न्यायपालिका

क्या न्यायपालिका सर्वशक्तिमान है?

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह कि पारदर्शिता के इस दौर में और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पारदर्शिता की पक्षधर न्यायपालिका अपने लिए पारदर्शिता की पक्षधर नहीं है। वह रंच-मात्र भी जवाबदेह नहीं होना चाहती। वह सबके मामले में हस्तक्षेप कर सकती है, यहां तक कि कानून भी बना सकती है जो संसद का काम है, पर अपने मामले में वह कोई नियंत्रण स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हद्द है – अब न्यायपालिका के खिलाफ भी जिहाद ?

 उपानंद ब्रह्मचारी शरीयत का प्रचार करने वाली मुस्लिम मौलवियों की सबसे शक्तिशाली संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद

न्यायपालिका और लोकतंत्र – राजीव तिवारी

न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका का समन्वित स्वरूप ही लोकतंत्र होता है। लोकतंत्र में न्यायपालिका, विधायिका