मुसलमान

म्यांमार के बाद अब श्रीलंका में मुसलमान बौद्धों के निशाने पर क्यों?

श्रीलंका में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण  वर्षा शर्मा श्रीलंका में बौद्ध बनाम मुस्लिम सांप्रदायिक हिंसा के बाद

शमसोई गांव के वाल्मीकि समाज के लोग क्यों मुसलमान होना चाहते हैं ?

दूसरी तरफ कुछ सवालात उन लोगों से भी होने चाहिए जो लगता है कि इस्लाम मज़हब को दूसरों को ब्लैकमेल करने का ज़रिया समझ बैठे हैं। आपकी नज़र में इस्लाम क्या है ? यह सब से पहला सवाल है। क्या आप जानते हैं कि इस्लाम ही वह मज़हब है जो कहता है कि अगर तुम मुझ पर मुकम्मल यक़ीन रखोगे और मेरे बताए तरीक़े पर अमल करोगे तो दुन्या और परलोक दोनों में तुम्हारी कामयाबी स्पष्ट है।

हमारे मुसलमान भी क्या मुसलमान हैं?

तीन तलाक, निकाह हलाला, बहुपत्नीवाद, पशु-बलि, बुर्का, मांसाहार, ताबीज, आदि ये सब बातें किसी भी धर्म के शाश्वत और सार्वदेशिक लक्षण नहीं हो सकते। इन्हें देश-काल के मुताबिक बदलते रहना चाहिए। यही बात शरिया, रोमन और ग्रीक लॉ पर भी लागू होती है। आज स्त्री-पुरुष समानता का युग है। इसमें यदि आदमी तीन बार बोलकर औरत को तलाक दे सकता है तो औरत भी तीन बार बोलकर आदमी को

कौन हैं मुसलमानों को योगी का डर दिखाने वाले लोग?

कुछेक बयानों को आधार बनाकर यह लोग योगी आदित्यनाथ को बदनाम कर रहे हैं। निश्चित तौर पर उनके कुछ बयान कड़े हैं, लेकिन समूचा देश यह भी जानता है कि वे बयान अकारण नहीं आए थे। उन बयानों के पीछे एक पीडि़त,आहत और व्यथित मन था। योगी की कट्टर छवि गढऩे वाले मीडिया और कम्युनिस्टों को आज से 10 साल पहले वर्ष2007 में संसद में दिए गए गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ का आँसुओं से तरबतर पूरा भाषण सुनना चाहिए। प्रोपोगंडा फैलाने में माहिर और हिटलर के सूचना मंत्री गोएबल्स के वंशज यह लोग क्या इस बात का जवाब दे सकते हैं कि संसद में एक संत क्यों फफक-फफक कर रोया था?