च न्यायालय तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था, की ओर इशारा तक वर्तमान प्रधानमंत्री नहीं कर सकता।

मौत के सौदागर से लेकर रेनकोट स्नान तक किसका सर्वाधिक अपमान

नोटबंदी के बाद से अब तक यह सभी दल लगातार पीएम मोदी को डिगाने की साजिशें रच रहे हैें। संसद का पिछला सत्र पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया और पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों की बौछार होती रही। लेकिन यह पीएम मोदी का 56 इंच का सीना ही है कि वह लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। रेनकोट वाले बयान पर पीएम मोदी को माफी मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है

इससे लोकतंत्र का बागवां महकेगा

विमुद्रीकरण के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब मोदी सरकार चुनाव सुधार की दिशा में भी बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है। संभव है सारे राष्ट्र में एक ही समय चुनाव हो- वे चाहे #लोकसभा हो या #विधानसभा। इन चुनाव सुधारों में दागदार नेताओं पर तो चुनाव लड़ने की पाबंदी लग ही सकती है, वहीं शायद एक व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा?

बीता साल नोटबन्दी का हाहाकार : क्राइम ग्राफ नीचे

#नोटबंदी के बाद काली कमाई को ठिकाने लगाने के कई दिलचस्प किस्से सामने आए. कहीं जुगाड़ से काले धन को बैंक में जमा करा लिया तो कहीं पर पैसों को दान-दक्षिणा में बांट दिया…लेकिन, जब इतने से भी मामला सेट नहीं हुआ तो धन कुबेरों को पानी में बहाना पड़ा काली कमाई का खजाना.