महिला

माँ, ममता और महिला

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ की आध्यात्मिक ताक़त वाला राष्ट्र जिसकी रगों में नारी का सम्मान बसा हुआ है, किंतु दुर्भाग्य इस कलयुगी पौध का जो यौवन के मदमास में अपने गौरवशाली इतिहास की किताबो को कालिख पोतते हुए अपमान के नए अंगवस्त्र तैयार कर रही है, वो भूल गई ‘यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया’ अर्थात जिन घरों में स्त्रियों का अपमान होता है, वहां सभी प्रकार की पूजा करने के बाद भी भगवान निवास नहीं करते हैं।

तीन तलाक के बहाने महिलाओ के मौलिक अधिकारो का हनन

इसका अभिप्राय यह है कि मानवीय दृष्टिकोण से व्यवस्था को दुरुस्त करना ना तो सांप्रदायिक है ना शरीयत के खिलाफ जैसा कि कुछ लोग हमेशा बखान करते मिलते हैं ।अगर ऐसा होता तो मुस्लिम देश इस तरह की सुधारवादी पहल ना करते।

ईसाई धर्म और नारी मुक्ति / प्रो. कुसुमलता केडिया

प्रो. कुसुमलता केडिया क्रिश्चिएनिटी की जिन मान्यताओं के विरोध में यूरोपीय नारी मुक्ति आंदोलन वीरतापूर्वक