महंगाई पर एक और चर्चा

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मृत्युंजय दीक्षित विगत कुछ दिनों से देश में बढ़ रही महंगाइ्र्र पर चर्चा फिर शुरू हो गयी है। यह चर्चा संसद से लेकर सड़क तक हर तरह के प्लेटफार्म पर हो रही है। जब घरों में परिवारों के सदस्य मिल बैठकर कोई बहस प्रारम्भ करते हैं तो फिर चर्चा का विषय महंगाई बम पर ही… Read more »

मंहगाईः कभी ‘डायन’, कभी ‘डाॅल’ जैसी

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संजय सक्सेना खाद्य पदार्थो में समय-बेसमय लगने वाला मंहगाई का ‘तड़का’ आम जनता का बजट बिगाड़ देता है। मंहगाई प्रत्यक्ष तौर पर गृहणियों की रसोई से जुड़ा मसला है, इस लिये इसका प्रभाव भी ज्यादा तीव्र गति से दिखाई देता है। चारों तरफ हाहाकार मच जाता है। मंहगाई गृहणियों और आम जनता को रूलाती हैं।… Read more »

भ्रष्टाचार का गरलः निजात नहीं सरल

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-ललित गर्ग- चाणक्य ने कहा था कि जिस तरह अपनी जिह्ना पर रखे शहद या हलाहल को न चखना असंभव है, उसी प्रकार सरकारी कोष से संबंधित व्यक्ति राजा के धन का उपयोग न करे, यह भी असंभव है। जिस प्रकार पानी के अन्दर मछली पानी पी रही है या नहीं, जानना कठिन है, उसी… Read more »

केंद्र क्यों नहीं कर रहा महंगाई रोकने के विकल्पों की तलाश ?

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-डॉ. मयंक चतुर्वेदी- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में उछाल का रुझान है। जब से बाजार में तेल कीमतों में वृद्धि होना शुरू हुआ है, तभी से लगातार भारत में भी अंतरराष्ट्रीय मार्केट के भरोसे छोड़े जा चुके तेल दामों में कुछ समय के अंतराल के बाद वृद्धि की जा रही है। यहां… Read more »

अच्छे दिन के निहितार्थ

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-वीरेन्द्र सिंह परिहार- विरोधी दलों का तो काम ही है, विरोध करना। पर आजकल स्थिति यह है कि जहां देखो, वही आम नागरिक भी मोदी सरकार को लेकर तंज कस रहे है- ‘लो अच्छे दिन आ गए।’ निश्चित रूप से ऐसी बातें देश में बढ़ती महंगाई को लेकर है। लोगों को इस बात की शिकायत… Read more »

अब वसूली का समय है

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-आलोक कुमार- कीमतें बढ़ने के पीछे उत्पादन की कमी, मानसून इत्यादि जैसे कारण तो हैं ही। लेकिन महंगाई की असली वजह यह है कि खेती की उपज के कारोबार पर बड़े व्यापारियों, बिचौलियों और काला-बाज़ारियों का कब्ज़ा है। ये ही जिन्सों के दाम तय करते हैं और जान-बूझ कर बाज़ार में कमी पैदा करके चीज़ों… Read more »

महंगाई पर नियंत्रण करके दिखाना होगा

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-रमेश पाण्डेय- महंगाई बढ़ने का सिलसिला जारी है। इस आलम में महंगाई कम कैसे होगी या फिर इस पर प्रभावी नियंत्रण कैसे लग सकेगा, इसे अब करके दिखाना होगा। प्रधान समस्या है, राष्ट्रीय सकल उत्पादन में कृषि का घटता योगदान। कृषि में भारत जब तक आत्मनिर्भर नहीं हो जाता तब तक आम जनता की क्रय… Read more »

महंगाई के कारण यह भी हैं!

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भारत में पिछली शताब्दी के प्रारम्भ से ही अनाज के व्यापार में आढती शामिल हो गए थे. फसल आने से पहले ही ये किसानो से तथा खाद्यान प्रोसेसर जैसे कि बिस्कुट आदि के उत्पादक, आदि से सौदा कर लेते थे. इससे किसानों को भी उचित दाम मिल जाता था तथा खाद्यान प्रोसेसर भी निश्चित मूल्य… Read more »

मनमोहन प्रेम का अंत

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी मनमोहन सरकार का आम जनता के साथ अन्तर्विरोध प्रखर हो गया है। जिन लोगों ने यह सपना देखा था कि नव्य आर्थिक नीतियां मध्यवर्ग के लिए फायदेमंद हैं और यह वर्ग कम से कम चैन की बंशी बजाएगा।आज वे लोग निराश हैं। मनमोहन सरकार ने मध्यवर्ग के चैन को बेचैनी में बदल दिया… Read more »

महंगाईःसरकार और सच्चाई

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हिमांशु शेखर जम्मू-कश्मीर के सोपोर के रहने वाले अब्दुल हामीद और उनके परिवार की आमदनी का मुख्य जरिया उनका सेव का बगान है. उनके बगान में सेव के तकरीबन 300 पेड़ हैं. हर साल वे बड़ी सिद्दत से सेव के पेड़ों में फल लगने का इंतजार करते हैं. क्योंकि इसी पर उनके पूरे परिवार का… Read more »