योगी

महापुरूषों की आत्माओं ने कहा धन्यवाद ‘योगी’

कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह शिक्षा की दुर्दशा के मुद्देनजर विद्यालयों में महापुरूषों के नाम पर होने वाली सरकारी छुट्टियां रद्द करके उनके बारे में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिये है उसका न केवल सूबे की जनता ने दिल खोलकर स्वागत किया है वरन् प्रदेश व देश के शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विदों ने भी सराहना की है।

दहाड़ एक योगी की !

कार्यालयों में कार्य संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने केन्द्र के कार्यालयों की भांति बायोमैट्रिक प्रणाली अपनाने पर जोर दिया ताकि हाजरी लगाकर अनुपस्थिति होने की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सके। कौन नहीं जानता कि आज अनेक विभागों की हालत यह है कि अधिकारी कर्मचारी ११-१२ बजे तक आते है और ३-४ बजे तक घर निकल जाते है।

योगी का पराक्रम और प्रताप

उत्तर प्रदेश की जनता को पुन: एक बार बधाई, जिसने परिपक्व निर्णय लिया और सत्ता की चाबी सत्ता के दलालों (त्रिशंकु विधानसभा बनने पर जो लोग सत्ता में अपनी-अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपना-अपना हिस्सा मांगते) के हाथों में न देकर सीधे एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में सौंप दी-जिसके आने की आहट से ही गौमाता को राहत की सांस मिलनी आरंभ हो गयी। पराक्रम इसी का नाम होता है कि जिसके पुण्य कर्मों से निर्मित उसका पुण्यमयी प्रतापी आभामण्डल समाज के अतिवादी लोगों को कंपायमान कर दे और सज्जनों को चैन की सांस दिला दे।

यूपी में योगी के साथ ‘परिवर्तन’ होगा ‘चमत्कार’ नहीं !

तो नई सरकार के साथ शुरुआत में ही बदलावों की उम्मीद कतई नहीं कीजिएगा। परिवर्तन में वक्त लगता है…क्योंकि आप, हम पिछले कई सालों से खुद को ठगने का अवसर देते रहे हैं…और उसे अब बदलने के लिए वक्त लगना लाजिमी है।